ट्विशा शर्मा केस में SIT की पूछताछ में भी नहीं टूटा समर्थ, दो घंटे तक खुद को बचाने की कोशिश करता रहा आरोपी पति

भोपाल में चर्चाओं के केंद्र बने ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। एक तरफ परिवार न्याय की मांग को लेकर आवाज बुलंद कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ आरोपी पति समर्थ सिंह पुलिस पूछताछ के दौरान खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश में जुटा हुआ है। शनिवार को कोर्ट से सात दिन की पुलिस रिमांड मिलने के बाद एसआईटी ने आरोपी समर्थ सिंह से करीब दो घंटे तक गहन पूछताछ की। इस दौरान जांच अधिकारियों ने उसके बयान, गतिविधियों और घटना से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल किए, लेकिन पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी लगातार कहानी को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश करता रहा।

जांच एजेंसियों के मुताबिक पूछताछ के दौरान समर्थ सिंह के चेहरे पर किसी तरह का पछतावा या तनाव नजर नहीं आया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वह बेहद शांत तरीके से सवालों के जवाब देता रहा और लगातार यही जताने की कोशिश करता रहा कि उसकी कोई गलती नहीं है। सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान उसने कई बार मृतका ट्विशा के व्यवहार को ही पूरे विवाद की वजह बताने की कोशिश की।

एसआईटी अधिकारियों के मुताबिक आरोपी ने पूछताछ में कई ऐसे दावे किए जिन्हें जांच एजेंसियां तथ्यों के आधार पर परख रही हैं। समर्थ सिंह ने पुलिस को बताया कि अप्रैल महीने में ट्विशा की प्रेगनेंसी की पुष्टि होने के बाद उनके रिश्तों में बदलाव आने लगा था। उसका दावा था कि ट्विशा घरेलू जीवन से ज्यादा ग्लैमरस और स्वतंत्र जीवनशैली पसंद करती थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने इस दलील के जरिए पूरे मामले को व्यक्तिगत मतभेद और वैवाहिक तनाव का रूप देने की कोशिश की।

पूछताछ के दौरान समर्थ सिंह ने यात्रा को लेकर हुए विवाद का भी जिक्र किया। उसने दावा किया कि उसने ट्विशा के साथ बेंगलुरु जाने की योजना बनाई थी और टिकट भी बुक कराए थे, लेकिन बाद में ट्विशा ने अचानक जाने से इनकार कर दिया। आरोपी के अनुसार ट्विशा अपने भाई के पास अजमेर जाना चाहती थी और इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस हुई थी। पुलिस अब इस दावे की सच्चाई की जांच कर रही है।

हालांकि परिवार ने आरोपी के इन बयानों को पूरी तरह झूठा बताया है। भोपाल एम्स पहुंचे ट्विशा के परिजनों ने कहा कि समर्थ सिंह जानबूझकर जांच को भटकाने की कोशिश कर रहा है। ट्विशा की मां ने भावुक होते हुए कहा कि उनकी बेटी अजमेर जाना चाहती थी, लेकिन उसे जाने से रोका गया। परिवार का कहना है कि यदि ट्विशा को रोका नहीं गया होता तो शायद आज वह जिंदा होती।

परिजनों ने यह भी दावा किया कि वे खुद 13 मई को ट्विशा से मिलने आने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही यह घटना हो गई। परिवार का आरोप है कि शुरुआत से ही मामले को दबाने और कहानी को अलग दिशा देने की कोशिश की गई। यही कारण था कि उन्होंने पहले पोस्टमार्टम की रिपोर्ट पर सवाल उठाए और दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की।

इस बीच मामले में दूसरा पोस्टमार्टम भी देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बाद भोपाल एम्स में हाई-लेवल री-पोस्टमार्टम कराया गया। दिल्ली एम्स से पहुंचे फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने पूरे मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट जांच में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

एसआईटी अब केवल आरोपी के मौखिक बयानों पर निर्भर नहीं है। जांच एजेंसियां डिजिटल एविडेंस, कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, यात्रा से जुड़े दस्तावेज और अन्य तकनीकी सबूतों का भी विश्लेषण कर रही हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान समर्थ सिंह कई सवालों पर गोलमोल जवाब देता रहा और कई बार अपने पुराने बयानों से अलग बातें भी कहता नजर आया। इसी कारण जांच एजेंसियां उसके दावों का अलग-अलग स्तर पर सत्यापन कर रही हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल जिला कोर्ट ने समर्थ सिंह का पासपोर्ट भी जब्त करने का आदेश दिया है। परिवार ने अदालत में आशंका जताई थी कि आरोपी विदेश भागने की कोशिश कर सकता है। कोर्ट ने इस आशंका को गंभीर मानते हुए पासपोर्ट जब्त करने का निर्देश दिया। साथ ही सात दिन की पुलिस रिमांड भी मंजूर की गई ताकि जांच एजेंसियां आरोपी से विस्तार से पूछताछ कर सकें।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिमांड के दौरान आरोपी से घटना की रात की पूरी टाइमलाइन, उसके मोबाइल लोकेशन, कॉल हिस्ट्री और घटनास्थल से जुड़े कई सवालों पर पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी जानने की कोशिश कर रही हैं कि घटना के बाद किससे संपर्क किया गया और किन परिस्थितियों में पुलिस को सूचना दी गई।

उधर सोशल मीडिया पर भी यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। बड़ी संख्या में लोग ट्विशा के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। कई लोगों का कहना है कि यदि परिवार लगातार आवाज नहीं उठाता तो शायद मामला इतनी गंभीरता से जांच के दायरे में नहीं आता।

राजनीतिक स्तर पर भी इस केस को लेकर बयानबाजी जारी है। विपक्षी दलों ने महिला सुरक्षा और जांच की पारदर्शिता को लेकर सरकार से सवाल किए हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बचाया नहीं जाएगा।

जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही कई अहम खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल एसआईटी की टीम लगातार आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसके हर बयान की जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि ट्विशा शर्मा की मौत के पीछे की असली कहानी क्या थी।

इस बीच ट्विशा के परिवार का कहना है कि वे अपनी बेटी के लिए आखिरी सांस तक न्याय की लड़ाई लड़ते रहेंगे। परिवार को उम्मीद है कि जांच एजेंसियां सच्चाई सामने लाएंगी और जो भी दोषी होगा उसे कानून के तहत सख्त सजा मिलेगी।

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