बिहार की गद्दी पर किसका होगा तिलक? दिल्ली से संजय झा का बड़ा बयान— “नीतीश का सुझाव और NDA का मथंन तय करेगा अगला मुख्यमंत्री”

HIGHLIGHTS: ‘नीतीश युग’ के बाद कौन संभालेगा कमान? पटना से दिल्ली तक कयासों का दौर

  • सस्पेंस बरकरार: जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने साफ किया— अभी तय नहीं है कि अगला मुख्यमंत्री कौन या किस दल का होगा।
  • NDA का ‘महा-मंथन’: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ के समापन के बाद एनडीए के सभी घटक दल बैठकर नए नाम पर मुहर लगाएंगे।
  • नीतीश का ‘विटो’: नए सीएम के चयन में नीतीश कुमार के सुझाव को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाएगी।
  • दिल्ली की दहलीज: राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद नीतीश कुमार ने जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए फिर से नामांकन दाखिल किया।
  • दोहरा रोल: नीतीश कुमार राज्यसभा में बिहार की आवाज बनेंगे, लेकिन संसद सत्र के अलावा बाकी समय बिहार में रहकर मार्गदर्शन देते रहेंगे।

नई दिल्ली/पटना | 20 मार्च, 2026

​बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों से एक ही नाम ‘ध्रुव तारा’ की तरह चमक रहा था—नीतीश कुमार। लेकिन अब जब वे राज्यसभा की ओर कूच कर चुके हैं, तो राज्य की सबसे बड़ी कुर्सी को लेकर सस्पेंस अपनी चरम सीमा पर है। गुरुवार को दिल्ली स्थित जदयू के राष्ट्रीय कार्यालय में संजय झा ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की, जो किसी एक नाम को ‘फाइनल’ मान रहे थे।

“अभी कुछ तय नहीं, एनडीए लेगा सामूहिक फैसला”

​संजय झा ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि बिहार के अगले मुखिया का चयन किसी एक पार्टी का निजी फैसला नहीं होगा:

  1. प्रक्रिया: नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ खत्म होने के बाद गठबंधन की औपचारिक बैठक होगी।
  2. नीतीश का मार्गदर्शन: संजय झा ने जोर देकर कहा कि नीतीश कुमार केवल कुर्सी छोड़ रहे हैं, राजनीति और बिहार नहीं। राज्यसभा में रहने के बावजूद वे बिहार के विकास और एनडीए के फैसलों में सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे।
  3. नामांकन: संजय झा ने खुद नीतीश कुमार का नामांकन पत्र पार्टी के चुनाव अधिकारी अनिल हेगड़े को सौंपा, जो इस बात का संकेत है कि संगठन की कमान अभी भी ‘साहब’ के हाथ में ही रहेगी।

VOB का नजरिया: ‘किंगमेकर’ की भूमिका में नीतीश, पर ताज किसके सिर?

​बिहार की सियासत में यह एक ऐतिहासिक मोड़ है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि संजय झा का यह बयान एक सधा हुआ कूटनीतिक कदम है। भले ही एनडीए के भीतर सम्राट चौधरी (भाजपा) या किसी अन्य नाम की चर्चा जोरों पर हो, लेकिन जदयू यह संदेश देना चाहती है कि बिहार की सत्ता का रिमोट कंट्रोल आज भी नीतीश कुमार के पास ही रहेगा।

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