नालंदा (बिहार): एक ओर जहां सरकारें “आत्मनिर्भर भारत” और “स्वरोजगार” को बढ़ावा देने की बात करती हैं, वहीं दूसरी ओर बिहार के नालंदा से एक ऐसी खबर सामने आई है जो ज़मीनी सच्चाई को आईना दिखाती है। यहां जिला परिषद कार्यालय के बाहर चाय बेचने वाले कारू राम नामक दुकानदार पर नेताओं और अधिकारियों की मेहरबानी इतनी भारी पड़ गई है कि वो कर्ज में डूब गए हैं। वजह है पिछले दो सालों में सवा लाख रुपये की उधारी चाय।
दो साल में 1.25 लाख की चाय उधार, अब तक नहीं मिला भुगतान
कारू राम नालंदा जिला परिषद कार्यालय के बाहर बीते कई वर्षों से चाय की दुकान चला रहे हैं। उनकी दुकान नेताओं, अधिकारियों और कर्मचारियों की पहली पसंद रही है। लेकिन पिछले 24 महीनों से उन्होंने उधारी पर चाय पिलाई और अब हालात यह हैं कि उन्हें चाय बनाने के लिए भी कर्ज लेना पड़ रहा है।
कारू राम ने कहा:
“मैंने विश्वास करके चाय पिलाई, लेकिन अब हाल यह है कि उधार लेकर चाय बना रहा हूं। कब मिलेगा पैसा, ये खुद मुझे नहीं पता है।”
उधारी की रकम में पूर्व और वर्तमान परिषद दोनों शामिल
कारू राम ने जानकारी दी कि उनकी उधारी की कुल राशि लगभग 1 लाख 25 हजार रुपये है, जो सिर्फ पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष के कार्यकाल की नहीं है, बल्कि वर्तमान कार्यकाल में भी भुगतान नहीं हो पाया है। अधिकारी और जनप्रतिनिधि लगातार आश्वासन देते रहे, लेकिन भुगतान आज तक नहीं हुआ।
पुश्तैनी है चाय बेचने का पेशा
कारू राम का यह काम कोई नया नहीं है। उनके दादा और परदादा भी नालंदा जिला परिषद परिसर में चाय बेचते थे। उन्होंने इसी विरासत को आगे बढ़ाया और अब वर्षों से वही काम कर रहे हैं। लेकिन अब ये पेशा उनके लिए आर्थिक संकट का कारण बन गया है।
जिला परिषद अध्यक्ष ने मानी देरी, प्रशासनिक प्रक्रिया को ठहराया जिम्मेदार
नालंदा जिला परिषद अध्यक्ष तनुजा कुमारी ने भी इस मामले को स्वीकार करते हुए कहा:
“मैं स्वीकार करती हूं कि परिषद में न केवल चाय विक्रेता, बल्कि कई अन्य सेवा प्रदाता भी भुगतान की प्रतीक्षा में हैं। यह प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी का परिणाम है। हम जल्द हल निकालने की कोशिश कर रहे हैं।”
परिवार पालने के लिए संघर्ष कर रहा है कारू राम
अब कारू राम कर्ज लेकर चाय बना रहे हैं और किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। लेकिन उनकी चिंता ये है कि इतनी बड़ी रकम कैसे वसूल होगी? क्या उन्हें उनकी मेहनत की कमाई कभी मिल पाएगी?


