पटना, 19 जुलाई 2025: बिहार सरकार ने राज्य में गैर-क्रियाशील एनजीओ और सोसायटी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने ऐसी संस्थाओं की पहचान शुरू कर दी है जो केवल कागज पर अस्तित्व में हैं लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सामाजिक गतिविधि नहीं चला रही हैं।
वर्षों से निष्क्रिय एनजीओ होंगे चिह्नित
विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कई एनजीओ न तो अपने पते पर कार्यरत हैं और न ही समाजसेवा से संबंधित किसी निर्धारित कार्य में संलग्न हैं। ऐसे मामलों में निबंधन रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि जो संस्थाएं समाजहित के कार्य में सक्रिय नहीं हैं, उनके लिए अब कोई सहानुभूति नहीं होगी।
ऑनलाइन निबंधन में वृद्धि, लेकिन अनुपालन में गिरावट
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 1860 से 2016 तक राज्य में कुल 34,776 एनजीओ निबंधित हुए। वहीं, 2016 के बाद ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होने के बाद से 4570 नए एनजीओ और 1771 फर्म निबंधित किए गए हैं।
एनजीओ और फर्म में अंतर
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एनजीओ और फर्म दोनों गैर-सरकारी संगठन हैं, लेकिन उनकी प्रकृति और उद्देश्य भिन्न हैं:
- एनजीओ समाज कल्याण के कार्यों में लगे रहते हैं, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण आदि।
- फर्म व्यापारिक हितों के लिए गठित की जाती हैं और मुनाफा अर्जित करना इनका मुख्य उद्देश्य होता है।
एनजीओ के निबंधन के लिए शुल्क:
- राष्ट्रीय स्तर: ₹25,000
- राज्य स्तर: ₹15,000
- फर्म के लिए: ₹1,000
ऑनलाइन निबंधन के लिए आवश्यक दस्तावेज
एनजीओ के ऑनलाइन निबंधन हेतु निम्नलिखित दस्तावेज अनिवार्य हैं:
- आमसभा का प्रस्ताव (कार्यकारिणी के दो पदाधिकारियों द्वारा सत्यापित)
- स्मृति पत्र (कार्यकारिणी सूची व आकांक्षी सूची के साथ)
- कार्यकारिणी सूची: पदधारकों के नाम, पता, पेशा व फोटो
- आकांक्षी सूची: सदस्यों की संपूर्ण जानकारी
- नियमावली (कम से कम तीन पदधारकों द्वारा सत्यापित)
- कार्यालय प्रमाण-पत्र (स्थानीय निकाय पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित)
कड़े नियमों का पालन अनिवार्य
विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिन संस्थाओं ने नियत समय पर अपने दस्तावेजों का नवीकरण या अद्यतन नहीं किया है, उन्हें भी नोटिस भेजा जाएगा। यदि वे तय अवधि में जवाब नहीं देते हैं, तो उनका निबंधन स्वतः रद्द माना जाएगा।


