
बिहार के वित्त मंत्री Bijendra Prasad Yadav ने बुधवार को भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट विधानसभा और विधान परिषद—दोनों सदनों में पेश की। रिपोर्ट में राज्य की वित्तीय व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं और विभिन्न विभागों में बड़े पैमाने पर राजस्व बकाया एवं अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट को लेकर Nitish Kumar सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है।
राजस्व वसूली न होने से हजारों करोड़ बकाया
विधानसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2023 तक राज्य में कुल ₹4844.46 करोड़ का राजस्व बकाया था। इनमें से ₹1430.32 करोड़ की राशि पाँच वर्षों से अधिक समय से लंबित है।
बिक्री कर, वाहन कर, खनन, भू-राजस्व सहित कई विभागों में हजारों करोड़ रुपये की वसूली अटकी पाई गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ विभाग पाँच साल से अधिक पुराने बकायों का पूरा ब्योरा देने में विफल रहे।
बिक्री कर में सबसे अधिक बकाया
कैग रिपोर्ट के मुताबिक:
- बिक्री/व्यापार कर में ₹2371.90 करोड़ बकाया, जिनमें ₹1289.39 करोड़ पाँच साल से अधिक समय से लंबित।
- माल एवं यात्रियों पर कर के रूप में ₹248.58 करोड़ बकाया।
- विद्युत कर एवं शुल्क में ₹20 लाख लंबित।
- वस्तु एवं सेवा कर (GST) में ₹3.25 करोड़ बकाया।
- राज्य उत्पाद में ₹54.30 करोड़ लंबित।
- खनन एवं धातुकर्म उद्योग में ₹1505.16 करोड़ बकाया।
खान एवं भूतत्व विभाग पाँच वर्षों से अधिक पुराने बकाये का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं करा सका। वसूली के लिए भू-राजस्व के तहत नीलामवाद दायर किए जाने की बात कही गई है।
बाढ़ प्रभावित घोषित नहीं जिलों को भी कृषि सब्सिडी
रिपोर्ट में कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। खरीफ 2019 में ऐसे 10 जिलों को ₹21.48 करोड़ की कृषि इनपुट सब्सिडी दी गई, जिन्हें बाढ़ प्रभावित घोषित ही नहीं किया गया था।
इसके अलावा 14 अन्य जिलों में ₹4.03 करोड़ की सब्सिडी उन क्षेत्रों के नाम पर वितरित की गई, जो आपदा प्रभावित सूची में शामिल नहीं थे।
2019 और 2020 के दौरान चिन्हित फसल क्षति क्षेत्र से 1.34 लाख हेक्टेयर अधिक क्षेत्र में ₹151.92 करोड़ की सब्सिडी वितरित की गई।
SDRF मानकों का उल्लंघन, करोड़ों का अतिरिक्त भुगतान
कैग के अनुसार SDRF मानकों का पालन नहीं करने से ₹3.74 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान हुआ।
डेटाबेस की गलत मैपिंग और नियमों के उल्लंघन के कारण 15.53 लाख मामलों में ₹56.14 करोड़ का अधिक एवं अनियमित भुगतान सामने आया।
2019–22 के दौरान फसल क्षति 33 प्रतिशत से कम होने के बावजूद 6.81 लाख मामलों में ₹159.28 करोड़ की सब्सिडी दी गई।
जमीन अधिग्रहण और निबंधन में भी गड़बड़ी
रिपोर्ट में सीतामढ़ी जिले में भूमि अधिग्रहण मुआवजा भुगतान में अनियमितता की बात कही गई है। गलत गणना के कारण 617 प्रभावित परिवारों को ₹8.84 करोड़ कम मुआवजा दिया गया।
विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार उपकर की वसूली नहीं करने से ₹1.15 करोड़ का नुकसान हुआ। संपत्ति एवं दस्तावेजों के कम मूल्यांकन के कारण ₹4.45 करोड़ निबंधन शुल्क की भी कम वसूली हुई।
सार्वजनिक उपक्रमों की आय में गिरावट
कैग ने राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रदर्शन पर भी सवाल उठाया है। वर्ष 2022-23 में इनकी आय ₹327.20 करोड़ रही, जबकि 2021-22 में ₹462.53 करोड़ थी—यानी लगभग 29% की गिरावट दर्ज की गई।
अधूरे पुल पर भुगतान
रिपोर्ट में Bihar State Bridge Construction Corporation के कार्यों पर भी सवाल उठाए गए हैं। एक अपूर्ण पुल निर्माण के बावजूद ₹5.35 करोड़ का भुगतान कर दिया गया। बताया गया कि प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया।
विपक्ष के निशाने पर सरकार
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन और लापरवाही के आरोप लगाए हैं। इससे पहले भी कैग की रिपोर्ट में कई वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुई थीं, जिस पर राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था।
ताजा रिपोर्ट ने एक बार फिर राज्य की वित्तीय स्थिति और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


