
भागलपुर। बिहार के ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों में शामिल विक्रमशिला सेतु को लेकर हाल के दिनों में सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कई तरह की चर्चाएं सामने आईं। विशेष रूप से सेतु के एक्सपेंशन जॉइंट के बीच बढ़ते गैप को लेकर खबरें प्रसारित होने के बाद आम लोगों में चिंता का माहौल बन गया था। हालांकि अब जिला प्रशासन और पथ निर्माण विभाग ने इस मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि विक्रमशिला सेतु की वर्तमान स्थिति स्थिर है और छोटे वाहनों का परिचालन पहले की तरह सुचारू रूप से जारी रहेगा।
पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों ने तकनीकी जांच और ताजा निरीक्षण के आधार पर बताया है कि पुल में किसी नई प्रकार की संरचनात्मक समस्या नहीं पाई गई है। विभाग द्वारा की गई मापी और तकनीकी परीक्षण में पहले दर्ज की गई स्थिति ही बरकरार मिली है। इसलिए छोटे वाहनों के आवागमन को लेकर लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
मई में क्षतिग्रस्त हुआ था सेतु का एक हिस्सा
विभागीय जानकारी के अनुसार 3 मई 2026 की मध्यरात्रि में विक्रमशिला सेतु के P2-P3 स्पैन के लगभग 34 मीटर लंबे सस्पेंडेड हिस्से में क्षति दर्ज की गई थी। इस घटना के बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और स्थिति का आकलन करने के लिए विशेषज्ञ एजेंसियों की मदद ली गई।
यह घटना सामने आने के बाद सेतु की सुरक्षा और संरचनात्मक स्थिरता को लेकर गंभीरता से समीक्षा की गई। विभाग ने किसी भी संभावित खतरे से बचने के लिए तत्काल अस्थायी और तकनीकी समाधान लागू करने का निर्णय लिया।
BRO ने संभाली मरम्मत की जिम्मेदारी
क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और यातायात व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) की विशेषज्ञ टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई। विभागीय निर्देशों के अनुरूप BRO ने मौके पर पहुंचकर तकनीकी मूल्यांकन किया और वैकल्पिक संरचना तैयार करने का कार्य शुरू किया।
विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर क्षतिग्रस्त हिस्से पर बेली ब्रिज निर्माण का निर्णय लिया गया। बेली ब्रिज को ऐसी परिस्थितियों में एक प्रभावी अस्थायी समाधान माना जाता है, जहां तत्काल यातायात बहाल करना आवश्यक हो।
चार स्थानों पर बनाए गए बेली ब्रिज
मरम्मत कार्य के तहत कुल चार बेली ब्रिज तैयार किए गए। इन्हें V5-P1, P1-P2, P2-P3 और P3-P4 स्पैन पर स्थापित किया गया।
इन संरचनाओं का उद्देश्य सेतु पर भार संतुलन बनाए रखना और आवागमन को सुरक्षित तरीके से जारी रखना था। निर्माण कार्य विशेषज्ञों की निगरानी में पूरा किया गया ताकि किसी प्रकार की तकनीकी त्रुटि की संभावना न रहे।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार बेली ब्रिज निर्माण के बाद यातायात की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।
IIT पटना की तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर हुई कार्रवाई
सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से की प्रारंभिक तकनीकी जांच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) पटना द्वारा की गई थी। विशेषज्ञों ने स्थल का निरीक्षण कर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट विभाग को सौंपी थी।
रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्षों के आधार पर ही BRO को आवश्यक निर्माण और मरम्मत कार्य करने के लिए अनुरोध किया गया। विभाग का कहना है कि सभी निर्णय तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह और वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर लिए गए हैं।
एक्सपेंशन जॉइंट के गैप को लेकर सामने आई थीं खबरें
10 जून को विभिन्न प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह खबरें सामने आईं कि विक्रमशिला सेतु के एक्सपेंशन जॉइंट के बीच का गैप बढ़ रहा है। इन खबरों के बाद लोगों के बीच चिंता बढ़ गई और पुल की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठने लगे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने तुरंत ताजा निरीक्षण कराने का निर्णय लिया। अधिकारियों ने तकनीकी टीमों को मौके पर भेजा और पुल के ऊपर तथा नीचे दोनों हिस्सों का विस्तृत परीक्षण कराया।
ड्रोन कैमरों से की गई विशेष जांच
विभाग ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए ड्रोन कैमरों की मदद से पुल की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई। इसके माध्यम से सेतु के विभिन्न हिस्सों की स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया गया।
साथ ही मौके पर मौजूद अभियंताओं ने एक्सपेंशन जॉइंट के बीच मौजूद गैप की प्रत्यक्ष मापी भी की। तकनीकी टीमों ने पहले दर्ज आंकड़ों और वर्तमान स्थिति की तुलना की।
जांच में क्या सामने आया?
ताजा निरीक्षण और मापी के दौरान पाया गया कि भागलपुर की ओर एक्सपेंशन जॉइंट का औसत गैप 90 से 100 मिलीमीटर के बीच है। वहीं नवगछिया की ओर यह गैप लगभग 40 से 50 मिलीमीटर के बीच दर्ज किया गया।
अधिकारियों के अनुसार यह वही स्थिति है जो बेली ब्रिज निर्माण के दौरान दर्ज की गई थी। वर्तमान माप में किसी प्रकार की असामान्य वृद्धि नहीं पाई गई।
विभाग ने स्पष्ट किया कि मीडिया में प्रकाशित कुछ खबरों के विपरीत तकनीकी जांच में गैप बढ़ने की पुष्टि नहीं हुई है।
छोटे वाहनों के लिए सुरक्षित है सेतु
पथ निर्माण विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों में हल्के और छोटे वाहनों का परिचालन पूरी तरह सुरक्षित है। तकनीकी रिपोर्ट और निरीक्षण के आधार पर छोटे वाहनों के आवागमन को जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि यातायात व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और किसी भी नई स्थिति में आवश्यक कदम तुरंत उठाए जाएंगे।
उत्तर और पूर्वी बिहार के लिए जीवनरेखा है विक्रमशिला सेतु
विक्रमशिला सेतु भागलपुर और नवगछिया के बीच गंगा नदी पर बना एक महत्वपूर्ण पुल है। यह उत्तर बिहार और पूर्वी बिहार को जोड़ने वाली प्रमुख कड़ी माना जाता है।
प्रतिदिन हजारों लोग इस पुल के माध्यम से आवागमन करते हैं। व्यापार, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए भी यह पुल अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यही कारण है कि इसकी स्थिति को लेकर लोगों की संवेदनशीलता स्वाभाविक है और किसी भी तकनीकी सूचना पर व्यापक चर्चा शुरू हो जाती है।
प्रशासन ने लोगों से की अपील
जिला प्रशासन और पथ निर्माण विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अपुष्ट और भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें। किसी भी प्रकार की तकनीकी जानकारी या यातायात व्यवस्था से जुड़ी सूचना केवल आधिकारिक स्रोतों से ही प्राप्त करें।
विभाग ने भरोसा दिलाया है कि विक्रमशिला सेतु की स्थिति पर विशेषज्ञों की लगातार नजर बनी हुई है और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
फिलहाल उपलब्ध तकनीकी रिपोर्ट, ड्रोन सर्वेक्षण और अभियंताओं की जांच के आधार पर यह स्पष्ट किया गया है कि पुल की स्थिति स्थिर है तथा छोटे वाहनों का परिचालन पहले की तरह निर्बाध और सुचारू रूप से जारी रहेगा।


