‘टॉपर्स की फैक्ट्री’ सिमुलतला स्कूल को झटका, टॉप 3 में कोई छात्र नहीं, नतीजों ने किया निराश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ‘ड्रीम’ प्रोजक्ट सिमुलतला आवासीय विद्यालय साल दर साल अपना गौरव खोता जा रहा है. जबकि राज्य सरकार ने विद्यालय में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिये बीपीएससी से चयनित 22 शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की थी. बावजूद इसके परिणाम में सुधार दिख नहीं रहा है. सवाल उठने लगे हैं कि जब शिक्षकों की कमी नहीं है और प्रवेश प्रक्रिया भी कठिन है. इसके तहत सिर्फ मेधावी छात्र-छात्राओं का चयन होता है तो क्यों सिमुलतला आवासीय विद्यालय अपने पुराने गौरव को खोता जा रहा है।

क्या कहते हैं सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्र: कुछ समय से मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट वाले सिमुलतला आवासीय विद्यालय के कोई भी छात्र या छात्राएं टॉप 5 में जगह नहीं बना पा रहे हैं. अब तो इसको लेकर स्कूल के शिक्षा व्यवस्था पर ही सवाल उठने लगे हैं. रिजल्ट में लगातार आ रहे गिरवाट को लेकर जब छात्र-छात्राओं से पूछा गया तो उन्होंने इसके पीछे का कारण पेपर लिखने की भाषा को बताया है. छात्रों का कहना है कि वो सभी अंग्रेजी में एग्जाम देते हैं लेकिन उनकी कॉपी की जांच हिंदी मीडियम के शक्षिक करते हैं. यह भी एक कारण है कि उन्हें उतने अंक नहीं मिल पा रहे हैं जितने मिलने चाहिए।

“हम सभी अपनी तरफ से काफी मेहनत कर रहे हैं. हमारे शिक्षक भी हमें काफी अच्छे से पढ़ाते हैं. कमी कहां रह रही है इसके लिए बिहार बोर्ड को टॉपर्स की कॉपी को ऑनलाइन अपलोड करना चाहिए, जिससे अपने हम खुद में और सुधार ला सकें. भाषा भी एक कारण हो सकती है, हम सभी अंग्रेजी में कॉपी लिखते हैं और बिहार बोर्ड के हिंदी मीडियम के शिक्षक उसकी जांच करते हैं इसलिए भी हमें सही से अंक नहीं मिल पाता है.”-छात्र, सिमुलतला आवासीय विद्यालय

क्या कहते हैं विद्यालय के प्राचार्य: सिमुलतला आवासीय विद्यालय के प्राचार्य सुनिल कुमार कहते है कि विद्यालय के छात्र-छात्राएं तो अच्छी मेहनत के साथ गंभीरता से तैयारी कर रहे हैं. उनका स्कूल इंग्लिश मिडियम है, जबकि कॉपियां हिंदी मिडियम के शिक्षकों से जांच कराई जाती है. इंग्लिश मिडियम की कॉपियां इंग्लिश मिडियम के शिक्षकों से ही जांच कराई जानी चाहिए ताकि सही मूल्यांकन हो सके।

“हमारे विद्यालय के सभी छात्र लगातार मेहनत के साथ गंभीरता से तैयारी कर रहे हैं. बावजूद इसके परिणाम में सुधार दिख नहीं रहा है तो इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण भाषा हो सकती है. स्कूल इंग्लिश मिडियम है, जबकि कॉपियां हिंदी मिडियम के शिक्षकों से जांच कराई जाती है. इन कॉपियां का इंग्लिश मिडियम के शिक्षकों से ही जांच कराना चाहिए ताकि सही मूल्यांकन हो सके.”-सुनील कुमार, प्रभारी प्रिंसपल, सिमुलतला आवासीय विद्यालय

मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट सिमुलतला का इतिहास: सिमुलतला आवासीय विद्यालय की शुरूआत साल 2010 में हुई थी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साल 2010 के 9 अगस्त को इसका उद्घाटन किया था. गुरूकुल पद्धति पर आधारित ये आवासीय विद्यालय है. बिहार और झारखण्ड के अलग होने के बाद इंदिरा गांधी आवासीय विद्यालय (हजारीबाग) और नेतरहाट आवासीय विद्यालय (रांची) दोनों झारखण्ड में चले गए थे, तब बिहार के बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुऐ सिमुलतला आवासीय विद्यालय की स्थापना की गई थी. इसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ड्रीम प्रोजेक्ट बताया था. उक्त विद्यालय में कक्षा 6 से 12 तक की पढाई होती है।

सिमुलतला के सात साल के नतीजों पर एक नजर: 2015 के मेट्रिक परीक्षा में टॉप टेन में 30 छात्र-छात्राओं ने जगह बनाई थी. 2016 में टॉप टेन में 42 छात्रों ने शामिल होकर विद्यालय का नाम रौशन किया था. 2019 में केवल 16 छात्र टॉप टेन में पहुंचे थे. 2020 में रिजल्ट अच्छा नहीं रहा सिर्फ 6 छात्रों ने टॉप टेन में जगह बनाई. 2021 में 13 छात्र-छात्राएं टॉप टेन में पहुंचे. वहीं सिमुलतला की शुभदर्शनी और पूजा संयुक्त रूप से टॉपर बने थी. 2022 में निराशा हाथ लगी सिर्फ 5 बच्चे टॉप टेन में जगह बना पाएं. उधर 2024 में भी निराशा हाथ लगी सिमुलतला आवासीम विद्यालय के बच्चे टॉप फाइव या टेन में जगह नहीं बना पाएं।

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