
समाचार के मुख्य बिंदु: भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का संगम
- बड़ी कामयाबी: भागलपुर सांसद श्री अजय कुमार मंडल के सुझाव पर केंद्र सरकार का सकारात्मक रुख; कक्षा 6 से 10 तक के पाठ्यक्रम में गीता के समावेशन पर हुई उच्च स्तरीय समीक्षा।
- एनसीईआरटी की रिपोर्ट: केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री के पत्र के अनुसार, एनसीईआरटी (NCERT) ने गीता के 18 अध्यायों और 700 श्लोकों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने के विषय पर की गहन समीक्षा।
- वर्तमान स्थिति: समीक्षा में पाया गया कि ‘दीपकम्’, ‘शाश्वती’ और ‘भास्वति’ जैसी पाठ्यपुस्तकों में पहले से ही गीता के प्रेरणादायी अंश शामिल हैं।
- नैतिक मूल्य: कक्षा 8, 11 और 12 की पुस्तकों के माध्यम से विद्यार्थियों में कर्तव्यबोध और जीवन-दर्शन विकसित करने पर जोर।
- सांसद का आभार: अजय कुमार मंडल ने केंद्र सरकार की इस पहल का स्वागत करते हुए इसे नई पीढ़ी के सर्वांगीण विकास के लिए अनिवार्य बताया।
- VOB इनसाइट: भागलपुर जैसे सांस्कृतिक केंद्र के प्रतिनिधि द्वारा उठाई गई यह मांग राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा नीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है।
भागलपुर / नई दिल्ली | 25 मार्च, 2026
बिहार की सिल्क सिटी भागलपुर के सांसद श्री अजय कुमार मंडल की एक दूरगामी पहल रंग लाती दिख रही है। स्कूली शिक्षा को भारतीय संस्कारों और नैतिक मूल्यों से जोड़ने की दिशा में उन्होंने कक्षा 6 से 10 तक के पाठ्यक्रम में श्रीमद्भगवद्गीता के सभी 700 श्लोकों को अनिवार्य रूप से शामिल करने का जो सुझाव दिया था, उस पर केंद्र सरकार ने बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इस दिशा में की गई प्रगति से सांसद को औपचारिक रूप से अवगत करा दिया है।
केंद्रीय मंत्री का जवाब: एनसीईआरटी (NCERT) ने शुरू की प्रक्रिया
सांसद अजय कुमार मंडल को भेजे गए पत्र में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री ने सूचित किया है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने उनके प्रस्ताव की गंभीरता से समीक्षा की है। 20 मार्च 2026 को भेजे गए इस आधिकारिक पत्र में मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि गीता के श्लोक विद्यार्थियों के मानसिक और चारित्रिक निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुख्य अंश इस प्रकार हैं:
- भाषा पाठ्यपुस्तकों में स्थान: गीता के कई महत्वपूर्ण श्लोक वर्तमान में विभिन्न कक्षाओं की भाषा संबंधी पुस्तकों में पढ़ाए जा रहे हैं।
- विशिष्ट पुस्तकें: कक्षा 8 की पुस्तक ‘दीपकम्’ के साथ-साथ कक्षा 11 और 12 की ‘शाश्वती’ एवं ‘भास्वति’ में गीता के शिक्षाप्रद अंशों को विशेष स्थान दिया गया है।
- भविष्य की योजना: सरकार नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को और अधिक व्यापक रूप से स्कूली पाठ्यक्रम में एकीकृत करने पर विचार कर रही है।
सांसद अजय मंडल का संकल्प: “गीता केवल ग्रंथ नहीं, जीवन जीने की कला है”
अपने सुझाव पर केंद्र सरकार की इस सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद सांसद अजय कुमार मंडल ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आने वाली पीढ़ी केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहे, बल्कि उनमें वह ‘कर्तव्यबोध’ जागृत हो जिसकी शिक्षा भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में दी थी।
उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:
- सांस्कृतिक जड़ें: गीता हमारे जीवन मूल्यों का आधार है। इसे शिक्षा प्रणाली में स्थान मिलना हमारी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- विद्यार्थियों का विकास: गीता के दर्शन से छात्रों में निर्णय लेने की क्षमता, धैर्य और एकाग्रता बढ़ती है, जो आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में नितांत आवश्यक है।
- अगला कदम: उन्होंने आशा व्यक्त की है कि आने वाले समय में एनसीईआरटी कक्षा 6 से 10 के बीच गीता के सभी 18 अध्यायों के सार को और भी प्रभावी तरीके से पाठ्यक्रम में जगह देगी।
VOB का नजरिया: शिक्षा व्यवस्था में सांस्कृतिक सुधार की आहट
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि भागलपुर सांसद की यह मांग बिहार और देश के शैक्षणिक परिदृश्य को बदलने वाली साबित हो सकती है।
- शिक्षा बनाम संस्कार: आधुनिक शिक्षा प्रणाली में बढ़ते मानसिक तनाव को देखते हुए गीता जैसे दर्शन का समावेश छात्रों के लिए ‘स्ट्रेस बस्टर’ (तनाव दूर करने वाला) साबित हो सकता है।
- भागलपुर का गौरव: सांसद अजय मंडल द्वारा राष्ट्रीय स्तर के इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाना यह दर्शाता है कि भागलपुर का नेतृत्व अब नीतिगत बदलावों में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
- चुनौतियां: 700 श्लोकों को अनिवार्य रूप से पढ़ाना एक बड़ा कार्य है। इसके लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण और पाठ्यपुस्तकों के सुव्यवस्थित संपादन की भी आवश्यकता होगी।
भारतीय ज्ञान परंपरा का उदय
सांसद अजय मंडल और केंद्र सरकार के बीच हुआ यह संवाद केवल एक आधिकारिक पत्र-व्यवहार नहीं है, बल्कि यह भविष्य की ‘संस्कारवान शिक्षा’ की नींव है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस दिशा में होने वाले हर नए बदलाव और नई शिक्षा नीति के तहत आने वाले बदलावों की जानकारी आप तक निरंतर पहुँचाता रहेगा।


