बिहार के इस जिले के ‘रैयत’ नहीं बेच पा रहे अपनी जमीन, यह क्या खेल है?

बिहार में भूमि सर्वेक्षण का कार्य जारी है. दो चरणों में हो रहे जमीन सर्वेक्षण के दौरान रैयतों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. पहले फेज में 20 जिलों में भूमि सर्वेक्षण का कार्य शुरू हुआ.वहीं, दूसरे चरण में 18 जिलों में भूमि सर्वे का काम धीमी गति से चल रहा है. इसी बीच बिहार के जहानाबाद से खबर आई है. जहानाबाद में सैकड़ों रैयत पिछले एक साल से अपनी जमीन नहीं बेच पा रहे हैं.

जानकारी के अनुसार, भूमि उपसमाहर्ता द्वारा किये गये जमीन के डिमांड को लॉक किया गया है. अनलॉक करने की कवायद अब तक शुरू नहीं हो सकी है,  लिहाजा रैयत काफी परेशान हैं. किसी को बेटी की शादी के लिए जमीन बेचना है तो किसी को इलाज के लिए जमीन की बिक्री करनी है. खाता लॉक होने के कारण जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है. रैयत अनलॉक कराने के लिए अब अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, फिर भी उन्हें राहत नहीं मिल पा रही है.

जहानाबाद के रैयतों का कहना है कि डिमांड लॉक रहने की वजह से जमीन की खरीद-बिक्री भी नहीं हो पा रही है, जिसकी वजह से जरूरी काम के लिए लोग चाह कर भी जमीन की बिक्री नहीं कर पा रहे हैं. जिले में सैकड़ों ऐसे जमीन के रैयत हैं, जिनकी डिमांड को सीओ की अनुशंसा पर भूमि उपसमाहर्ता द्वारा लॉक कर दिया गया था. लॉक करने की मुख्य वजह किसी के नाम में त्रुटि थी, तो किसी के रकबा में कमी थी. मामूली भूल की वजह से जमीन के रैयत परेशान हैं.
हाल ही में, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए डिमांड लॉक को अनलॉक करने का अधिकार सीओ को दिया है. इसके बाद रैयत अपने डिमांड को अनलॉक कराने के लिए अंचल कार्यालय का चक्कर लगाना शुरू कर दिया है. जमीन के कागजात में त्रुटि सुधार करने के लिए जमीन मालिक फिर से परिमार्जन प्लस में आवेदन कर रहे हैं, ताकि कागजात में हुई गलती की वजह से डिमांड लॉक जो हुई है वह अनलॉक हो सके. जहानाबाद अंचल के सीओ सुधीर कुमार ने कहा कि सरकार द्वारा लॉक डिमांड को अनलॉक करने की अधिसूचना निकाला गया है, लेकिन पोर्टल पर अभी तक नहीं आया है.

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