भागलपुर में LPG ‘वेटिंग’ पर DM का एक्शन ! बैकलाग खत्म करने को 3 शिफ्ट में होगी डिलीवरी; “खाली नहीं है सिलेंडर तो बुकिंग होगी रद्द”

HIGHLIGHTS: रसोई गैस की ‘वेटिंग लिस्ट’ पर प्रशासन का कड़ा प्रहार

  • एक्शन मोड: जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने गैस एजेंसियों के साथ की इमरजेंसी बैठक।
  • 3 शिफ्ट प्लान: बैकलाग खत्म करने के लिए एजेंसियां अब बढ़ाएंगी स्टाफ; रात-दिन होगी डिलीवरी।
  • चेतावनी: अगर सिलेंडर खाली नहीं है और आपने बुकिंग की, तो सीधे ‘कैंसिल’ होगी रिक्वेस्ट।
  • निगरानी: जिला आपूर्ति पदाधिकारी और सदर एसडीओ को मॉनिटरिंग का जिम्मा।

भागलपुर | 18 मार्च, 2026

​भागलपुर में रसोई गैस की बुकिंग के बाद ‘डिलीवरी’ के लंबे इंतजार से परेशान जनता के लिए राहत भरी खबर है। जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने आज कड़े तेवर दिखाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि गैस एजेंसियों की सुस्ती अब नहीं चलेगी। कलेक्ट्रेट स्थित कार्यालय प्रकोष्ठ में आयोजित बैठक में डीएम ने वेटिंग लिस्ट (Backlog) को तुरंत शून्य करने का अल्टीमेटम दिया है।

डीएम का ‘डिलीवरी’ फॉर्मूला: स्टाफ बढ़ाएं, शिफ्ट बढ़ाएं

​बैठक में डीएम ने पाया कि कुछ क्षेत्रों में बुकिंग के मुकाबले आपूर्ति काफी धीमी है। इसके लिए उन्होंने तीन प्रमुख निर्देश दिए:

  1. बैकलाग क्लियरेंस: जहां बुकिंग ज्यादा है, वहां अतिरिक्त सिलेंडर आवंटित कर जल्दी से जल्दी आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
  2. ओवरटाइम काम: एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे ज्यादा स्टाफ लगाएं और जरूरत पड़ने पर 2 से 3 शिफ्ट में काम कर ग्राहकों के घर तक गैस पहुंचाएं।
  3. समीक्षा: आपूर्ति में किसी भी तरह की कोताही पर जवाबदेही तय की जाएगी।

‘पैनिक बुकिंग’ पर प्रशासन की सर्जिकल स्ट्राइक

​बैठक के दौरान गैस एजेंसी प्रबंधकों ने एक बड़ी समस्या उठाई। उन्होंने बताया कि कई उपभोक्ता सिलेंडर भरा होने के बावजूद ‘बैकअप’ के चक्कर में बुकिंग कर दे रहे हैं।

​”जब हमारा स्टाफ सिलेंडर लेकर पहुंचता है, तो पता चलता है कि पुराना सिलेंडर अभी खाली ही नहीं है। इससे समय और संसाधन दोनों बर्बाद होते हैं और जरूरतमंदों तक गैस देरी से पहुंचती है।” — क्षेत्रीय प्रबंधक

डीएम का आदेश: ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान की जाए। अगर डिलीवरी के वक्त सिलेंडर खाली नहीं मिला, तो उनकी बुकिंग तुरंत रद्द कर दी जाएगी।

VOB का नजरिया: क्या ‘पैनिक’ ही किल्लत की जड़ है?

​भागलपुर प्रशासन का यह फैसला सराहनीय है। अक्सर लोग अफवाहों के डर से सिलेंडर स्टॉक करना चाहते हैं, जिससे सिस्टम पर बोझ बढ़ता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि जहाँ एक तरफ एजेंसियों को अपनी ‘होम डिलीवरी’ सर्विस को दुरुस्त करना होगा, वहीं उपभोक्ताओं को भी जिम्मेदारी दिखानी होगी। अगर आपके पास गैस है, तो बेवजह बुकिंग न करें ताकि आपके उस पड़ोसी के घर चूल्हा जल सके जिसका सिलेंडर वाकई खत्म हो गया है। प्रशासन का ‘कैंसिलेशन’ वाला हंटर ऐसे गैर-जिम्मेदार उपभोक्ताओं के लिए सटीक इलाज है।

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