राज्य में लागू हुई भारत की पहली ‘पुल प्रबंधन एवं संधारण नीति’, 3968 पुलों में से पहले चरण में 85 पर होगा सेफ्टी ऑडिट
पटना, 24 जून |बिहार में पुलों की सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और लंबी उम्र को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। मंगलवार को बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड और IIT पटना व IIT दिल्ली के बीच एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर हुआ। इसके तहत पहले चरण में राज्य के 85 वृहद पुलों का ब्रिज सेफ्टी ऑडिट और हेल्थ रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
सेफ्टी ऑडिट से बढ़ेगी पुलों की उम्र
पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने जानकारी दी कि इस साझेदारी से पुलों की संरचनात्मक स्थिति का मूल्यांकन, गंभीर तकनीकी खामियों की पहचान, और रखरखाव की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने इसे राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास की दृष्टि से बेहद अहम बताया।
बिहार में कुल 3968 पुल हैं, जिनमें 532 को वृहद श्रेणी में रखा गया है। इनमें से पहले चरण में चुने गए 85 पुलों का सेफ्टी ऑडिट वर्षभर में पूरा होगा।
IIT को सौंपा गया ज़िम्मा: 17 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति
- IIT पटना: 45 पुलों का ऑडिट
- IIT दिल्ली: 40 पुलों का ऑडिट
इस कार्य के लिए पथ निर्माण विभाग ने ₹17 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। सभी पुलों की लंबाई 250 मीटर से अधिक है और ये राज्य के प्रमुख मार्गों पर स्थित हैं।
भारत की पहली पुल प्रबंधन नीति लागू: ‘बिहार ब्रिज पॉलिसी 2025’
राज्य सरकार ने ‘बिहार राज्य पुल प्रबंधन एवं संधारण नीति – 2025’ को लागू कर दिया है। मंत्री नितिन नवीन ने बताया कि यह नीति भारत में किसी भी राज्य द्वारा अपनाई गई पहली ऐसी नीति है, जो सभी पुलों के दीर्घकालिक संधारण, समयबद्ध मरम्मत और लागत में कमी सुनिश्चित करेगी।
हेल्थ कार्ड बनेगा, ड्रोन और सेंसर से निगरानी
इस नीति के तहत अब प्रत्येक पुल का एक हेल्थ कार्ड तैयार होगा। इसके लिए आधुनिक तकनीकों जैसे:
- विजुअल इंस्पेक्शन
- नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग (NDT)
- सेंसर टेक्नोलॉजी
- ड्रोन कैमरा सर्वे
का उपयोग किया जाएगा।
इन तकनीकों के जरिए दो सूचकांक तैयार किए जाएंगे:
- ब्रिज हेल्थ इंडेक्स
- मेंटेनेंस प्रायोरिटी इंडेक्स
इन डेटा के आधार पर पुलों की मरम्मत और रख-रखाव को समयबद्ध और प्रभावी बनाया जाएगा, जिससे उनकी उम्र बढ़ेगी और उपयोगिता सुनिश्चित होगी।


