​बंगाल में सियासी उबाल: शुभेंदु के पीए की हत्या पर टीएमसी ने तोड़ी चुप्पी, कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग कर सबको चौंकाया

कोलकाता/मध्यमग्राम। पश्चिम बंगाल के राजनैतिक पटल पर चुनावी नतीजों के बाद उपजी हिंसा और प्रतिशोध की आग थमने का नाम नहीं ले रही है। मध्यमग्राम में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव (PA) चंद्रनाथ रथ की सनसनीखेज हत्या के मामले में अब अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आधिकारिक बयान सामने आया है। इस घटना को लेकर भाजपा द्वारा लगाए जा रहे सीधे आरोपों के बीच टीएमसी ने न केवल इस हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की है, बल्कि इसे एक बड़े राजनैतिक षड्यंत्र का हिस्सा बताते हुए मामले की जांच ‘कोर्ट की निगरानी में सीबीआई’ (Court-monitored CBI) से कराने की मांग कर डाली है। टीएमसी के इस रुख ने बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है, क्योंकि आमतौर पर सत्ता पक्ष या प्रमुख विपक्षी दल केंद्रीय एजेंसियों की जांच से बचते रहे हैं। टीएमसी ने अपने बयान में न केवल चंद्रनाथ रथ की मौत पर दुख जताया है, बल्कि पिछले तीन दिनों में अपने भी तीन कार्यकर्ताओं की हत्या का मुद्दा उठाकर भाजपा को कठघरे में खड़ा किया है। इस बयान के बाद बंगाल में ‘ब्लेम गेम’ (आरोप-प्रत्यारोप) का दौर अब कानूनी और संवैधानिक लड़ाई की ओर बढ़ता दिख रहा है।

टीएमसी का कड़ा रुख: हत्या को बताया अमानवीय और निंदनीय

​तृणमूल कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से जारी बयान में स्पष्ट किया है कि वे मध्यमग्राम में हुई चंद्रनाथ रथ की निर्मम हत्या की कड़ी भर्त्सना करते हैं। पार्टी ने इसे लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय करार दिया है। टीएमसी के अनुसार, हिंसा का किसी भी सभ्य समाज और विशेषकर लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी की हत्या के बाद जिस तरह से भाजपा ने टीएमसी पर हमले शुरू किए थे, उस पर पलटवार करते हुए तृणमूल नेतृत्व ने इसे एक निष्पक्ष जांच का विषय बताया है।

​पार्टी का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की जान जाना दुखद है, चाहे वह किसी भी राजनैतिक विचारधारा से जुड़ा हो। टीएमसी ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या की जड़ें कहीं और हो सकती हैं और इसकी सच्चाई सामने आना जरूरी है। भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों को ‘राजनैतिक रूप से प्रेरित’ बताते हुए टीएमसी ने दावा किया है कि इस मामले की तह तक जाने के लिए उच्च स्तरीय जांच अनिवार्य है।

भाजपा पर पलटवार: तीन टीएमसी कार्यकर्ताओं की हत्या का मुद्दा गर्म

​टीएमसी ने अपने बयान में केवल बचाव का रास्ता नहीं चुना, बल्कि भाजपा पर हमलावर होते हुए सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। पार्टी ने दावा किया है कि पिछले तीन दिनों में बंगाल के विभिन्न हिस्सों में चुनाव बाद हुई हिंसा (Post-Poll Violence) में उनके तीन सक्रिय कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई है। टीएमसी का सीधा आरोप है कि इन हत्याओं के पीछे ‘भाजपा समर्थित बदमाशों’ का हाथ है। पार्टी ने सवाल उठाया है कि जब राज्य में ‘आदर्श आचार संहिता’ (Model Code of Conduct) अभी भी प्रभावी है, तब इस तरह की हिंसक वारदातें कैसे हो रही हैं?

​तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा अपनी हार से उपजी हताशा को छिपाने के लिए हिंसा का सहारा ले रही है और टीएमसी कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। बयान में कहा गया है कि भाजपा समर्थित तत्व जानबूझकर अशांति फैला रहे हैं ताकि राज्य की छवि को धूमिल किया जा सके। टीएमसी ने उन तीनों कार्यकर्ताओं के परिवारों के प्रति भी संवेदना व्यक्त की है जिनकी जान पिछले 72 घंटों के भीतर गई है। पार्टी का तर्क है कि हिंसा एकतरफा नहीं है और भाजपा अपने ऊपर लगे दागों को धोने के लिए चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले को ढाल बना रही है।

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सीबीआई जांच की मांग: कोर्ट की निगरानी में सच आने की चुनौती

​इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला पहलू टीएमसी द्वारा ‘सीबीआई जांच’ की मांग करना है। टीएमसी ने मांग की है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या और उनके कार्यकर्ताओं की हत्या, दोनों ही मामलों की जांच कोर्ट की निगरानी में सीबीआई द्वारा की जानी चाहिए। पार्टी का मानना है कि केवल स्वतंत्र जांच एजेंसियां ही उन दोषियों की पहचान कर सकती हैं जो पर्दे के पीछे से इस खूनी खेल को संचालित कर रहे हैं।

​कोर्ट की निगरानी (Court-monitored) वाली शर्त जोड़कर टीएमसी ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि जांच निष्पक्ष रहे और इसे राजनैतिक औजार के रूप में इस्तेमाल न किया जा सके। टीएमसी ने अपने बयान में कहा— “हम इस मामले में कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग करते हैं ताकि दोषियों की पहचान कर उन्हें बिना किसी देरी के न्याय के कटघरे में लाया जा सके।” सीबीआई जांच की यह मांग भाजपा के उन आरोपों का जवाब मानी जा रही है जिसमें कहा गया था कि राज्य पुलिस टीएमसी के दबाव में काम कर रही है। अब टीएमसी ने गेंद वापस भाजपा के पाले में डाल दी है।

आदर्श आचार संहिता और प्रशासनिक विफलता पर सवाल

​तृणमूल कांग्रेस ने अपने आधिकारिक संदेश में चुनाव आयोग और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने याद दिलाया कि वर्तमान में राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू है, जिसका अर्थ है कि कानून व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी चुनाव आयोग और उसके अधीन काम कर रहे प्रशासनिक ढांचे की है। ऐसे में तीन दिनों के भीतर चार बड़ी राजनैतिक हत्याएं होना (1 भाजपा से जुड़े और 3 टीएमसी से जुड़े) सुरक्षा तंत्र की विफलता को दर्शाता है।

​टीएमसी का कहना है कि वे लगातार शांति की अपील कर रहे हैं, लेकिन भाजपा समर्थित बदमाश लगातार उकसावे की कार्रवाई कर रहे हैं। पार्टी ने मांग की है कि प्रशासन को पूरी तरह से निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए और किसी भी राजनैतिक दबाव में आए बिना अपराधियों को गिरफ्तार करना चाहिए। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राजनैतिक हत्याओं के दोषियों को जवाबदेह ठहराना समय की मांग है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं: टीएमसी का संदेश

​अपने बयान के अंतिम हिस्से में तृणमूल कांग्रेस ने लोकतांत्रिक मूल्यों की दुहाई दी है। पार्टी ने लिखा है कि लोकतंत्र में हिंसा और राजनैतिक हत्याओं के लिए कोई जगह नहीं है। दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाना चाहिए और उन्हें कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलनी चाहिए। टीएमसी का यह संतुलित बयान उस समय आया है जब राज्य में नई सरकार के गठन की तैयारियां चल रही हैं और राजनैतिक तापमान चरम पर है।

​टीएमसी के इस आधिकारिक हस्तक्षेप के बाद अब राजनैतिक पंडितों की नजरें भाजपा की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। क्या भाजपा टीएमसी की इस सीबीआई जांच वाली मांग का समर्थन करेगी? या फिर बंगाल में राजनैतिक हिंसा की यह आग जांच की मांगों के बीच और धधकती रहेगी? फिलहाल, मध्यमग्राम से लेकर कोलकाता तक पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। चंद्रनाथ रथ की हत्या ने जिस विवाद को जन्म दिया था, टीएमसी के इस बयान ने उसमें ‘पीड़ित’ और ‘आरोपी’ के बीच की लकीर को और धुंधला कर दिया है। अब सच केवल एक गहन और निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

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