बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार की हलचल तेज, Amit Shah के दौरे से बढ़ी सियासी सरगर्मी

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के बिहार दौरे के साथ ही राज्य की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिलहाल बिहार सरकार में 26 मंत्री हैं, जबकि संवैधानिक प्रावधान के तहत 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में 10 मंत्री पद खाली हैं।

सूत्रों के मुताबिक जेडीयू कोटे से 6 और बीजेपी कोटे से 3-4 नए मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा Lok Janshakti Party (Ram Vilas) को भी एक मंत्री पद मिलने की संभावना जताई जा रही है। पिछले तीन महीनों से कैबिनेट विस्तार का इंतजार हो रहा है और अब चर्चा है कि होली के बाद कभी भी विस्तार हो सकता है।


जल्द हो सकता है विस्तार

वर्तमान में Nitish Kumar के नेतृत्व वाली सरकार में जेडीयू से मुख्यमंत्री सहित 9 मंत्री हैं, जबकि Bharatiya Janata Party से 13 मंत्री शामिल हैं।

इसके अलावा लोजपा (रामविलास) से 2, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा से एक-एक मंत्री हैं। हालांकि बीजेपी कोटे से पहले 14 मंत्री थे, लेकिन Nitin Nabin के पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद इस्तीफा देने से संख्या घट गई।


तीन महीने बाद भी नहीं हुआ विस्तार

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जीत के बाद 20 नवंबर 2025 को नई सरकार का गठन हुआ था। तीन महीने से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद कैबिनेट विस्तार नहीं हो सका है।

कई मंत्रियों के पास एक से अधिक विभाग हैं। पहले खरमास के बाद विस्तार की चर्चा थी, लेकिन बजट सत्र के कारण मामला टल गया। अब 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव प्रस्तावित है, ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार भी इसी के आसपास होने की संभावना जताई जा रही है।


कई मंत्रियों पर अतिरिक्त बोझ

वर्तमान में कई मंत्रियों के पास एक से अधिक महत्वपूर्ण विभाग हैं।

  • Bijendra Prasad Yadav के पास ऊर्जा, योजना एवं विकास, वित्त और वाणिज्य कर विभाग हैं।
  • Vijay Kumar Chaudhary के पास जल संसाधन, भवन निर्माण, संसदीय कार्य और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग हैं।
  • Dilip Kumar Jaiswal उद्योग और पथ निर्माण विभाग संभाल रहे हैं।
  • उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Sinha के पास राजस्व एवं भूमि सुधार, नगर विकास तथा खान एवं भूतत्व विभाग हैं।

ऐसे में एनडीए के लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए मंत्रिपरिषद का विस्तार आवश्यक माना जा रहा है।


सहयोगी दलों की नजर

एनडीए के सहयोगी दल भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। एलजेपीआर के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी ने अमित शाह के दौरे को महत्वपूर्ण बताया है, हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार पर खुलकर कुछ नहीं कहा।

हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मंत्री संतोष सुमन का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है, लेकिन अमित शाह के बिहार दौरे के दौरान इस पर चर्चा संभव है।


सीएम-शाह मुलाकात पर टिकी नजर

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब विस्तार को ज्यादा दिनों तक टाला नहीं जा सकता। संभावना है कि पटना में अमित शाह और नीतीश कुमार की मुलाकात के दौरान मंत्रिमंडल विस्तार और राज्यसभा उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा हो।

16 मार्च को राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव होना है। चार सीटें एनडीए को आसानी से मिल सकती हैं, लेकिन पांचवीं सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे में सियासी समीकरण भी अहम हो गए हैं।


मंत्री बनने की दौड़ में कई नाम

पिछले साल मंत्रिमंडल गठन के समय कई वरिष्ठ नेताओं को जगह नहीं मिल पाई थी। इनमें जयंत कुमार, शीला मंडल, रत्नेश सदा, महेश्वर हजारी, नीतीश मिश्रा और रेणु देवी जैसे नाम शामिल हैं।

जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा को भी मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। मार्च में जेडीयू संगठन चुनाव भी प्रस्तावित है।


सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश

मौजूदा मंत्रिमंडल में सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की गई है। अभी ओबीसी वर्ग से 8, सवर्ण से 7 और दलित वर्ग से 5 मंत्री हैं, जबकि एक मुस्लिम मंत्री शामिल हैं।

नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद कायस्थ समुदाय से कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। ऐसे में संभावित विस्तार में सामाजिक और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखा जा सकता है।


मार्च में ‘बड़ा खेल’ संभव?

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि राज्यसभा चुनाव से पहले बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मंत्रिमंडल विस्तार और राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन को लेकर अंदरखाने मंथन तेज है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पटना में अमित शाह और नीतीश कुमार की मुलाकात के बाद क्या राजनीतिक फैसला सामने आता है।

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