खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- बड़ा हमला: श्रीलंका के गाले (Galle) तट से 75 किमी दूर अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से उड़ाया।
- बड़ी तबाही: ईरानी नौसेना का गर्व ‘IRIS Dena’ समंदर में डूबा; 87 सैनिकों की मौत की पुष्टि, 148 लापता।
- भारत कनेक्शन: विशाखापट्टनम में ‘मिलान 2026’ अभ्यास में हिस्सा लेकर लौट रहा था युद्धपोत।
- सबूत: अमेरिका ने जारी किया हमले का लाइव ब्लैक एंड व्हाइट वीडियो; रक्षा मंत्री बोले— “यह शांत मौत (Quiet Death) है।”
कोलंबो/वॉशिंगटन | 04 मार्च, 2026: अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध अब भारतीय उपमहाद्वीप के मुहाने तक पहुँच गया है। हिंद महासागर में बुधवार की सुबह एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरी दुनिया को ‘तीसरे विश्व युद्ध’ की आहट दे दी है। भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित ‘मिलान 2026’ नौसैनिक अभ्यास से वापस लौट रहे ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के करीब टॉरपीडो मारकर गहरे समंदर में डुबा दिया। इस भीषण हमले में अब तक 87 ईरानी नौसैनिकों के मारे जाने की खबर है, जबकि 148 अब भी लापता हैं।
श्रीलंका के तट पर ‘टॉरपीडो’ का तांडव
श्रीलंकाई नौसेना के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 6 से 7 बजे के बीच उन्हें संकट का संदेश (Distress Message) मिला।
- लोकेशन: जहाज दक्षिणी श्रीलंका के गाले शहर से करीब 40 समुद्री मील (75 किमी) दूर था।
- रेस्क्यू ऑपरेशन: श्रीलंकाई नेवी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए समुद्र में गिरे 32 घायल नौसैनिकों को बचा लिया है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
- लापता: जहाज पर लगभग 180 से 260 के बीच नौसैनिक सवार थे। 148 सैनिकों का अब तक सुराग नहीं मिला है, जिनके बचने की उम्मीद न के बराबर है।
“Quiet Death”: अमेरिका ने जारी किया ‘किलिंग वीडियो’
अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) ने इस हमले की न केवल पुष्टि की, बल्कि इतिहास में पहली बार किसी पनडुब्बी हमले का लाइव वीडियो भी जारी कर दिया।
- परमाणु पनडुब्बी का वार: अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने बताया कि उनकी पनडुब्बी ने ईरानी जहाज को ‘ट्रैक’ किया और पेरिस्कोप की गहराई से टॉरपीडो दागकर उसे जलसमाधि दे दी।
- मनोवैज्ञानिक युद्ध: हेगसेथ ने इसे “क्वाईट डेथ” करार देते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया के किसी भी कोने में दुश्मन को खत्म करने की ताकत रखता है।
जासूसी का शक: क्या विशाखापट्टनम से ही पीछे थी पनडुब्बी?
डिफेंस एक्सपर्ट्स इस घटना से हैरान हैं। माना जा रहा है कि अमेरिकी पनडुब्बी भारत के विशाखापट्टनम से ही ईरानी युद्धपोत का पीछा कर रही थी।
- रणनीतिक चूक: ईरानी युद्धपोत की रडार प्रणाली अमेरिकी पनडुब्बी को पकड़ने में नाकाम रही।
- इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू: ‘IRIS Dena’ पिछले महीने ही भारत के ‘इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू’ में शामिल हुआ था, जहाँ दुनिया भर की नौसेनाएं एकजुट हुई थीं। भारत से विदा होते ही अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इसे निशाना बनाना अमेरिका की एक बड़ी सामरिक चेतावनी मानी जा रही है।
VOB का नजरिया: भारत के दरवाजे पर पहुंचा महायुद्ध!
ईरानी युद्धपोत का भारत से लौटते वक्त श्रीलंका के पास डूबना नई दिल्ली के लिए भी चिंता का विषय है। हिंद महासागर क्षेत्र, जिसे भारत अपना ‘बैकयार्ड’ मानता है, वहां अमेरिका और ईरान की यह सीधी भिड़ंत वैश्विक व्यापार और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। अब सवाल यह है कि ईरान इस ‘शादी मौत’ का बदला कैसे लेगा? क्या खाड़ी देशों के बाद अब हिंद महासागर में भी मिसाइलें बरसेंगी?


