​बंगाल में ‘परिवर्तन’ की प्रचंड सुनामी: रुझानों में भाजपा को भारी बहुमत, ममता बनर्जी के 15 वर्षीय अभेद्य किले में बड़ी सेंध

कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनैतिक फिजाओं में आज एक ऐसे ‘परिवर्तन’ की आहट सुनाई दे रही है, जिसने न केवल नबान्न की कुर्सी को हिला दिया है, बल्कि देश की राजनीति में एक नए युग के उदय का संकेत दिया है। सोमवार, 04 मई 2026 की सुबह जैसे ही मतगणना केंद्रों पर ईवीएम की पेटी खुली, बंगाल के जनादेश ने विशेषज्ञों और एग्जिट पोल के तमाम दावों को पीछे छोड़ते हुए एक तरफा रुख अख्तियार कर लिया। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा जारी आधिकारिक रुझानों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की सत्ता के महासंग्राम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ती दिख रही है। अब तक जारी 292 सीटों के रुझानों में भाजपा ने 192 सीटों पर बढ़त बनाकर बहुमत के 148 के आंकड़े को काफी पीछे छोड़ दिया है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस (TMC) का ‘खेला’ इस बार खुद उसी पर भारी पड़ता नजर आ रहा है; पार्टी अब तक 100 सीटों का आंकड़ा भी छूने के लिए संघर्ष कर रही है। कांग्रेस की स्थिति राज्य में लगभग नगण्य हो गई है, जहाँ केवल एक उम्मीदवार अपनी बढ़त बनाए हुए है। यह परिणाम बंगाल की नई राजनैतिक दिशा तय करने के लिए मील का पत्थर साबित होने वाला है।

रुझानों का गणित: भाजपा की बढ़त और टीएमसी का ढलान

​निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़ों ने राजनैतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। बंगाल की सत्ता का समीकरण इस समय भाजपा के पक्ष में पूरी तरह झुकता हुआ दिखाई दे रहा है।

पार्टी

कुल सीटें

बहुमत का आंकड़ा

वर्तमान रुझान (बढ़त)

भारतीय जनता पार्टी (BJP)

294

148

192

तृणमूल कांग्रेस (TMC)

294

148

99 (लगभग)

कांग्रेस/अन्य

294

148

01

भाजपा की यह बढ़त केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी ने टीएमसी के गढ़ माने जाने वाले शहरी और तटीय क्षेत्रों में भी जबरदस्त सेंधमारी की है। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, शिक्षक भर्ती घोटाला और लंबे समय से चले आ रहे एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) के कारकों ने ममता बनर्जी के गढ़ को ढहाने में मुख्य भूमिका निभाई है। 15 साल के लंबे शासन के बाद जनता का यह रुख एक बड़े राजनैतिक असंतोष की ओर इशारा कर रहा है।

हाई-प्रोफाइल सीटों पर महामुकाबला: भवानीपुर में ममता बनाम शुभेंदु

​इस चुनाव में सबकी नजरें उन सीटों पर टिकी हैं जहाँ बंगाल के राजनैतिक सूरमाओं की साख दांव पर लगी है। खासतौर से भवानीपुर विधानसभा सीट इस समय सबसे बड़ा चर्चा का विषय बनी हुई है। यहाँ राज्य की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी खुद मैदान में हैं, लेकिन उनकी राह आसान नहीं दिख रही है। उनका मुकाबला उसी शुभेंदु अधिकारी से है, जिन्होंने 2021 के चुनाव में नंदीग्राम में उन्हें शिकस्त दी थी। इस बार भवानीपुर की जंग न केवल सत्ता के लिए है, बल्कि यह ममता बनर्जी के व्यक्तिगत राजनैतिक वर्चस्व की लड़ाई भी बन गई है।

​इसके अलावा नंदीग्राम, टॉलीगंज, सिंगूर, खड़गपुर सदर और सिलीगुड़ी जैसी सीटों पर भी मुकाबला बेहद कड़ा है। सिंगूर, जिसने कभी ममता बनर्जी को सत्ता की सीढ़ी चढ़ाई थी, आज वहां के रुझान टीएमसी के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं। बैरकपुर और रासबिहारी में भी भाजपा उम्मीदवारों ने शुरुआती दौर से ही अपनी पकड़ मजबूत कर रखी है। इन सीटों के परिणाम यह तय करेंगे कि क्या ममता बनर्जी का करिश्मा अब भी बंगाल की मिट्टी में बरकरार है या जनता ने नए नेतृत्व को स्वीकार कर लिया है।

92.47 प्रतिशत मतदान: बदलाव की सबसे बड़ी गवाही

​2026 के इस चुनाव में जो सबसे चौंकाने वाली बात रही, वह था रिकॉर्ड तोड़ मतदान प्रतिशत। दो चरणों में हुए मतदान के दौरान बंगाल की जनता ने लोकतंत्र के उत्सव में अपनी अभूतपूर्व भागीदारी दर्ज कराई। कुल मतदान 92.47 प्रतिशत रहा, जो स्वतंत्रता के बाद से अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है।

  • पहला चरण: 93.13 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
  • दूसरा चरण: 91.66 प्रतिशत मतदान हुआ।

​राजनैतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी मतदान का प्रतिशत इतना अधिक होता है, तो वह आमतौर पर सत्ता के खिलाफ एक बड़े गुस्से या ‘परिवर्तन’ की लहर का परिचायक होता है। इससे पहले 2011 में जब 34 साल के वामपंथ शासन का अंत हुआ था, तब 84 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार उस रिकॉर्ड का भी ध्वस्त होना यह दर्शाता है कि बंगाल की जनता ने इस चुनाव को अपने भविष्य का सबसे बड़ा फैसला माना है।

भाजपा में मुख्यमंत्री पद की रेस: कौन बनेगा बंगाल का नया चेहरा?

​जैसे-जैसे भाजपा की जीत सुनिश्चित होती दिख रही है, वैसे-वैसे नबान्न की कुर्सी पर बैठने वाले संभावित चेहरों को लेकर कयास तेज हो गए हैं। यद्यपि भाजपा ने अधिकारिक तौर पर किसी नाम का ऐलान नहीं किया है, लेकिन दिल्ली से लेकर कोलकाता तक कुछ नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं:

  1. शुभेंदु अधिकारी: विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने ममता बनर्जी को सदन से लेकर सड़क तक कड़ी चुनौती दी है।
  2. दिलीप घोष: पार्टी के संगठन को मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है।
  3. सुकांत मजूमदार: प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में सफलता पाई है।
  4. शमिक भट्टाचार्य: अपनी प्रखर वक्ता शैली और बौद्धिक छवि के कारण वे भी एक मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

​भाजपा आलाकमान के लिए सबसे बड़ी चुनौती बंगाल की सांस्कृतिक अस्मिता और प्रशासनिक अनुभव के बीच तालमेल बिठाने वाला नेतृत्व चुनना होगा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।

भगवानगोला में टीएमसी की एकतरफा जीत: एक छोटी राहत

​रुझानों के बीच कुछ सीटों के परिणाम आने भी शुरू हो गए हैं। मुर्शिदाबाद की भगवानगोला विधानसभा सीट से टीएमसी के लिए अच्छी खबर आई है। यहाँ टीएमसी उम्मीदवार रेयात हुसैन सरकार ने एकतरफा जीत दर्ज की है।

  • विजयी उम्मीदवार: रेयात हुसैन सरकार (TMC) – 1,05,997 वोट।
  • दूसरे स्थान पर: महामुदल हसन (माकपा) – 49,590 वोट।
  • हार का अंतर: 56,407 मतों के भारी अंतर से टीएमसी ने यह सीट जीती है।
  • तीसरे स्थान पर: कांग्रेस की अंजू बेगम (29,440 वोट) रहीं, जिन्हें करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। हालांकि, यह जीत टीएमसी के लिए उस समुद्र में एक बूंद के समान है जहाँ भाजपा की लहर हर तरफ दिखाई दे रही है।

ममता बनर्जी का लिटमस टेस्ट और 2029 की राह

​यह चुनाव मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राजनैतिक जीवन का सबसे बड़ा लिटमस टेस्ट साबित हो रहा है। 15 साल तक बंगाल की निर्विवाद नेता रहने के बाद, इस बार वे भ्रष्टाचार और शासन से उपजी नाराजगी के घेरे में हैं। अगर वे चौथी बार सत्ता में वापसी करने में विफल रहती हैं, तो यह न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए झटका होगा, बल्कि 2029 के आम चुनाव में विपक्ष के गठबंधन ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A.) की मजबूती पर भी सवाल खड़े करेगा। ममता बनर्जी खुद को राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ सबसे ताकतवर चेहरा मानती रही हैं, लेकिन बंगाल की हार उनकी इस साख को कमजोर कर सकती है।

​भाजपा के लिए यह जीत केवल एक राज्य की जीत नहीं होगी, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के बाद पूर्वी भारत के सबसे बड़े राज्य में अपनी विचारधारा को स्थापित करने की दिशा में सबसे बड़ी कामयाबी होगी। शाम तक जब सभी सीटों के परिणाम आधिकारिक रूप से घोषित होंगे, तब बंगाल की राजनीति का नया भूगोल स्पष्ट हो जाएगा। फिलहाल, भाजपा कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है और टीएमसी खेमे में खामोशी छाई हुई है।

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