ढाई सौ राखियां, एक संकल्प… भागलपुर के ‘हेलमेट मैन’ ने राखी को बनाया जिंदगी बचाने का त्योहार

भागलपुर, अगस्त 2025 – राखी का त्योहार भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है, लेकिन इस बार भागलपुर में यह सिर्फ कलाई पर धागा बांधने तक सीमित नहीं रहा… यह बना जिंदगी बचाने का संकल्प

भागलपुर पुलिस के जांबाज सिपाही धनंजय पासवान, जिन्हें लोग पूरे इलाके में ‘हेलमेट मैन’ के नाम से जानते हैं, ने इस रक्षा बंधन पर इतिहास रच दिया।
शहर और आसपास के गांव-कस्बों से आई बहनों ने उन्हें करीब ढाई सौ राखियां बांधीं – लेकिन इसके साथ उन्होंने अपने भाई से एक वादा भी लिया –

“तुम बाइक चलाओ या पीछे बैठो… लेकिन हेलमेट हमेशा पहनना है और अपने परिवार को भी पहनाना है।”


निजी दर्द ने बदला जिंदगी का मकसद

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धनंजय का यह मिशन अचानक पैदा नहीं हुआ, बल्कि उनके दिल के बेहद गहरे जख्म से निकला है। कुछ साल पहले उन्होंने अपने परिवार के एक सदस्य को खो दिया – सिर्फ इसलिए क्योंकि उसने हेलमेट नहीं पहना था।
इस हादसे के बाद उन्होंने कसम खाई –

“जब तक इस शहर का हर बाइक सवार हेलमेट नहीं पहनता, मेरा मिशन खत्म नहीं होगा।”

आज वो न सिर्फ सड़क पर लोगों को रोककर समझाते हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर वहीं हेलमेट बांटते भी हैं।


राखी के धागों में जिंदगी का संदेश

इस रक्षा बंधन पर उनकी कलाईयों पर बंधी हर राखी में एक खास ताकत थी –
प्यार, आशीर्वाद और सुरक्षा का वादा।
ढाई सौ राखियां… ढाई सौ घरों में सड़क सुरक्षा का संदेश… और शायद ढाई सौ जिंदगियां जो कल बच सकती हैं


शहर में गूंजा ‘हेलमेट मैन’ का नाम

दिन भर सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें वायरल होती रहीं। बहनों के चेहरों पर मुस्कान और भाई की आंखों में दृढ़ संकल्प… यह नजारा देखने लायक था।
लोग कह रहे थे –

“ऐसे भाइयों पर गर्व है, जो सिर्फ बहन की रक्षा ही नहीं, उसकी जिंदगी की भी गारंटी देते हैं।”


धनंजय का संदेश

“राखी सिर्फ धागा नहीं, बहन की दुआ और भरोसा है। अगर मैं हेलमेट नहीं पहनूंगा तो उसकी दुआ कैसे पूरी होगी? इसलिए हेलमेट पहनना सिर्फ कानून नहीं, प्यार और जिम्मेदारी है।”


 

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