
29 जून 2024… भारतीय क्रिकेट इतिहास की वह तारीख, जिसे करोड़ों क्रिकेट प्रेमी कभी नहीं भूल पाएंगे। ठीक दो साल पहले आज ही के दिन कप्तान रोहित शर्मा की अगुवाई में टीम इंडिया ने बारबाडोस के केनिंग्सटन ओवल में इतिहास रचते हुए टी20 वर्ल्ड कप 2024 का खिताब अपने नाम किया था। फाइनल में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 7 रन से हराकर 17 साल बाद टी20 विश्व कप जीतने का सपना पूरा किया।
सूर्यकुमार यादव का कैच बना इतिहास
मैच के आखिरी ओवर में जब दक्षिण अफ्रीका को जीत के लिए 16 रन चाहिए थे, तब हार्दिक पांड्या की पहली ही गेंद पर डेविड मिलर ने बड़ा शॉट खेला। लॉन्ग-ऑफ बाउंड्री पर सूर्यकुमार यादव ने दबाव के बीच ऐसा शानदार कैच लपका, जिसने पूरे मैच का रुख बदल दिया। इस कैच की तुलना आज भी 1983 विश्व कप फाइनल में कपिल देव द्वारा विवियन रिचर्ड्स के कैच से की जाती है।
दो साल बाद सूर्यकुमार ने याद किया सुनहरा पल
विश्व कप जीत की दूसरी वर्षगांठ पर सूर्यकुमार यादव ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा—
“खेल में कुछ पल ऐसे होते हैं जो हमेशा आपके साथ रहते हैं। हर कुर्बानी, हर मुश्किल, हर प्रैक्टिस सेशन और करोड़ों भारतीयों के प्यार ने उस रात को यादगार बनाया। 29 जून 2024… इस पल का जश्न हम हमेशा मनाते रहेंगे।”
विराट कोहली की यादगार फाइनल पारी
पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 20 ओवर में 7 विकेट पर 176 रन बनाए।
- विराट कोहली – 76 रन
- अक्षर पटेल – 47 रन
- शिवम दुबे – 27 रन
शुरुआती तीन विकेट जल्दी गिरने के बावजूद विराट और अक्षर ने शानदार साझेदारी कर भारत को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया।
बुमराह और हार्दिक ने पलटा मैच
177 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए दक्षिण अफ्रीका एक समय जीत की ओर बढ़ता नजर आ रहा था। लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने शानदार वापसी की।
- हेनरिक क्लासेन – 52 रन
- जसप्रीत बुमराह ने अहम विकेट लेकर दबाव बनाया।
- हार्दिक पांड्या ने आखिरी ओवर में डेविड मिलर को आउट कर भारत की जीत पक्की कर दी।
दक्षिण अफ्रीका की टीम 20 ओवर में 169 रन ही बना सकी और भारत ने 7 रन से ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
11 साल बाद आईसीसी ट्रॉफी का सूखा खत्म
इस जीत के साथ भारत ने:
- 17 साल बाद टी20 विश्व कप जीता।
- 11 साल बाद आईसीसी ट्रॉफी अपने नाम की।
- 2013 चैंपियंस ट्रॉफी के बाद पहली बार कोई आईसीसी खिताब जीता।
29 जून 2024 सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के धैर्य, विश्वास और सपनों की ऐतिहासिक जीत थी।


