
पटना, 13 जुलाई।शिक्षकों का कार्य अन्य किसी भी सरकारी नौकरी से भिन्न और अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अगली पीढ़ियों का निर्माण करते हैं। यह केवल सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक का कार्यालयी कार्य नहीं है, बल्कि एक समर्पणपूर्ण जिम्मेदारी है — यह बात शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने रविवार को नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड स्थित अल्पसंख्यक स्कूलों के निरीक्षण के दौरान कही।
शिक्षकों की समस्याएं सुनीं, समाधान का भरोसा
निरीक्षण के दौरान डॉ. सिद्धार्थ ने एक शिक्षकों द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम को भी संबोधित किया। उन्होंने शिक्षकों की समस्याएं सुनीं और समुचित समाधान का आश्वासन दिया।
विशेषकर स्थानांतरण से जुड़ी समस्याओं पर उन्होंने कहा कि अधिकतर शिक्षकों को उनकी प्राथमिकता के अनुसार स्थान दिया गया है, फिर भी किसी को यदि असुविधा है तो वे आवेदन दें — इस पर विचार किया जाएगा।
स्कूलों में बेंच पर बैठकर शिक्षकों से संवाद
निरीक्षण के दौरान डॉ. सिद्धार्थ ने शिक्षकों के साथ कक्षा की बेंच पर बैठकर संवाद किया। उन्होंने विद्यालयी माहौल का प्रत्यक्ष अवलोकन करते हुए शैक्षणिक गुणवत्ता पर चर्चा की।
इसके अतिरिक्त उन्होंने आसपास के कुछ मदरसों में भी शैक्षणिक गतिविधियों का जायजा लिया और व्यवस्था की सराहना की।
ढाबे पर खुद बनाई चाय, सेंकी लिट्टी
नवादा से लौटते समय बख्तियारपुर मोड़ के पास एक ढाबे पर रुके और वहां मौजूद दुकानदार के साथ चाय बनाई और लिट्टी भी सेंकी। आमजन के बीच उनका यह सहज व्यवहार चर्चा का विषय बन गया।
अल्पसंख्यक स्कूलों में रविवार को जारी रहती हैं कक्षाएं
गौरतलब है कि राज्य के अल्पसंख्यक स्कूलों में शुक्रवार को छुट्टी होती है, अतः रविवार को यहां सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होती हैं।
इस संदर्भ में भी डॉ. सिद्धार्थ ने उपस्थित शिक्षकों और प्रबंधन से शैक्षणिक अनुशासन और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की अपील की।
डॉ. एस. सिद्धार्थ का यह दौरा न केवल शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था के प्रति उनकी गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।


