
समाचार के मुख्य बिंदु: शारीरिक और मानसिक शक्ति के विकास की नई पहल
- आयोजन: विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी (शाखा भागलपुर) द्वारा तिलकामांझी क्षेत्र में 10 दिवसीय योग सत्र का सफल आयोजन।
- समय और स्थान: 16 मार्च से 25 मार्च तक शहीद भगत सिंह लेन स्थित श्री कृष्ण कुंज अपार्टमेंट में सुबह 6 से 7 बजे तक चली कक्षाएं।
- प्रतिभागी: 10 पंजीकृत छात्र-छात्राओं ने नियमित उपस्थिति दर्ज कर योग और ध्यान की सूक्ष्म तकनीकों का अभ्यास किया।
- मुख्य संदेश: नगर प्रमुख डॉ. मिहिर मोहन मिश्र ‘सुमन’ ने एकाग्रता को ही योग की असली कला बताया।
- अगला पड़ाव: विवेकानंद केंद्र ने अपनी अगली योग कार्यशाला के लिए भागलपुर के ‘आदमपुर’ क्षेत्र का चयन किया है।
- VOB इनसाइट: भागलपुर के युवाओं में बढ़ता योग के प्रति रुझान न केवल उनके स्वास्थ्य बल्कि उनकी बौद्धिक क्षमता को भी नई दिशा प्रदान कर रहा है।
भागलपुर | 25 मार्च, 2026
तिलकामांझी की शांत सुबह आज एक नई ऊर्जा और संकल्प के साथ संपन्न हुई। विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की भागलपुर शाखा द्वारा आयोजित 10 दिवसीय विशेष योग सत्र का आज भव्य समापन हो गया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, शहीद भगत सिंह लेन के श्री कृष्ण कुंज अपार्टमेंट में आयोजित इस शिविर ने स्थानीय छात्र-छात्राओं को आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच ‘ध्यान और एकाग्रता’ का अचूक मंत्र दिया है। 16 मार्च से शुरू हुए इस सफर में विद्यार्थियों ने योग को केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला के रूप में अपनाया।
एकाग्रता ही योग की असली कुंजी: डॉ. मिहिर मोहन मिश्र ‘सुमन’
समापन सत्र को संबोधित करते हुए नगर प्रमुख डॉ. मिहिर मोहन मिश्र ‘सुमन’ ने योग के दार्शनिक और व्यावहारिक पहलुओं पर गहराई से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को सफलता का सूत्र देते हुए कहा कि मनुष्य के भीतर शक्तियों का अपार भंडार छिपा है।
उनके संबोधन के प्रमुख अंश:
- शक्तियों का पांच सितारा भंडार: मनुष्य के पास अपनी शारीरिक शक्ति, प्राण शक्ति, बुद्धि शक्ति, संकल्प शक्ति और आत्म शक्ति का विशाल भंडार होता है।
- एकाग्रता का महत्व: इन सभी शक्तियों को एकत्रित कर किसी एक लक्ष्य की ओर एकाग्रता के साथ लगाना ही योग है।
- आत्म-विकास: योग के माध्यम से विद्यार्थी अपनी बुद्धि और संकल्प को इतना मजबूत बना सकते हैं कि वे किसी भी कठिन चुनौती को पार कर सकें।
प्रशिक्षण और सहभागिता: युवाओं ने सीखी ध्यान की तकनीक
इस 10 दिवसीय सत्र में प्रशिक्षकों ने वैज्ञानिक पद्धति से छात्रों को योग की बारीकियां सिखाईं। प्रशिक्षण टीम में आदित्य सनातनी, दुर्गेश कुमार, रजनीश कुमार, अंकिता और रितिका जैसे कुशल प्रशिक्षक शामिल थे, जिन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न शारीरिक मुद्राओं (आसनों) के साथ-साथ ध्यान की आधुनिक तकनीकों का अभ्यास कराया।
सत्र की प्रमुख उपलब्धियां:
- नियमितता: सुबह 6:00 बजे से 7:00 बजे के कड़े अनुशासन में विद्यार्थियों ने अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव महसूस किया।
- शारीरिक मुद्राएं: आसनों के जरिए शरीर को लचीला और रोगमुक्त बनाने के गुर सिखाए गए।
- मानसिक शांति: ध्यान की तकनीकों ने छात्रों को परीक्षा और पढ़ाई के तनाव से मुक्त रहने में मदद की।
VOB का नजरिया: क्यों जरूरी हैं ऐसे योग सत्र?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि विवेकानंद केंद्र जैसे संस्थानों द्वारा मोहल्लों और अपार्टमेंट्स में जाकर योग सिखाना एक सराहनीय कदम है।
- पहुँच और सुलभता: जब योग द्वार-द्वार तक पहुँचता है, तो वे लोग भी इससे जुड़ पाते हैं जो व्यस्तता के कारण बड़े केंद्रों तक नहीं जा पाते।
- संस्कार और स्वास्थ्य: युवाओं को भारतीय संस्कृति और योग से जोड़ना उन्हें नशे और डिजिटल लत जैसी बुराइयों से दूर रखने का सबसे प्रभावी तरीका है।
- सामुदायिक जुड़ाव: ऐसे आयोजनों से समाज में आपसी मेलजोल और सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है।
आदमपुर की ओर बढ़ा विवेकानंद केंद्र का कदम
समापन समारोह के अंत में विवेकानंद केंद्र के विभाग संचालक प्रोफेसर दिलीप कुमार अग्रवाल ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि विवेकानंद केंद्र का अगला योग मिशन अब ‘आदमपुर’ में आयोजित होगा। तिलकामांझी के सफल अनुभव के बाद अब आदमपुर के निवासियों को भी योग और आत्म-शक्ति के इस संगम का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा।


