पटना। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखी गई। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच इस मुद्दे पर तनावपूर्ण बहस के बाद सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
“क्या नीतीश फर्जी तरीके से मुख्यमंत्री बने?” — तेजस्वी यादव
तेजस्वी यादव ने SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में संशोधन के लिए चुनाव आयोग द्वारा 11 दस्तावेजों की अनिवार्यता को गरीब विरोधी बताया। उन्होंने कहा,
“गरीब लोग इतने कागजी काम कहां से जुटा पाएंगे? क्या इस प्रक्रिया के आधार पर हुए चुनाव वैध थे? क्या नीतीश कुमार फर्जी तरीके से मुख्यमंत्री बने हैं?”
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि जब चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि मतदाता सत्यापन में किसी भी विदेशी नागरिक या घुसपैठिए का पता नहीं चला, तब भाजपा किस आधार पर घुसपैठियों का दावा कर रही है।
नीतीश कुमार ने किया पलटवार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए तेजस्वी यादव की आलोचना की। उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया में कहा,
“बकवास बात मत करिए। जब आपके माता-पिता मुख्यमंत्री थे, तब आप बहुत छोटे थे। आपको उस समय की प्रशासनिक सच्चाई का कोई ज्ञान नहीं है।”
नीतीश ने यह भी कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है, जिससे चुनावी प्रक्रिया में सुधार आएगा।
विपक्ष का आरोप, सरकार दबाव में चुनावी बदलाव कर रही
राजद और महागठबंधन के अन्य दलों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को गरीब और प्रवासी मजदूर विरोधी बताते हुए कहा कि यह चुनाव से पहले सत्ता पक्ष द्वारा की जा रही साजिश है। तेजस्वी ने यह भी कहा कि लाखों की संख्या में बिहारी मजदूर बाहर रहते हैं, जो दस्तावेज नहीं दे पाएंगे और इससे उनका नाम मतदाता सूची से कट सकता है।
सदन में हंगामा, कार्यवाही स्थगित
दोनों पक्षों के नेताओं के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि अध्यक्ष को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। माना जा रहा है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्माएगा, क्योंकि SIR प्रक्रिया से जुड़े सवालों का विपक्ष लगातार जवाब मांग रहा है।


