
तालाबों की गंदगी से बन रही जैविक खाद, बढ़ा उत्पादन
पटना।तालाबों में फैलने वाली जलकुंभी, जिसे कभी सिर्फ बेकार और नुकसानदायक पौधा माना जाता था, अब किसानों के लिए कमाई और जैविक खेती का नया साधन बन गई है। सहरसा जिले के मुरादपुर पंचायत में किसान जलकुंभी से वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार कर मखाना की खेती में इस्तेमाल कर रहे हैं।
यह पहल पंचायत की वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट के जरिए हो रही है, जहां जलकुंभी को खाद में बदलने का काम पिछले एक साल से चल रहा है।
दो महीने में 500 किलो खाद
- बीते दो महीनों में तैयार हुई: 500 किलो खाद
- रोजाना उत्पादन: 20 किलो
- करीब 15 परिवार, खासकर महिलाएं, इस काम से जुड़ी हैं
- मखाना की खेती में सीधे उपयोग
कैसे बनती है जलकुंभी से खाद?
- तालाब से जलकुंभी निकाली जाती है
- छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है
- गोबर के साथ मिलाया जाता है
- 45 दिनों तक छांव में सड़ाया जाता है
- उसमें केंचुए छोड़े जाते हैं
- तैयार होती है उच्च गुणवत्ता वाली वर्मी कम्पोस्ट
रासायनिक खाद से छुटकारा
पंचायत के मुखिया राहुल झा बताते हैं कि मखाना उत्पादन में इस खाद से
- लागत कम हुई
- मिट्टी की उर्वरता बढ़ी
- उपज में भी सुधार आया
अब किसानों को महंगी रासायनिक खाद खरीदने की जरूरत नहीं पड़ रही।
पोषक तत्वों से भरपूर
इस जैविक खाद में पाए जाते हैं—
- नाइट्रोजन
- फास्फोरस
- पोटैशियम
- मैग्नीशियम
- आयरन
- मैंगनीज
- जिंक
ये तत्व मिट्टी को ताकत देते हैं और फसल को बेहतर बनाते हैं।
आगे बाजार में भी बिकेगी खाद
फिलहाल यह खाद पंचायत के किसानों को मुफ्त दी जा रही है, लेकिन आने वाले समय में इसे व्यावसायिक स्तर पर तैयार कर बाजार में बेचने की भी योजना है।


