पटना, 23 मई 2025 – बिहार के माननीय उपमुख्यमंत्री-सह-कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कृषि क्षेत्र में भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि फसल मौसमों के लिए पारंपरिक भारतीय नामों—शारदीय (खरीफ), वसंतीय (रबी) और ग्रीष्मकालीन (गरमा)—को आधिकारिक रूप से अपनाया जाए।
श्री सिन्हा ने कहा, “हमारे किसान आमतौर पर फसलों की पहचान मौसम और नक्षत्रों के अनुसार अपनी मातृभाषा में करते हैं। ऐसे में मुगलकालीन शब्दावली जैसे ‘खरीफ’ और ‘रबी’ अब अप्रासंगिक हो चुके हैं। हमें अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहिए और किसानों की भाषा को ही आधिकारिक भाषा बनाना चाहिए।”
उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में वे माननीय केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर यह आग्रह करेंगे कि पारंपरिक नामों को सरकारी योजनाओं, दस्तावेजों और संवादों में अपनाया जाए।
श्री सिन्हा ने यह भी कहा, “हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और बिहार के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ‘एक देश, एक कृषि, एक टीम’ के मंत्र के साथ हम न केवल कृषि के क्षेत्र में विकास करेंगे, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी सशक्त बनाएंगे।”
राज्य के सभी जिलों में आज ‘शारदीय फसल 2025 महाभियान सह प्रशिक्षण कार्यशाला’ का आयोजन किया गया, जिसमें जिलों को फसल आच्छादन लक्ष्य, बीज व्यवस्था, और केंद्र व राज्य योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य किसानों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करना और उनकी भाषा में योजनाओं को समझाना है।
यह पहल न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को किसानों के और करीब लाएगी, बल्कि भारतीय भाषाओं और परंपराओं को भी पुनः प्रतिष्ठित करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।


