
- भारत का सबसे ऊंचा स्टोन स्तूप, बिना सीमेंट के 38,500 पत्थरों से निर्मित
- वैशाली में पौराणिक मिट्टी स्तूप के निकट 550 करोड़ की लागत से हुआ निर्माण
- भगवान बुद्ध की अस्थि कलश स्थापित होगा, पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण
पटना, 30 जून।बिहार के वैशाली में बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। जल्द ही इसका भव्य उद्घाटन प्रस्तावित है। भगवान बुद्ध की अस्थि कलश को समर्पित यह परियोजना ₹550.48 करोड़ की लागत से 72.94 एकड़ में निर्मित की गई है। यह स्थल वैशाली के ऐतिहासिक पुष्करणी तालाब और पौराणिक मड स्तूप के समीप स्थित है।
निर्माण की विशेषताएं
- स्मृति स्तूप कुल 38,500 गुलाबी पत्थरों से निर्मित है, जो राजस्थान के बंसी पहाड़पुर से मंगवाए गए हैं।
- निर्माण में ईंट, सीमेंट या कंक्रीट का प्रयोग नहीं किया गया है।
- यह देश का पहला और सबसे ऊंचा पूर्णतः पत्थरों से निर्मित स्तूप है।
- स्तूप की ऊंचाई: 33.10 मीटर
- आंतरिक व्यास: 37.80 मीटर, बाहरी व्यास: 49.80 मीटर
- निर्माण के लिए IIT दिल्ली की रॉक मैकेनिक्स टीम की तकनीकी सलाह ली गई।
स्थायित्व और संरचना
- स्तूप की संरचना भूकंपरोधी तकनीक से युक्त है।
- 12 टन तक के पत्थरों को क्रेन से स्थापित किया गया।
- नींव को इतना मजबूत बनाया गया है कि यह हजारों वर्षों तक सुरक्षित रह सके।
- 32 रोशनदान से प्रकाश और हवा का प्राकृतिक प्रवाह सुनिश्चित किया गया है।
परिसर में ये सुविधाएं भी
- संग्रहालय ब्लॉक, ध्यान केंद्र, पुस्तकालय, एम्फीथियेटर, आगंतुक केंद्र, गेस्ट हाउस
- 500 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र
- सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और वॉटर ट्रीटमेंट सिस्टम
- वाहनों के लिए पार्किंग, टिकट काउंटर, कैफेटेरिया
- 271689 वर्गमीटर हरियाली, विशेष रूप से आम के पेड़ लगाए गए।
सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
- संग्रहालय में भगवान बुद्ध से जुड़ी कलाकृतियों और घटनाओं को दर्शाया गया है।
- परिसर के भीतर मौजूद मड स्तूप से नए स्मृति स्तूप को जोड़ने की योजना भी अंतिम चरण में है।
- स्तूप परिसर बौद्ध धर्मावलंबियों और पर्यटकों दोनों के लिए ध्यान, अध्ययन और दर्शन का महत्वपूर्ण केंद्र बन जाएगा।
आकर्षण का नया केंद्र बनेगा वैशाली
यह पहली बार है जब आधुनिक भारत में इतने बड़े पैमाने पर सिर्फ पत्थरों से स्तूप का निर्माण हुआ है। इसकी उच्च वास्तुकला, इतिहासिकता और आध्यात्मिकता वैशाली को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर एक नई ऊंचाई प्रदान करेगी।


