बिहार के गांवों में ‘उजाला’ क्रांति! 3.64 लाख सोलर लाइटें लगीं; सुस्त एजेंसियों पर गिरेगी गाज, 31 मार्च तक 100% का डेडलाइन

HIGHLIGHTS: दक्षिण बिहार के 17 जिलों की ‘महा-समीक्षा’

  • बड़ा लक्ष्य: दक्षिण बिहार के 17 जिलों में अब तक 3,64,605 सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाई जा चुकी हैं।
  • पटना टॉप पर: अकेले पटना जिले की ग्राम पंचायतों में 37,656 सोलर लाइटें जगमगा रही हैं।
  • अंतिम चेतावनी: 31 मार्च 2026 तक हर हाल में शत-प्रतिशत अधिष्ठापन का लक्ष्य; लापरवाही पर ठेका रद्द करने का निर्देश।
  • नाइट चेकिंग: अब पंचायत सचिव रात में गांव-गांव जाकर लाइटों की जांच करेंगे; खराब लाइटों पर तुरंत एक्शन।

समीक्षा बैठक का ‘फाइल’ रिकॉर्ड: एक नजर में

मुख्य बिंदु

विवरण

अध्यक्षता

श्री नवीन कुमार सिंह, निदेशक, पंचायती राज विभाग, बिहार।

शामिल जिले

17 (पटना, गया, भागलपुर, जमुई, मुंगेर, रोहतास, बक्सर आदि)।

सोलर लाइट टारगेट

31 मार्च 2026 तक 100% अधिष्ठापन अनिवार्य।

भवन हस्तांतरण

नवनिर्मित पंचायत सरकार भवनों को तुरंत क्रियाशील करने का आदेश।

वित्त आयोग

6th राज्य वित्त आयोग की योजनाओं को तेजी से लागू करने का निर्देश।

पटना | 18 मार्च, 2026

​बिहार के गांवों की गलियां अब अंधेरे में नहीं रहेंगी। मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना को लेकर नीतीश सरकार ‘एक्शन मोड’ में है। बुधवार को पंचायती राज विभाग के निदेशक नवीन कुमार सिंह ने दक्षिण बिहार के 17 जिलों के आला अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर स्पष्ट संदेश दे दिया है कि काम में देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सुस्त एजेंसियों को ‘कारण बताओ’ नोटिस

​निदेशक ने उन एजेंसियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है जो सोलर लाइट लगाने में देरी कर रही हैं।

  1. कार्रवाई का निर्देश: जिला पंचायत राज पदाधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे ऐसी एजेंसियों से स्पष्टीकरण मांगें और जरूरत पड़ने पर अनुबंध के अनुसार उन पर कार्रवाई करें।
  2. भुगतान की शर्त: काम पूरा करने वाली एजेंसियों का भुगतान भी समय पर करने को कहा गया है ताकि फंड की कमी से काम न रुके।

टेक्नोलॉजी से होगी ‘डिजिटल निगरानी’

​अब केवल लाइट लगाना काफी नहीं है, उसे जलते रहना भी जरूरी है:

  • ब्रेडा (BREDA) इंटीग्रेशन: सभी लाइटों को केंद्रीकृत अनुश्रवण प्रणाली (Monitoring System) से जोड़ा जाएगा ताकि पटना से ही पता चल सके कि कहाँ की लाइट बंद है।
  • नाइट इंस्पेक्शन: पंचायत सचिवों की जिम्मेदारी होगी कि वे रात में स्थल निरीक्षण करें और सुनिश्चित करें कि ‘सिग्नल लॉस’ या ‘फॉल्टी’ लाइटों को तुरंत दुरुस्त किया जाए।

VOB का नजरिया: क्या 13 दिनों में पूरा होगा 100% का सपना?

​आज 18 मार्च है और विभाग ने 31 मार्च की डेडलाइन तय की है। महज 13 दिनों के भीतर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करना अधिकारियों और एजेंसियों के लिए किसी ‘अग्निपरीक्षा’ से कम नहीं है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि पंचायत सरकार भवनों का शीघ्र हस्तांतरण और सोलर लाइटों की नियमित निगरानी बिहार के गांवों को ‘स्मार्ट विलेज’ बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। हालांकि, एजेंसियों पर कार्रवाई की धमकी कितनी कारगर होगी, यह तो अप्रैल की शुरुआत में ही पता चलेगा।

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