
पटना, 18 जुलाई 2025।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनकल्याणकारी योजनाएं अब केवल कागज़ों की बातें नहीं रह गई हैं, बल्कि बिहार के गांव-गांव में ज़िंदगियों को संवारने वाली हकीकत बन चुकी हैं। विशेषकर ‘मुख्यमंत्री उद्यमी योजना’ और ‘विवाह सहायता योजना’ जैसी पहलों से आमजन को ना केवल आर्थिक संबल मिला है, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई राह भी खुली है।
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना: गोपालगंज में बदले तीन युवाओं के भाग्य
1. रीमा देवी – ‘रीमा एंटरप्राइजेज’ से मिला आत्मविश्वास और पहचान
गोपालगंज की रीमा देवी ने आर्थिक अभावों को पीछे छोड़ते हुए ‘पीआरपी फुटवियर’ ब्रांड की शुरुआत की। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से मिली सहायता ने उनके सपनों को जमीन दी। आज उनका उद्यम गुणवत्ता, आराम और उचित मूल्य के लिए पूरे जिले में सराहा जा रहा है।
2. विषंबर कुमार – शुद्ध सरसों तेल से भरोसे का कारोबार
विषंबर कुमार ने 10 लाख रुपये की सहायता लेकर सरसों तेल उत्पादन इकाई शुरू की। वे बताते हैं, “योजना से मिली सहायता और संसाधनों से न केवल व्यवसाय खड़ा हुआ, बल्कि अब सिवान, छपरा और मोतिहारी तक विस्तार की तैयारी है।”
3. भागीरथी कुमार – रेडीमेड गारमेंट्स से युवाओं को रोजगार
कटैया प्रखंड के भागीरथी कुमार गुप्ता ने रेडीमेड वस्त्र व्यवसाय से यह साबित कर दिया कि सही योजना और मेहनत का मेल सफलता की गारंटी है। उन्होंने बाजार की जरूरत को पहचाना और स्थानीय स्तर पर दर्जनों लोगों को रोजगार देने वाला उद्योग खड़ा कर दिया।
विवाह सहायता योजना: बेटी की शादी में सहारा बने मुख्यमंत्री
गोपालगंज के प्रभुनाथ शर्मा के लिए मुख्यमंत्री की विवाह सहायता योजना एक संजीवनी साबित हुई। सरकार से मिली 50,000 रुपये की मदद से उन्होंने अपनी बेटी की शादी बिना कर्ज के सम्पन्न की। पहले उन्हें योजनाओं की जानकारी नहीं थी, लेकिन सही समय पर मिले मार्गदर्शन ने उनके जीवन को नई दिशा दी।
बिहार बदल रहा है – योजनाओं से ज़मीनी बदलाव
शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और युवाओं को स्वावलंबी बनाने वाली योजनाएं आज गांवों तक वास्तविक लाभ पहुंचा रही हैं। मुख्यमंत्री की ये नीतियां सिर्फ सरकार की घोषणाएं नहीं, बल्कि सशक्त बिहार की नींव रख रहीं हैं।


