
पटना, 18 अगस्त।बिहार पुलिस ने मानव तस्करी और उससे जुड़े अपराधों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 15 दिनों में राज्य भर से 112 पीड़ितों को मुक्त कराया है। 31 जुलाई से 14 अगस्त तक चलाए गए विशेष अभियान ऑपरेशन नया सवेरा के तहत इन पीड़ितों में 41 नाबालिग लड़कियां, 7 महिलाएं और 64 नाबालिग लड़के शामिल हैं। इस दौरान 28 पुरुष और 22 महिलाओं समेत 50 मानव तस्करों को भी गिरफ्तार किया गया।
एडीजी (कमजोर वर्ग) अमित कुमार जैन ने पुलिस मुख्यालय, सरदार पटेल भवन में प्रेस वार्ता कर यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अवधि में 24 एफआईआर दर्ज की गईं। अभियान का उद्देश्य मानव व्यापार, बाल श्रम, अनैतिक देह व्यापार, ऑर्केस्ट्रा व थियेटर समूहों में फंसे बच्चों-महिलाओं को मुक्त कराना और उनके पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाना था।
कहाँ-कहाँ से मिले पीड़ित
- ऑर्केस्ट्रा/थियेटर समूहों से: पटना (2), किशनगंज (7), पूर्णिया (3), रोहतास (3), मधुबनी (1), अररिया (3) समेत कुल 19 पीड़ित
- मानव व्यापार से: सारण (29), बेतिया (1) → कुल 30
- बाल श्रम से: पटना (23), सीतामढ़ी (21), वैशाली (4), कटिहार (3), बगहा (1), मधुबनी (3), नरकटियागंज स्टेशन (2), सासाराम स्टेशन (6) → कुल 63
इनमें बिहार के अलावा नेपाल (3), पश्चिम बंगाल (13), उत्तरप्रदेश (4), उड़ीसा (1) और झारखंड (1) के पीड़ित भी शामिल हैं।
2025 में अब तक की कार्रवाई
एडीजी ने बताया कि जनवरी 2025 से अब तक पुलिस ने मानव व्यापार से जुड़े मामलों में पूरे बिहार में छापेमारी की है।
- कुल 329 एफआईआर दर्ज
- 1016 पीड़ित मुक्त: 217 नाबालिग लड़कियां, 77 महिलाएं, 722 नाबालिग लड़के
- 250 तस्कर गिरफ्तार: 197 पुरुष और 53 महिलाएं
सभी मामलों में भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई कर अभियुक्तों को जेल भेजा गया है।
पुरस्कार और नई पहल
- सारण जिला को इस अभियान में बेहतरीन कार्य के लिए पहला स्थान
- पटना जिला को दूसरा स्थान मिला
- 2021 में स्थापित सीआईडी कमजोर वर्ग परामर्श प्रकोष्ठ ने अब तक 157 पारिवारिक विवाद से संबंधित आवेदन निपटाए, जिनमें 56 मामलों में आपसी समझौते से समाधान हुआ।
ट्रांस वुमेन हेल्पडेस्क
कमजोर वर्ग विंग ने उभयलिंगी महिलाओं (ट्रांस वुमेन) के मामलों के निपटारे और उन्हें थानों तक आसान पहुंच दिलाने के लिए एक विशेष हेल्पडेस्क की शुरुआत की है। अब 855 थानों में मौजूद महिला हेल्पलाइन को अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर ट्रांस वुमेन हेल्पडेस्क का भी काम सौंपा गया है। इनके मामलों के समाधान हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की गई है।
यह अभियान बिहार में मानव तस्करी रोकथाम और पीड़ितों के पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


