जमुई रजिस्ट्री कार्यालय में कागजात जलाने पर बवाल: मार्च क्लोजिंग के बीच धुआं-धुआं हुए दस्तावेज, जनता ने पूछा- कहीं हमारी जमीन के रिकॉर्ड तो नहीं खाक हो गए?

  • ​जमुई निबंधन कार्यालय के पीछे सोमवार शाम भारी मात्रा में पुराने दस्तावेजों को जलाए जाने से रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोगों और स्थानीय निवासियों के बीच भारी हड़कंप मच गया।
  • ​प्रत्यक्षदर्शियों और वहां मौजूद लोगों ने आरोप लगाया है कि आनन-फानन में जलाए गए इन कागजों में कई अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील रिकॉर्ड भी शामिल हो सकते हैं।
  • ​निबंधन कचहरी के एक लेखक ने गोपनीय तरीके से दावा किया है कि सरकारी दस्तावेजों के विनष्टीकरण के लिए जिलाधिकारी की अनुमति अनिवार्य है, जिसका यहां उल्लंघन किया गया है।
  • ​रजिस्ट्रार विनीत कुमार ने इस पूरे घटनाक्रम पर सफाई देते हुए इसे एक सामान्य प्रक्रिया बताया और कहा कि ऑनलाइन सिस्टम आने के बाद अनुपयोगी सहायक कागजातों को हटाया जाना जरूरी है।
  • ​मार्च क्लोजिंग के आखिरी दौर में हुई इस कार्रवाई ने विभाग की कार्यशैली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भविष्य के रिकॉर्ड्स को लेकर गहरी आशंका व्याप्त है।

जमुई (द वॉयस ऑफ बिहार)।

मार्च क्लोजिंग की हड़बड़ी के बीच रजिस्ट्री कार्यालय के पिछवाड़े उठी आग की लपटें

वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन यानी ‘मार्च क्लोजिंग’ के दबाव के बीच जमुई रजिस्ट्री कार्यालय सोमवार को एक बड़े विवाद का केंद्र बन गया। सोमवार की शाम जब कार्यालय में निबंधन कराने वालों की भारी भीड़ जुटी थी, तभी कार्यालय परिसर के पिछले हिस्से से धुएं का गुबार उठता देख वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते आग की लपटें तेज हुईं और पता चला कि भारी मात्रा में सरकारी फाइलों और दस्तावेजों को आग के हवाले किया जा रहा है। अचानक हुई इस कार्रवाई ने वहां मौजूद फरियादियों और जमीन खरीदारों को सन्न कर दिया। मार्च महीने का आखिरी समय होने के कारण कार्यालय पर पहले से ही काम का भारी बोझ था, ऐसे में बिना किसी पूर्व सूचना के दस्तावेजों को जलाए जाने की इस घटना ने पूरे माहौल को संदेहास्पद बना दिया। कुछ ही देर में यह खबर पूरे कचहरी परिसर में फैल गई और लोगों की भीड़ उस स्थान पर जमा हो गई जहां कागजात खाक हो रहे थे।

लोगों का तीखा आरोप: ‘भ्रष्टाचार के सबूत मिटाने की तो नहीं हो रही कोशिश?’

रजिस्ट्री कराने पहुंचे दर्जनों लोगों ने इस आगजनी पर अपनी कड़ी नाराजगी और आशंका व्यक्त की है। मौके पर मौजूद कई प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि जलाए जा रहे कागजात केवल रद्दी नहीं थे, बल्कि उनमें कई ऐसी फाइलें भी दिख रही थीं जो देखने में आधिकारिक रिकॉर्ड लग रही थीं। लोगों ने खुलेआम आरोप लगाया कि मार्च क्लोजिंग के समय अक्सर ऐसी गतिविधियां देखने को मिलती हैं, जिससे पुराने पेंडिंग मामलों या विसंगतियों को रफा-दफा किया जा सके। जमीन की रजिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण कार्य से जुड़े कार्यालय में कागजों को इस तरह खुले में जलाना किसी को भी रास नहीं आया। लोगों का सवाल था कि अगर ये कागज रद्दी ही थे, तो इन्हें सुरक्षित तरीके से नष्ट करने के बजाय चोरी-छिपे शाम के समय आग के हवाले क्यों किया गया? इस घटना से उन लोगों में सबसे ज्यादा डर देखा गया जिनके पुराने रजिस्ट्री मामले किसी न किसी तकनीकी कारण से अटके हुए हैं।

नियमों की अनदेखी का गंभीर दावा: क्या जिलाधिकारी की अनुमति ली गई थी?

इस पूरे घटनाक्रम में निबंधन कचहरी के एक अनुभवी लेखक ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। लेखक के अनुसार, किसी भी सरकारी कार्यालय, विशेषकर रजिस्ट्री जैसे संवेदनशील विभाग में पुराने दस्तावेजों को नष्ट करने की एक लंबी और कानूनी प्रक्रिया निर्धारित है। नियमानुसार, अनुपयोगी या पुराने रिकॉर्ड्स को विनष्टीकरण (Weeding out) के लिए पहले एक सूची तैयार करनी पड़ती है, जिसकी समीक्षा के बाद जिला पदाधिकारी (DM) से औपचारिक अनुमति लेना अनिवार्य होता है। लेखक ने आरोप लगाया कि जमुई रजिस्ट्री कार्यालय में इस प्रक्रिया को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया और मनमाने ढंग से फाइलों को जला दिया गया। आशंका जताई जा रही है कि इस प्रक्रिया में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी जल गए होंगे जिनका भविष्य में किसी विवाद के समय साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता था।

रजिस्ट्रार विनीत कुमार की सफाई: ‘डिजिटल युग में भौतिक फाइलों का ढेर बना बोझ’

मामला तूल पकड़ता देख जमुई के रजिस्ट्रार विनीत कुमार ने आधिकारिक पक्ष रखते हुए स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वर्तमान में निबंधन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन मोड में शिफ्ट हो चुकी है। विनीत कुमार के अनुसार, जब कोई व्यक्ति जमीन की रजिस्ट्री कराता है, तो उस समय संलग्न किए गए विभिन्न दस्तावेजों और प्रपत्रों की गहन जांच की जाती है और उन्हें सिस्टम में अपलोड कर दिया जाता है। एक बार प्रक्रिया पूरी हो जाने और एक वर्ष की निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद, उन सहायक कागजातों जैसे कि फॉर्म, चेकलिस्ट और अन्य सहायक प्रपत्रों की भौतिक प्रति की आवश्यकता नहीं रह जाती। रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया कि कार्यालय में जगह की भारी कमी है और सुचारू कार्य संचालन के लिए ऐसे अनुपयोगी कागजातों का विनष्टीकरण करना एक प्रशासनिक आवश्यकता है। उन्होंने दावा किया कि केवल उन्हीं कागजातों को हटाया गया है जिनका अब कोई वैधानिक उपयोग नहीं बचा है।

जगह की कमी या प्रशासनिक लापरवाही? जलते कागजों ने खड़े किए कई सवाल

रजिस्ट्रार की दलील के बावजूद, जमुई रजिस्ट्री कार्यालय में मचे इस बवाल ने प्रशासन के प्रबंधन पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यदि अनुपयोगी कागजातों को हटाना जरूरी ही था, तो इसके लिए दिन के उजाले में और पूरी पारदर्शिता के साथ विनष्टीकरण की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई? कार्यालय के पीछे दस्तावेजों का ढेर लगाकर आग लगाना न केवल सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक है, बल्कि यह पर्यावरण नियमों के भी खिलाफ है। मार्च क्लोजिंग के तनावपूर्ण समय में इस तरह की गतिविधि ने संदेह की आग में घी डालने का काम किया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर ये सहायक कागजात थे, तो भी इन्हें नष्ट करने के लिए किसी अधिकृत एजेंसी या कतरने वाली मशीन (Shredder) का उपयोग क्यों नहीं किया गया? आग लगाकर नष्ट करना अक्सर साक्ष्यों को मिटाने का सबसे आसान तरीका माना जाता है, जिससे आम जनता का शक गहरा गया है।

जमीन विवादों वाले राज्य में कागजों की अहमियत और जनता का डर

बिहार जैसे राज्य में जहां अदालतों में लंबित आधे से अधिक मामले जमीन विवाद से जुड़े होते हैं, वहां रजिस्ट्री कार्यालय के कागजातों का एक-एक पन्ना सोने के समान कीमती होता है। ऐसे में ‘फॉर्म’ या ‘चेकलिस्ट’ बताकर कागजों को जलाना उन लोगों के लिए डरावना है जिनकी जमीन की मिल्कियत का एकमात्र आधार यही रिकॉर्ड्स होते हैं। जमुई के लोगों का मानना है कि तकनीकी रूप से भले ही सब कुछ ऑनलाइन हो गया हो, लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी पुरानी खतियानी और रजिस्ट्री कॉपियों की ही मान्यता सबसे अधिक है। अगर सहायक कागजातों के नाम पर कोई मुख्य दस्तावेज जल गया हो, तो उसकी भरपाई भविष्य में संभव नहीं होगी। इस घटना के बाद कई लोगों ने अपने पुराने रजिस्ट्री रिकॉर्ड्स की स्थिति जानने के लिए कार्यालय के चक्कर लगाने भी शुरू कर दिए हैं।

जांच की मांग और मार्च क्लोजिंग की गहमागहमी के बीच बढ़ता तनाव

सोमवार की इस घटना के बाद जमुई के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जलाए गए कागजातों की सूची क्या थी और क्या वाकई इसके लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया गया था। इधर, मार्च क्लोजिंग के कारण कार्यालय में काम का दबाव अपने चरम पर है। देर रात तक रजिस्ट्री की प्रक्रिया चल रही है ताकि राजस्व लक्ष्य को पूरा किया जा सके। इस गहमागहमी के बीच दस्तावेजों के जलने का विवाद फिलहाल शांत होता नहीं दिख रहा है। विपक्ष और स्थानीय संगठनों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है, जिससे आने वाले दिनों में जमुई रजिस्ट्री कार्यालय की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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