भागलपुर, 12 अगस्त — जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रदेश सचिव विजय यादव लगातार दौरा कर रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से बाढ़ पीड़ितों को किसी भी प्रकार की कठिनाई न होने देने का अनुरोध किया और जहां बिजली की आपूर्ति बाधित थी वहां तुरंत व्यवस्था बहाल कराने का सफल प्रयास किया।
दौरे में क्या-क्या किया गया
विजय यादव ने नाथनगर समेत प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर वहां की स्थिति का जायजा लिया। स्थानीय लोगों द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचनाओं के अनुसार जिन स्थानों पर बिजली का कनेक्शन नहीं था या आपूर्ति बाधित थी, विजय यादव ने प्रशासन से तत्काल संपर्क कर बिजली बहाल करवाई। इसके अलावा उन्होंने प्रशासन से पेरिस्थितिक राहत व्यवस्थाओं — खाने, पीने के पानी और मेडिकल सहायता — की निरन्तर उपलब्धता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
ग्रामीणों की नाराज़गी — विधायक की अनुपस्थिति पर सवाल
नाथनगर क्षेत्र में विजय यादव ने विधायक की अनुपस्थिति पर भी तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि विधायक अस्वस्थ हैं, तो उनके स्थान पर किसी प्रतिनिधि को भेजा जाना चाहिए था, ताकि बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं का समय पर निवारण हो सके। वहीँ स्थानीय ग्रामीणों ने भी विधायक की गैरमौजूदगी पर नाराज़गी जताई और कहा कि आपदा के समय जनप्रतिनिधियों का मैदान पर होना अनिवार्य है — न कि केवल बयानबाजी।
प्रशासन के प्रति मांगें और निर्देश
विजय यादव ने जिला प्रशासन से—
- प्रभावित परिजनों तक तत्काल बिजली, पानी और प्राथमिक दवा सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने,
- राहत शिविरों में भोजन, दवा और गैर-खाद्य वस्तुओं की नियमित आपूर्ति बनाए रखने, तथा
- प्रभावित इलाकों में सुरक्षा एवं चारपाई/आश्रय की व्यवस्था को और सुदृढ़ करने—का आग्रह किया।
स्थानीय लोगों ने भी कहा कि प्रशासन जल्द से जल्द अतिरिक्त नाव, बैरिकेडिंग और प्रभावित मार्गों पर चेतावनी संकेत लगाए ताकि अनावश्यक जोखिम कम हो सके।
स्थानीय वातावरण व प्रतिक्रियाएँ
दौरे के दौरान कई प्रभावित नागरिकों ने विजय यादव को धन्यवाद दिया कि उन्होंने बिजली व अन्य बेसिक सुविधाओं के लिये तत्काल पहल की। वहीं कुछ लोगों ने चिंता जताई कि यदि जनप्रतिनिधि मौके पर नहीं आएँगे तो राहत कार्य संघर्षपूर्ण और धीमा रहेगा।
आगे क्या अपेक्षित है
विजय यादव के दौरे से प्रभावित इलाकों में अल्पकालिक राहत की स्थिति सुधरी दिखी है, पर स्थानीयों और कार्यकर्ताओं ने स्थायी और व्यवस्थित राहत तथा पुनर्वास की दिशा में त्वरित प्रशासनिक कदम उठाने की अपेक्षा जताई है — खासकर उन इलाकों में जहाँ संपर्क टूट चुका है और नाव ही एकमात्र साधन बचा है।


