सुप्रीम कोर्ट ने किया जजों की नियुक्ति प्रक्रिया का खुलासा: कितने रिश्तेदार, कितनी महिलाएं और वंचित वर्ग से कितने?

2025 तक हाई कोर्ट जजों की 221 सिफारिशों का खुला ब्योरा, 14 रिश्तेदार, 34 महिलाएं, और वंचित वर्ग से भी हुआ प्रतिनिधित्व

नई दिल्ली | लीगल रिपोर्ट | 6 मई 2025

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया और आंकड़े सार्वजनिक कर दिए हैं। कोर्ट ने 2022 से 2025 के बीच हाई कोर्टों में जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम द्वारा की गई 221 सिफारिशों का विस्तृत विवरण अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया है।

221 में 14 रिश्तेदार, पारदर्शिता का दावा

सुप्रीम कोर्ट द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 221 सिफारिशों में से 14 लोग (6.3%) ऐसे हैं जिनका संबंध किसी मौजूदा या पूर्व न्यायाधीश के परिवार से है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ‘रिश्तेदार’ की परिभाषा में पिता, माता, सास-ससुर, भाई-बहन, बहनोई और भाभी शामिल हैं।

इन 14 में से 13 को केंद्र से मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 1 नाम (रोहित कपूर, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट) अभी मंजूरी के इंतजार में है।

महिला, SC-ST, OBC और अल्पसंख्यक भी शामिल

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी जानकारी दी कि कॉलेजियम की 221 सिफारिशों में 34 महिलाएं, 8 अनुसूचित जाति (SC), 7 अनुसूचित जनजाति (ST), 33 ओबीसी, 7 एमबीसी/बीसी और 31 अल्पसंख्यक वर्ग से हैं। यह आंकड़े न्यायपालिका में विविधता और सामाजिक समावेश की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।

दो मुख्य न्यायाधीशों के कार्यकाल में कितनी नियुक्तियाँ?

  • CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ (9 नवंबर 2022 – 10 नवंबर 2024)
    इस कार्यकाल में कॉलेजियम ने 303 नामों की सिफारिश की, जिनमें से 170 नामों को मंजूरी मिली। इनमें 12 रिश्तेदार शामिल थे।
  • CJI संजीव खन्ना (11 नवंबर 2024 – 5 मई 2025)
    इनके कार्यकाल में 103 नामों की सिफारिश की गई, जिनमें से 51 को मंजूरी मिली। इनमें 2 रिश्तेदार शामिल हैं।

संपत्ति का खुलासा भी: 21 सुप्रीम कोर्ट जजों की संपत्ति सार्वजनिक

इस पहल के तहत सुप्रीम कोर्ट ने 21 मौजूदा जजों की संपत्ति का ब्योरा भी अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है। यह भारत के न्यायिक इतिहास में पहली बार हुआ है कि शीर्ष अदालत ने इतनी गहराई तक जन-सूचना साझा की है।

भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोपों का जवाब?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह कदम न्यायपालिका में पारदर्शिता और लोगों की जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इससे उन आरोपों का जवाब देने में मदद मिलेगी, जो समय-समय पर भाई-भतीजावाद, भेदभाव और वर्गीय असंतुलन को लेकर लगाए जाते रहे हैं।

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