झरना कुंड में मुंडन करने से नहीं होगी अकाल मृत्यु! हर मौसम में गर्म रहता है यहां का पानी

वैसे तो सालों भर बांका के अमरपुर थाना अंतर्गत झरना कुंड में स्नान के लिए लोगों की भीड़ जुटती है लेकिन मकर संक्रांति के दिन वहां हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं का जुटान होता है. जहां मंदार पर्वत की तरह ही लोग आस्था की डुबकी लगाने पहुंचते हैं. झरना कुंड को लेकर अनोखी मान्यता है. लोगों का मानना है कि यहां डुबकी लगाने से न केवल कष्टों से छुटकारा मिलता है, बल्कि बच्चों का मुंडन कराने से उनकी अकाल मृत्यु भी नहीं होती है.

मकर संक्रांति पर झरना में डुबकी: मंगलवार को बेलहर विधायक मनोज यादव ने झरना पहाड़ मकर संक्रांति पर मेले का शुभारंभ किया. मेले में शामिल होने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचे हैं. इस दौरान झरना कुंड में स्नान करने के लिए लोग पहुंचे थे. वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराया. ठंड के बावजूद भी लोगों में डुबकी लगाने की होड़ लगी रही.

‘मुंडन कराने से नहीं होती अकाल मृत्यु’: झरना कुंड को लेकर लोगों के बीच अनोखी मान्यता है. लोगों का मानना है कि इस कुंड के पानी से जिन बच्चों का मुंडन कराया जाता है, उस बच्चे की कभी भी अकाल मृत्यु नहीं होती है. उनके मुताबिक इस कुंड का पानी हर मौसम में गर्म रहता है. वहीं, कुंड के पास ही वन देवी और देवताओं का मंदिर भी है. जहां लोग पूजा-अर्चना जरूर करते हैं.

“मान्यता है कि इस कुंड के पानी से मुंडन कराने से बच्चों की अकाल मृत्यु नहीं होती है. इसलिए मकर संक्रांति के दिन लोग दूर-दूर से आते हैं. यहां आने वाले सभी लोग इस कुंड में स्नान करते हैं और वन देवी-देवता की पूजा करते हैं.”- श्रद्धालु

सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल: इस जगह की एक और खासियत है, वो ये कि यहां हिंदू धर्म के साथ मुस्लिम धर्म के लोग भी आते हैं. मंदिर की दूसरी तरफ त्रिकोण पहाड़ की चोटी है. जहां मकदूम शाह औलिया का मजार है. मुस्लिम समाज के साथ ही हिंदू धर्मावलंबी भी चादर चढ़ाने वहां पहुंचते हैं

क्या है पौराणिक कथा?: झरना कुंड और वन देवी-देवता मंदिर को लेकर कई पौराणिक कथा प्रचलित है. स्थानीय लोग बताते हैं कि झरना पहाड़ के पास ही कलजुगवा स्थल है. ऐसी लोक धारणा है कि वहां कलयुगवा असुर का वास था. वह महाकाल भैरव के भय से यहां छुपा हुआ था. इसलिए आज भी यहां आने वाले लोग दो-चार पत्थर जरूप उठाकर उस ओर फेंकते हैं. लोगों का मानना है कि ऐसा करने से कलयुगवा असुर का दोबारा से आतंक नहीं मचेगा.
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