पटना में फर्जी नौकरी रैकेट का भंडाफोड़: सचिवालय में नियुक्ति का झांसा देकर करता था ठगी, 59 फर्जी एडमिट कार्ड बरामद

पटना, बिहार। राजधानी पटना के रूपसपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

जानकी सिटी अपार्टमेंट से आरोपी गिरफ्तार

गुप्त सूचना के आधार पर रूपसपुर पुलिस ने पूर्वी गोला रोड स्थित जानकी सिटी अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 507 में छापेमारी की। छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपी विश्वजीत कुमार सिंह को गिरफ्तार किया, जो झारखंड के धनबाद जिले के धनसार इलाके का निवासी है।

फर्जी नियुक्ति पत्र और दस्तावेज बरामद

पुलिस ने आरोपी के पास से निम्नलिखित सामग्री बरामद की:

  • 59 फर्जी एडमिट कार्ड और जॉइनिंग लेटर
  • दो मोबाइल फोन
  • दो एटीएम कार्ड
  • बैंक चेकबुक
  • ₹1.80 लाख और ₹1.50 लाख के दो चेक
  • स्टांप पेपर पर बना किरायानामा
  • उम्मीदवारों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र (मैट्रिक, इंटर, ग्रेजुएशन)
  • बैंक पासबुक और अन्य दस्तावेज

इन दस्तावेजों में बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग का लोगो भी पाया गया, जिससे यह फर्जीवाड़ा सरकारी वैधता का भ्रम पैदा करता था।

कैसे करता था ठगी?

थानाध्यक्ष रणविजय कुमार के अनुसार, आरोपी सचिवालय में फील्ड असिस्टेंट (G.D.) के पद पर नियुक्ति का झांसा देकर युवाओं से संपर्क करता था। वह फर्जी ईमेल के माध्यम से अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड भेजता था और इंटरव्यू के लिए बुलाता था।

पुलिस की छापेमारी की भनक लगते ही आरोपी भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

शिकायत के बाद सामने आया मामला

पुलिस को यह कार्रवाई एक शिकायत के बाद करनी पड़ी, जिसमें कुछ अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्हें मिले एडमिट कार्ड नकली हैं और इंटरव्यू के बाद उन्हें संदेह हुआ। उसी के आधार पर पुलिस ने जांच तेज की और इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

“फ्लैट की तलाशी के दौरान हमें कई असली दस्तावेज भी मिले हैं, जिनका गलत इस्तेमाल किया गया। मामले में न्यायिक हिरासत में भेजा गया आरोपी गिरोह का एक सदस्य है, अन्य की तलाश जारी है।”
रणविजय कुमार, थानाध्यक्ष, रूपसपुर

जांच जारी, अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस

फिलहाल आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। यह मामला राज्य में चल रहे फर्जीवाड़े के नेटवर्क का संकेत देता है, जिस पर पुलिस की पैनी नजर बनी हुई है।


 

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