पटना, 02 जुलाई 2025।बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग को बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मिली है। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल से पश्चिम बंगाल के हल्दिया पोर्ट तक प्रस्तावित 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण की मार्गरेखा को केंद्र सरकार से औपचारिक स्वीकृति मिल गई है।
इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना से बिहार और नेपाल के बीच माल एवं यात्री परिवहन को नई गति मिलेगी और राज्य के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी जिलों को व्यापक आर्थिक लाभ पहुंचेगा।
पथ निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मिहिर कुमार सिंह ने बताया कि यह एक्सप्रेसवे बिहार के **12 जिलों—रक्सौल, मोतिहारी, शिवहर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, लखीसराय, जमुई, बांका और मुंगेर—**से होकर गुजरेगा। यह मार्ग बिहार की सीमा पार कर झारखंड से होते हुए पश्चिम बंगाल के हल्दिया पोर्ट तक पहुंचेगा।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं:
- कुल लंबाई: 585.350 किमी
- बिहार में लंबाई: लगभग 408 किमी
- निर्माण लागत: लगभग ₹39,000 करोड़
- महत्वपूर्ण संरचनाएं:
- 27 मेजर ब्रिज
- 201 माइनर ब्रिज
- 51 इंटरचेंज
- गंगा नदी पर 4.5 किमी लंबा पुल (बेगूसराय के बिरपुर में)
श्री सिंह ने बताया कि यह एक्सप्रेसवे 120 किमी/घंटा की अधिकतम गति के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे रक्सौल से हल्दिया तक की यात्रा 10 घंटे से भी कम समय में पूरी की जा सकेगी। पुराने मार्गों पर बायपास निर्माण की व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए राज्य सरकार ने ग्रीनफील्ड मार्ग का प्रस्ताव दिया था, जिसे केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है।
श्री सिंह ने कहा,
“यह केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि एक आर्थिक परिवर्तन की आधारशिला है। यह बिहार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक बिहार के किसी भी कोने से राजधानी पटना की दूरी अधिकतम 3 घंटे 30 मिनट में तय की जा सके।”
वर्तमान में बिहार में 5 बड़ी एक्सप्रेसवे परियोजनाएं प्रगति पर हैं:
- रक्सौल–हल्दिया (585 किमी)
- गोरखपुर–सिलीगुड़ी (417 किमी)
- पटना–पूर्णिया (250 किमी)
- बक्सर–भागलपुर (300 किमी)
- वाराणसी–कोलकाता (161 किमी)
यह स्वीकृति बिहार के विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।


