
पटना। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों ने बिहार की राजनैतिक फिजाओं में भी जबरदस्त गर्मी पैदा कर दी है। सोमवार, 04 मई 2026 की सुबह जैसे ही बंगाल की मतगणना के आंकड़े टीवी स्क्रीन्स और चुनाव आयोग की वेबसाइट पर चमकने लगे, बिहार भाजपा के खेमे में जीत का ऐसा सैलाब उमड़ा जिसकी गूँज पटना की सड़कों पर साफ सुनी जा रही है। बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की निर्णायक बढ़त को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी खुशी का इजहार सोशल मीडिया के जरिए किया है। उन्होंने एक ओर जहाँ बंगाल की जनता को राष्ट्रनिष्ठ बताया, वहीं दूसरी ओर भाजपा की विचारधारा के पुरोधा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बहाने बंगाल पर अपने वैचारिक अधिकार का दावा भी ठोका। नबान्न की ओर बढ़ते भाजपा के कदमों ने पटना स्थित प्रदेश कार्यालय में दिवाली जैसा माहौल बना दिया है। यहाँ कार्यकर्ता न केवल नाच-गा रहे हैं, बल्कि बंगाल की संस्कृति और स्वाद को भी अपने जश्न का हिस्सा बना रहे हैं।
सम्राट चौधरी का ‘एक्स’ पोस्ट: विचारधारा और जीत का संगम
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मतगणना के बीच ही अपने आधिकारिक ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से एक पोस्ट साझा कर बंगाल की जीत का शंखनाद कर दिया। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “जहाँ पैदा हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी, वो बंगाल हमारा है।” सम्राट चौधरी का यह वाक्य केवल एक चुनावी नारा नहीं है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी और जनसंघ की उन जड़ों की याद दिलाता है जो बंगाल की मिट्टी से जुड़ी हुई हैं। भाजपा हमेशा से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को अपना आदर्श मानती आई है और बंगाल में उनकी जन्मस्थली होने के नाते इस राज्य को अपनी वैचारिक जननी मानती है।
मुख्यमंत्री ने आगे लिखा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को ऐतिहासिक जनादेश देने के लिए बंगाल की जागरूक और राष्ट्रनिष्ठ जनता का हृदय से कोटि-कोटि अभिनंदन है। उन्होंने अपने पोस्ट का अंत ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष के साथ किया। सम्राट चौधरी की इस पोस्ट को भाजपा के शुरुआती आत्मविश्वास के तौर पर देखा जा रहा है, जो यह संकेत दे रहा है कि पार्टी अब परिणामों के अंतिम घोषणा का इंतजार नहीं कर रही, बल्कि रुझानों में मिली 190 से अधिक सीटों की बढ़त को जीत की मुहर मान चुकी है। उनके इस पोस्ट के बाद बिहार के अन्य मंत्रियों और विधायकों ने भी इसे री-पोस्ट करते हुए बंगाल में ‘कमल’ खिलने का स्वागत किया है।
पटना भाजपा कार्यालय में ‘बंगाल का स्वाद’ और अबीर की होली
मुख्यमंत्री के इस बयान के साथ ही पटना स्थित भाजपा के प्रदेश कार्यालय में उत्सव का औपचारिक श्रीगणेश हो गया। यहाँ कार्यकर्ताओं ने जीत की खुशी को साझा करने के लिए एक बेहद अनोखा तरीका चुना। आमतौर पर मिठाइयां बांटी जाती हैं, लेकिन इस बार कार्यकर्ताओं ने बंगाल की मशहूर ‘झालमुड़ी’ बनाकर एक-दूसरे और आने-जाने वाले लोगों के बीच बांटी। यह बंगाल की संस्कृति से जुड़ने और वहां की जीत को बिहार के स्वाद में घोलने की एक प्रतीकात्मक कोशिश थी।
कार्यालय परिसर में सुबह से ही कार्यकर्ताओं का जुटना शुरू हो गया था। जीत की खबर पक्की होते देख महिला कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को केसरिया गुलाल लगाकर जीत की बधाई दी। पूरे कार्यालय परिसर में ढोल-नगाड़ों की आवाज गूँज रही है और ‘जय श्री राम’ तथा ‘वंदे मातरम’ के नारों से आसमान गुंजायमान है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल एक राज्य की जीत नहीं है, बल्कि उस विचारधारा की जीत है जिसने बंगाल की अस्मिता को बचाने का संकल्प लिया था। कार्यालय में बड़ी स्क्रीन लगाई गई है जहाँ कार्यकर्ता पल-पल बदलते रुझानों को देखकर उत्साहित हो रहे हैं। जैसे-जैसे बढ़त का आंकड़ा 192 और उससे पार जा रहा है, वैसे-वैसे जश्न की तीव्रता भी बढ़ती जा रही है।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संदर्भ और भाजपा का भावनात्मक जुड़ाव
सम्राट चौधरी द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जिक्र करना बेहद रणनीतिक और भावनात्मक कदम है। भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. मुखर्जी ने ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे’ का नारा दिया था। भाजपा के लिए बंगाल में जीतना उनकी उस अधूरी इच्छा को पूरा करने जैसा है जो वे अखंड भारत और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए देखते थे। बिहार भाजपा के नेताओं का मानना है कि ममता बनर्जी के शासनकाल में बंगाल की जो पहचान धूमिल हुई थी, वह अब भाजपा के शासन में डॉ. मुखर्जी के विजन के अनुरूप फिर से वापस आएगी।
राजनैतिक विश्लेषकों का कहना है कि सम्राट चौधरी ने अपने पोस्ट के जरिए यह संदेश दिया है कि भाजपा के लिए बंगाल महज एक राजनैतिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह उनकी वैचारिक प्रेरणा का स्रोत है। बिहार और बंगाल का नाता भौगोलिक रूप से भी काफी गहरा है, ऐसे में बिहार के मुख्यमंत्री का यह बयान दोनों राज्यों के बीच एक नए राजनैतिक पुल का काम करेगा। पटना में जिस तरह से झालमुड़ी का वितरण हो रहा है, वह यह दर्शाता है कि भाजपा अब खुद को बंगाल की मिट्टी और वहां के आम आदमी से जोड़ चुकी है।

बिहार की राजनीति पर बंगाल के परिणामों का असर
बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि बंगाल में मिली यह प्रचंड बढ़त बिहार के आगामी राजनैतिक घटनाक्रमों को भी प्रभावित करेगी। सम्राट चौधरी की अगुवाई में बिहार एनडीए अब और अधिक आत्मविश्वास के साथ काम करेगा। पार्टी के नेताओं का कहना है कि बंगाल की जनता ने यह साबित कर दिया है कि तुष्टीकरण और भ्रष्टाचार की राजनीति को अब देश के किसी भी कोने में जगह नहीं मिलेगी।
महिला कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिस तरह से बंगाल में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाजपा के पक्ष में मतदान किया है, उसका असर बिहार में भी दिखेगा। वे मानती हैं कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार में भी विकास की जो बयार चल रही है, उसे बंगाल के इन परिणामों से और ताकत मिलेगी। भाजपा कार्यालय में जश्न की तैयारी केवल शाम तक के लिए नहीं है, बल्कि पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह उत्सव आने वाले कई दिनों तक चलेगा। लड्डू बनाने के लिए कारीगरों को बुला लिया गया है और बड़े विजय जुलूस की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
रुझानों में भाजपा की आंधी और विपक्ष में सन्नाटा
बंगाल के रुझानों में भाजपा को मिल रही 192 सीटों की बढ़त ने बिहार के विपक्षी दलों के खेमे में सन्नाटा पसरा दिया है। जहाँ भाजपा कार्यालय में जश्न है, वहीं विपक्षी दलों के कार्यालयों के बाहर वैसी हलचल नहीं देखी जा रही है। सम्राट चौधरी का पोस्ट उस समय आया जब रुझान पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में स्थिर हो चुके थे। बिहार के मुख्यमंत्री का यह ‘अर्ली सेलिब्रेशन’ विरोधियों को यह बताने की कोशिश है कि एनडीए का किला अब अभेद्य है।
पार्टी के युवाओं का कहना है कि वे अब उस क्षण का इंतजार कर रहे हैं जब आधिकारिक तौर पर भाजपा का मुख्यमंत्री बंगाल में शपथ लेगा। उनका कहना है कि सम्राट चौधरी के विजन और नेतृत्व में बिहार की भाजपा इकाई ने बंगाल चुनाव में भी काफी मेहनत की थी और आज वह मेहनत रंग ला रही है। पटना के सड़कों पर गाड़ियों के काफिले भाजपा के झंडे लेकर घूम रहे हैं और लाउडस्पीकर पर सम्राट चौधरी के बयान और देशभक्ति के गीत बज रहे हैं। कुल मिलाकर, बंगाल के परिणामों ने बिहार में भाजपा को एक नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की है।


