
भागलपुर, 28 जून 2026। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय आम समागम-सह-कार्यशाला का रविवार को भव्य समापन हुआ। देशभर के आम उत्पादकों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और कृषि विशेषज्ञों की मौजूदगी में संपन्न यह आयोजन आम उत्पादन, संरक्षण, अनुसंधान और उद्यमिता के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में उभरा। इस राष्ट्रीय आयोजन में देश के आठ राज्यों से आम की लगभग 1,100 से अधिक किस्मों की 2,000 से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जिसने इसे देश के सबसे बड़े आम आयोजनों में शामिल कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान किसानों और प्रतिभागियों ने तकनीकी सत्रों में आम उत्पादन से जुड़े वैज्ञानिक, व्यावसायिक और बाजार आधारित पहलुओं की गहन जानकारी प्राप्त की। विशेषज्ञों ने आधुनिक बागवानी तकनीक, उच्च गुणवत्ता वाले पौधों का चयन, रोग नियंत्रण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी साझा की। इससे किसानों को उत्पादन बढ़ाने के साथ आय में वृद्धि के व्यावहारिक उपाय समझने का अवसर मिला।
राष्ट्रीय आम समागम के समापन समारोह में बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) तथा बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आभासी माध्यम से आम उत्पादक किसानों को संबोधित किया। दोनों गणमान्य अतिथियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आम विविधता प्रदर्शनी का अवलोकन किया और आयोजन की सराहना की।
जानकारी के अनुसार राज्यपाल और कृषि मंत्री को प्रत्यक्ष रूप से बिहार कृषि विश्वविद्यालय पहुंचकर कार्यक्रम में शामिल होना था, लेकिन खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण भागलपुर हवाई अड्डे पर विमान की सुरक्षित लैंडिंग संभव नहीं हो सकी। इसके चलते विमान को वापस पटना लौटना पड़ा। हालांकि प्रतिकूल मौसम के बावजूद कार्यक्रम निर्धारित समय पर संचालित हुआ और दोनों अतिथि पटना स्थित लोक भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।
कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से भागलपुर सांसद अजय मंडल, भागलपुर विधायक रोहित पांडे, सुल्तानगंज विधायक ललित नारायण मंडल, पीरपैंती विधायक मुरारी पासवान तथा आईसीएआर, नई दिल्ली के सहायक निदेशक (उद्यानिकी) डॉ. विश्वबंधु पटेल उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र देकर स्वागत किया।
अपने संबोधन में राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने कहा कि वे इस आयोजन में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने को लेकर अत्यंत उत्साहित थे, लेकिन मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों ने उनकी योजना बदल दी। उन्होंने कहा कि आभासी माध्यम से प्रदर्शनी देखने के बाद उन्हें यह अनुभव हुआ कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने अत्यंत उत्कृष्ट स्तर पर इस आयोजन को सफल बनाया है। उन्होंने कहा कि इस स्तर का आयोजन देश में बहुत कम देखने को मिलता है।
राज्यपाल ने कहा कि आम प्रकृति का अनुपम उपहार है, जिसका सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक महत्व अत्यंत व्यापक है। उन्होंने कहा कि बिहार प्राचीन काल से आम उत्पादन के लिए प्रसिद्ध रहा है। वैशाली और नालंदा के आम्रवनों का उल्लेख अनेक ऐतिहासिक ग्रंथों में मिलता है, जो राज्य की समृद्ध कृषि विरासत को दर्शाता है।
अपने निजी अनुभव साझा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे लखनऊ के रहने वाले हैं और लंबे समय तक उन्हें लगता था कि वहां का आम सबसे श्रेष्ठ है, लेकिन बिहार आने के बाद उनका यह विचार बदल गया। उन्होंने कहा कि बिहार का आम स्वाद, सुगंध और विविधता के मामले में देश में सर्वोत्तम है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगले वर्ष आयोजन का समय मौसम को ध्यान में रखते हुए थोड़ा पहले रखा जाए ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें शामिल हो सकें। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले वर्ष वे स्वयं इस कार्यक्रम में उपस्थित होंगे।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि हर आम के पीछे किसानों की मेहनत, धैर्य और प्रकृति का आशीर्वाद छिपा होता है। उन्होंने विशेष रूप से भागलपुर के प्रसिद्ध जर्दालू आम का उल्लेख करते हुए कहा कि आज यह आम विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि इसमें बिहार कृषि विश्वविद्यालय का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय को आश्वस्त किया कि कृषि विभाग भविष्य में भी उसके नवाचार और अनुसंधान कार्यों में हर संभव सहयोग देता रहेगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा कि आम के विकास और संरक्षण के क्षेत्र में यह राष्ट्रीय आयोजन अभूतपूर्व है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में बिहार आम उत्पादन के क्षेत्र में देश का नंबर-1 राज्य बन सकता है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान, तकनीकी सहायता और किसानों के सहयोग से यह लक्ष्य अवश्य हासिल किया जा सकता है।
समारोह के दौरान सफल आम उत्पादकों को सम्मानित किया गया। प्रगतिशील उत्पादक पुरस्कार में चंदन आर्य, अशोक चौधरी और महेंद्र कुमार को सम्मान मिला। महिला उद्यमी सम्मान के तहत स्वर्ण संध्या भारती, निशा किरण, रिंकू देवी, रंजू प्रकाश और प्रेमलता को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय आम प्रदर्शनी में 2,000 से अधिक प्रदर्शनों को 57 अलग-अलग समूहों में विभाजित कर मूल्यांकन किया गया। विशेषज्ञों ने गुणवत्ता, रंग, आकार, स्वाद और आकर्षण के आधार पर विजेताओं का चयन किया। बिहार के विभिन्न जिलों के साथ पश्चिम बंगाल और झारखंड के प्रतिभागियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। भागलपुर के मनीष कुमार और रेखा चंद्रा ने कई श्रेणियों में पुरस्कार जीते, जबकि पश्चिम बंगाल के मालदा के बिमान मंडल ने लंगड़ा, हिमसागर, मल्लिका और आम्रपाली जैसी प्रमुख किस्मों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
आम आधारित मूल्य संवर्धित उत्पादों की प्रतियोगिता में भी प्रतिभागियों ने शानदार प्रदर्शन किया। सबौर की श्रेया रानी, निशा किरण तथा खनकिट्टा की मालती देवी ने कई श्रेणियों में पुरस्कार अर्जित कर विशेष पहचान बनाई।
आयोजन का सबसे रोचक और आकर्षक हिस्सा “आम खाओ प्रतियोगिता” रही, जिसने सभी का ध्यान खींचा। किसान, छात्र, छात्राओं और बाल वर्ग में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह प्रतियोगिता मनोरंजन के साथ आयोजन का यादगार आकर्षण बन गई।
कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि राष्ट्रीय आम प्रदर्शनी-सह-कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उत्कृष्ट आम किस्मों का संरक्षण, किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना तथा आम आधारित प्रसंस्करण और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। विश्वविद्यालय ने सभी प्रतिभागियों और विजेताओं को बधाई देते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। यह आयोजन बिहार को आम उत्पादन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


