
भागलपुर, सुल्तानगंज | 18 जुलाई 2025: सावन के पावन महीने में बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर जाने वाले कांवरियों का सैलाब सुल्तानगंज में उमड़ पड़ा है। श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम इस बार एक विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया है—हावड़ा (पश्चिम बंगाल) से आए युवाओं का एक दल, जो अनोखी, रचनात्मक और भारी-भरकम कांवड़ लेकर बाबा के दर्शन को निकला है।
चार धाम एक कांवड़ में
करीब 40 श्रद्धालुओं की इस टोली ने जो कांवड़ तैयार की है, वह सामान्य नहीं, बल्कि विशेष श्रद्धा और नवाचार से सजी है। इस कांवड़ में भारत के चार प्रमुख तीर्थ—बद्रीनाथ, द्वारका, रामेश्वरम और जगन्नाथ पुरी—की आकर्षक प्रतिकृतियाँ सजाई गई हैं। करीब 150 से 200 किलोग्राम वजनी इस कांवड़ को श्रद्धालु कंधे पर उठाकर सुल्तानगंज से देवघर तक पैदल यात्रा कर रहे हैं।
भक्ति में नवाचार का संदेश
हावड़ा से आए एक भक्त ने बताया, “हम हर साल बाबा को रिझाने के लिए एक नई थीम पर कांवड़ बनाते हैं। इस बार हमने चारों धामों को जोड़ते हुए बाबा को सम्पूर्ण भारत की तीर्थ परंपरा अर्पित करने का निर्णय लिया। यह हमारे लिए केवल परंपरा नहीं, बल्कि भावनाओं का समर्पण है।”
श्रद्धालु दल ने अजगैबीनाथ घाट से गंगाजल भरकर अपनी यात्रा की शुरुआत की और ‘हर हर महादेव’, ‘बोल बम’ के जयघोषों के साथ आस्था से लबरेज़ कदमों से आगे बढ़ रहा है। उनकी भव्य कांवड़ जहां-जहां पहुंच रही है, वहां श्रद्धालु और राहगीर रुककर इसे निहार रहे हैं और भक्ति में डूब जा रहे हैं।
आस्था में रचनात्मकता की मिसाल
यह यात्रा जहां भक्ति का अद्भुत प्रतीक बन गई है, वहीं यह भी दर्शाती है कि परंपरा में रचनात्मकता जोड़कर श्रद्धा को और गहराया जा सकता है। इन श्रद्धालुओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब भावना और समर्पण से भक्ति जुड़ती है, तब वह केवल अनुष्ठान नहीं रह जाती, बल्कि एक प्रेरणादायक अनुभव बन जाती है।
इस वर्ष के श्रावणी मेले में हावड़ा की यह चार धाम कांवड़ निश्चित ही एक भक्ति, नवाचार और सांस्कृतिक एकता का अनूठा उदाहरण बन गई है।


