
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंत्रिमंडल के सदस्यों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया है। लंबे इंतजार के बाद जारी की गई विभागीय सूची में मुख्यमंत्री ने गृह विभाग सहित कई महत्वपूर्ण मंत्रालय अपने पास रखे हैं, जबकि वरिष्ठ नेता स्वपन दासगुप्ता को राज्य का वित्त मंत्रालय सौंपा गया है। विभागों के इस वितरण को नई सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के आवंटन के बाद अब राज्य में विभिन्न मंत्रालयों का कामकाज औपचारिक रूप से शुरू होने जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विभागों के चयन से सरकार की आगामी नीतियों और प्रशासनिक दिशा का संकेत मिलता है। खासकर गृह, वित्त, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे विभागों को लेकर राजनीतिक हलकों में विशेष चर्चा हो रही है।
मुख्यमंत्री ने अपने पास रखे कई अहम मंत्रालय
जारी सूची के अनुसार मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गृह विभाग अपने पास रखा है। इसके अलावा पर्वतीय मामले, भूमि एवं भूमि सुधार, शरणार्थी राहत एवं पुनर्वास, विद्युत, सूचना एवं संस्कृति, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार जैसे महत्वपूर्ण विभाग भी मुख्यमंत्री के पास ही रहेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि गृह विभाग को अपने पास रखना मुख्यमंत्री के लिए प्रशासनिक नियंत्रण और कानून-व्यवस्था पर सीधी निगरानी बनाए रखने का संकेत माना जाता है। इसके अलावा भूमि सुधार और प्रशासनिक सुधार जैसे विभाग भी राज्य की शासन व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी स्वपन दासगुप्ता को
नई सरकार में सबसे चर्चित नियुक्तियों में से एक वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद स्वपन दासगुप्ता को वित्त मंत्रालय सौंपा जाना माना जा रहा है। राज्य की आर्थिक नीतियों, बजट प्रबंधन और विकास योजनाओं के वित्तीय संचालन की जिम्मेदारी अब उनके हाथों में होगी।
पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था, निवेश और राजकोषीय प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय वित्त विभाग के माध्यम से लिए जाते हैं। ऐसे में स्वपन दासगुप्ता की भूमिका आने वाले वर्षों में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उत्तर बंगाल और ग्रामीण विकास पर विशेष फोकस
सरकार ने क्षेत्रीय विकास को ध्यान में रखते हुए उत्तर बंगाल विकास विभाग की जिम्मेदारी निशीथ प्रमाणिक को सौंपी है। उनके पास जल संसाधन जांच एवं विकास विभाग भी रहेगा। उत्तर बंगाल लंबे समय से राज्य की राजनीति और विकास योजनाओं का अहम केंद्र रहा है।
वहीं दिलीप घोष को पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा कृषि विपणन विभाग सौंपा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों, पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने और कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन की जिम्मेदारी अब उनके नेतृत्व में होगी।
खाद्य और आपूर्ति विभाग अशोक किर्तनिया को
राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की जिम्मेदारी अशोक किर्तनिया को दी गई है। उनके पास सहकारिता विभाग भी रहेगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली, राशन व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा योजनाओं के संचालन में इस विभाग की अहम भूमिका होती है।
सरकार का मानना है कि खाद्यान्न वितरण और सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने के लिए इस विभाग को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
अग्निमित्रा पॉल को मिला शहरी विकास मंत्रालय
शहरी क्षेत्रों के विकास और नगर निकायों के प्रशासन की जिम्मेदारी अग्निमित्रा पॉल को सौंपी गई है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच यह विभाग सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
शहरों में आधारभूत संरचना, जल निकासी, सड़क निर्माण, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और नगर निकायों की कार्यप्रणाली में सुधार जैसे कार्य इसी मंत्रालय के तहत आते हैं।
शिक्षा क्षेत्र की जिम्मेदारी कई मंत्रियों को
स्कूल शिक्षा विभाग दीपक बर्मन को सौंपा गया है। उनके पास आवास, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा वस्त्र विभाग भी रहेगा। दूसरी ओर उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा की जिम्मेदारी जगन्नाथ चट्टोपाध्याय को दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार और कौशल विकास कार्यक्रमों को नई सरकार प्राथमिकता दे सकती है। राज्य में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और तकनीकी प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में नए कदम उठाए जा सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग डॉ. शरद्वत मुखर्जी के जिम्मे
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय डॉ. शरद्वत मुखर्जी को सौंपा गया है। राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पतालों, चिकित्सा सुविधाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं की जिम्मेदारी अब उनके पास होगी।
कोविड महामारी के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर लोगों की अपेक्षाएं बढ़ी हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
उद्योग और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
उद्योग, वाणिज्य एवं उद्यम विभाग तपस रॉय को सौंपा गया है। उनके पास सार्वजनिक उपक्रम, औद्योगिक पुनर्निर्माण तथा गैर-पारंपरिक एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत विभाग भी रहेंगे।
राज्य सरकार की कोशिश निवेश आकर्षित करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और औद्योगिक विकास को गति देने की हो सकती है। उद्योग विभाग इस दिशा में प्रमुख भूमिका निभाएगा।
कृषि और सिंचाई पर भी सरकार का जोर
कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी दूध कुमार मंडल को दी गई है, जबकि सिंचाई एवं जलमार्ग विभाग अरूप कुमार दास को सौंपा गया है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले पश्चिम बंगाल में किसानों और कृषि विकास से जुड़े मुद्दे हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं।
सरकार की योजना कृषि उत्पादन बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने और किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्रित हो सकती है।
महिला, युवा और खेल विभागों को भी मिली प्राथमिकता
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में मालती रावा रॉय को महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, स्वयं सहायता समूह और कार्यक्रम निगरानी विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
वहीं डॉ. इंद्रनील खान को युवा सेवाएं एवं खेल तथा उपभोक्ता मामले विभाग सौंपा गया है। खेल और युवा विकास के क्षेत्र में नई योजनाएं शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
राज्यमंत्रियों को भी मिली अहम जिम्मेदारियां
सरकार ने विभिन्न विभागों में राज्यमंत्रियों की भी नियुक्ति की है ताकि प्रशासनिक कार्यों का बेहतर संचालन किया जा सके। परिवहन, वित्त, कृषि विपणन, लोक निर्माण, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आवास और कानून जैसे विभागों में राज्यमंत्रियों को जिम्मेदारियां दी गई हैं।
इन नियुक्तियों का उद्देश्य विभागीय कार्यों में तेजी लाना और जनता से जुड़े मामलों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
नई सरकार से बढ़ीं उम्मीदें
विभागों के बंटवारे के साथ ही पश्चिम बंगाल की नई सरकार पूरी तरह सक्रिय हो गई है। अब सभी मंत्रियों की नजर अपने-अपने विभागों की प्राथमिकताओं को तय करने और विकास योजनाओं को गति देने पर होगी।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि गृह और वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभागों के आवंटन से सरकार की प्रशासनिक रणनीति स्पष्ट दिखाई देती है। वहीं शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग जैसे क्षेत्रों में नई पहल की उम्मीद भी बढ़ गई है।
आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई सरकार अपने मंत्रालयों के माध्यम से जनता से किए गए वादों को किस प्रकार जमीन पर उतारती है और राज्य के विकास को नई दिशा देने में कितनी सफल होती है।


