किसानों की जरूरतों पर आधारित हो कृषि अनुसंधान : डॉ. एम. एल. जाट

आईसीएआर महानिदेशक ने पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में किया भ्रमण, “विकसित कृषि संकल्प 2047” हेतु दिए महत्वपूर्ण सुझाव

पटना, 18 जुलाई 2025।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एम. एल. जाट ने शुक्रवार को आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना का दौरा किया और संस्थान की बहुआयामी प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि कृषि अनुसंधान किसानों की मांग और क्षेत्रीय आवश्यकताओं पर आधारित होना चाहिए।

इस अवसर पर डॉ. जाट ने दो अत्याधुनिक सुविधाओं — बहुपयोगी विक्रय केंद्र और जलवायु-अनुकूल कृषि अनुसंधान हेतु ओपन टॉप चैम्बर — का उद्घाटन किया। उन्होंने संस्थान के खेतों, प्रयोगशालाओं, पशुधन एवं मछली पालन इकाइयों का निरीक्षण कर अनुसंधान की दिशा और गहराई की सराहना की।

पूर्वी भारत के लिए दी दिशा

डॉ. जाट ने कहा कि पूर्वी भारत में कृषि की प्रचुर संभावनाएं हैं, लेकिन यह क्षेत्र जलवायु और संसाधनों की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण भी है। उन्होंने धान-परती भूमि के गहन उपयोग, प्राकृतिक खेती मॉडल का विकास, और ड्रोन आधारित बीज बुआई जैसे पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता जताई।

उन्होंने कहा, “समेकित कृषि प्रणाली को किसानों की जरूरतों के अनुसार सुदृढ़ करें, अनुसंधान ज़मीन से जुड़े और परिणामदायक हो।” साथ ही उन्होंने “एक टीम – एक कार्य” के सिद्धांत पर काम करने और विकसित कृषि संकल्प अभियान 2047 में सक्रिय योगदान की अपील की।

किसानों से संवाद और नई पहलें

अपने भ्रमण के दौरान डॉ. जाट ने ‘धान की सीधी बुआई में खरपतवार प्रबंधन’ विषय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे किसानों से सीधा संवाद किया और उनकी चुनौतियों को समझते हुए उन्हें समाधानपरक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर संस्थान की वार्षिक प्रकाशन “प्रयास” का विमोचन किया गया, जो पूर्वी भारत के सात राज्यों में सीमांत किसानों के बीच की गई पहलों को दर्शाता है। साथ ही, “कौशल से किसान समृद्धि” नामक नई योजना की शुरुआत की गई और आम की कलमकारी पर आधारित एक महिला कृषक उत्पादक संगठन के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

उपस्थित रहे प्रमुख वैज्ञानिक

इस कार्यक्रम में डॉ. अंजनी कुमार, निदेशक, अटारी पटना; डॉ. आर.के. जाट, वरिष्ठ वैज्ञानिक, बोरलॉग संस्थान, समस्तीपुर समेत आईसीएआर के विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, भाकृअनुप गीत और स्वागत-संगीत के साथ हुई।


 

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