
पटना। बिहार में भूमि अभिलेखों और राजस्व से जुड़े लाखों लंबित मामलों के समाधान को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 11 जून से 17 जून तक पूरे राज्य में विशेष राजस्व महाअभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पिछले वर्ष प्राप्त हुए लाखों लंबित आवेदनों की स्कैनिंग, डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना और उन्हें संबंधित ऑनलाइन पोर्टलों पर अपलोड करना है, ताकि उनके निष्पादन की प्रक्रिया तेज की जा सके।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने बताया कि भूमि अभिलेखों में सुधार, नामांतरण, उत्तराधिकार, बंटवारा और अन्य राजस्व मामलों से जुड़े करीब 46 लाख आवेदनों के निपटारे के लिए सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है। इसी उद्देश्य से पूरे राज्य के अंचल कार्यालयों में विशेष अभियान चलाया जाएगा, जहां रविवार को भी कार्य जारी रहेगा।
लाखों रैयतों को मिलेगा फायदा
राजस्व विभाग का मानना है कि इस अभियान से राज्य के लाखों रैयतों को सीधा लाभ मिलेगा। लंबे समय से कई लोग अपनी जमीन से जुड़े मामलों के समाधान का इंतजार कर रहे हैं। कई मामलों में डिजिटल जमाबंदी में त्रुटियां हैं, जबकि कुछ मामलों में नामांतरण और उत्तराधिकार संबंधी आवेदन लंबित पड़े हुए हैं।
भूमि से जुड़े मामलों के समय पर निष्पादन नहीं होने के कारण लोगों को सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण, भूमि खरीद-बिक्री और अन्य प्रशासनिक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सरकार इस अभियान को राजस्व प्रशासन में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।
पिछले वर्ष शुरू हुआ था पहला चरण
राज्य सरकार ने वर्ष 2025 में भी राजस्व महाअभियान चलाया था। यह अभियान 16 अगस्त 2025 से 20 सितंबर 2025 तक पूरे बिहार में आयोजित किया गया था। उस दौरान सभी हलकों और अंचलों में विशेष शिविर लगाकर आम लोगों से आवेदन प्राप्त किए गए थे।
इन शिविरों में डिजिटल जमाबंदी में त्रुटि सुधार, छूटी हुई जमाबंदी को ऑनलाइन दर्ज करने, उत्तराधिकार आधारित नामांतरण, बंटवारा आधारित नामांतरण और अन्य भूमि संबंधी मामलों के आवेदन लिए गए थे। अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी समस्याएं दर्ज कराईं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार उस समय कुल 46 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे। इन्हें तीन चरणों में निपटाने की योजना बनाई गई थी।
तय समय सीमा के बावजूद अधूरा रहा काम
राजस्व विभाग ने इन आवेदनों के निष्पादन के लिए चरणबद्ध योजना बनाई थी। पहले चरण में आवेदन प्राप्त किए गए, दूसरे चरण में उनकी स्कैनिंग और डिजिटल अपलोडिंग की प्रक्रिया निर्धारित की गई, जबकि तीसरे चरण में उनके समाधान का लक्ष्य रखा गया था।
विभाग ने सभी जिलों को समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए थे और 31 मार्च 2026 तक सभी आवेदनों के निष्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन विभिन्न कारणों से कई जिलों में काम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका।
इसी कारण अब सरकार ने विशेष अभियान चलाकर प्रक्रिया को तेज करने का फैसला किया है।
आंकड़ों ने बढ़ाई विभाग की चिंता
विभागीय समीक्षा में सामने आया कि अब तक केवल 81.91 प्रतिशत आवेदनों की ही स्कैनिंग पूरी हो सकी है। वहीं पोर्टल पर अपलोडिंग की स्थिति और भी चिंताजनक है।
आंकड़ों के अनुसार अब तक केवल 26.43 प्रतिशत आवेदन ही संबंधित पोर्टलों पर अपलोड किए जा सके हैं। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में आवेदन अभी भी डिजिटल प्रक्रिया से बाहर हैं।
राजस्व मंत्री ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि लाखों लोगों के आवेदन लंबित रहना स्वीकार्य नहीं है और इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।
सात दिनों तक चलेगा विशेष अभियान
11 जून से शुरू होने वाला यह अभियान 17 जून तक लगातार चलेगा। इस दौरान सभी अंचल कार्यालयों को विशेष लक्ष्य दिए गए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे निर्धारित समय के भीतर सभी लंबित आवेदनों की स्कैनिंग और अपलोडिंग सुनिश्चित करें।
विशेष बात यह है कि अभियान के दौरान रविवार को भी काम जारी रहेगा ताकि लक्ष्य को समय पर पूरा किया जा सके। विभाग ने इसे मिशन मोड में संचालित करने का निर्णय लिया है।
अधिकारियों की तय की गई जवाबदेही
राजस्व विभाग ने इस अभियान को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही भी तय कर दी है। अंचल अधिकारी और राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि उनके क्षेत्र में लंबित आवेदनों की स्कैनिंग और अपलोडिंग का कार्य समय पर पूरा होना चाहिए।
विभाग ने कहा है कि अभियान के दौरान प्राप्त लक्ष्य को पूरा करना संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी। कार्यों की नियमित निगरानी राज्य स्तर से की जाएगी और प्रगति की समीक्षा भी लगातार होगी।
यदि किसी क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति नहीं होती है तो संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब भी किया जा सकता है।
विशेष सर्वेक्षण अमीनों की भी ली जाएगी मदद
अभियान को सफल बनाने के लिए विभाग अतिरिक्त मानव संसाधन का भी उपयोग करेगा। इसके तहत राज्य के अधिकांश जिलों में कार्यरत विशेष सर्वेक्षण अमीनों की सेवाएं ली जाएंगी।
इन अमीनों को आवेदन स्कैनिंग, डिजिटल अपलोडिंग और निष्पादन से जुड़े कार्यों में लगाया जाएगा ताकि प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। इससे अंचल कार्यालयों पर कार्यभार भी कम होगा और अभियान को गति मिलेगी।
पांच जिलों को मिली अलग जिम्मेदारी
हालांकि सभी जिलों में विशेष सर्वेक्षण अमीनों की सेवाएं नहीं ली जाएंगी। विभाग ने शिवहर, शेखपुरा, लखीसराय, जहानाबाद और अरवल जिलों को इस व्यवस्था से अलग रखा है।
इन जिलों में भूमि सर्वेक्षण का कार्य प्राथमिकता पर चल रहा है और सरकार ने 15 अगस्त 2026 तक सर्वे कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसलिए वहां के अमीनों को मौजूदा सर्वे कार्य में ही लगाया जाएगा।
डिजिटल भूमि रिकॉर्ड बनाने पर जोर
बिहार सरकार पिछले कुछ वर्षों से भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण पर विशेष जोर दे रही है। इसका उद्देश्य राजस्व प्रशासन को पारदर्शी, तेज और तकनीक आधारित बनाना है।
डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से लोगों को भूमि संबंधी दस्तावेज प्राप्त करने में आसानी होगी। साथ ही विवादों के समाधान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भी तेजी आएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी लंबित आवेदन समय पर ऑनलाइन दर्ज और निष्पादित हो जाते हैं तो इससे राज्य की भूमि व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।
राजस्व सुधार की दिशा में अहम कदम
राजस्व महाअभियान को राज्य सरकार भूमि प्रबंधन और राजस्व सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देख रही है। लाखों लंबित आवेदनों का डिजिटलीकरण और निष्पादन न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगा, बल्कि आम लोगों को भी राहत देगा।
फिलहाल सभी जिलों को अभियान की तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। अब नजर इस बात पर है कि 11 से 17 जून के बीच चलने वाला यह विशेष अभियान कितनी तेजी से लंबित मामलों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर उनके समाधान का रास्ता तैयार करता है।


