तुलसीदास की रचनाओं में श्रृंगार, भक्ति और नीति का संगम, प्रेमचंद की कहानियों में दीन-दुखियों की पीड़ा: परवेज आलम

पटना, 31 जुलाई 2025मुंशी प्रेमचंद और गोस्वामी तुलसीदास की जयंती के अवसर पर मंत्रिमंडल सचिवालय (राजभाषा) विभाग द्वारा गुरुवार को अभिलेख भवन स्थित सभागार में एक भव्य साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण और बिहार गीत से हुआ।


“तुलसीदास के साहित्य में धर्म, श्रृंगार और नीति का समन्वय” — एस.एम. परवेज आलम

राजभाषा विभाग के निदेशक एस.एम. परवेज आलम ने स्वागत भाषण में कहा कि तुलसीदास ने समाज में नैतिक उत्थान के लिए कार्य किया। उनकी रचनाओं में भक्ति, श्रृंगार, धर्म और नीति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। उन्होंने प्रेमचंद की 145वीं जयंती पर कहा कि प्रेमचंद की कहानियाँ भारतीय किसानों, शोषितों और पीड़ितों की पीड़ा को यथार्थ के साथ चित्रित करती हैं। उनका साहित्य मानव कल्याण की भावना को जागृत करता है।


“प्रेमचंद का साहित्य आज भी जीवंत” — प्रो. शिप्रा शर्मा

दरभंगा हाउस हिंदी विभाग की प्रोफेसर डॉ. शिप्रा शर्मा ने प्रेमचंद की भाषा-शैली और उनके साहित्यिक योगदान पर चर्चा करते हुए कहा कि उनके उपन्यास और कहानियाँ आज भी शोध का विषय हैं। उन्होंने बताया कि प्रेमचंद ने किसानों और मजदूरों को लेखन का केंद्र बनाकर हिंदी साहित्य को लोकसंवेदनाओं से जोड़ा। उन्होंने कहा, “प्रेमचंद ने हिंदी को सरल और सहज बनाया और उनकी रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करेंगी।”


“तुलसीदास और प्रेमचंद की जयंती एक साहित्यिक संयोग” — डॉ. राम सिंहासन सिंह

राम लखन सिंह यादव कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. राम सिंहासन सिंह ने इसे एक अद्भुत साहित्यिक संयोग बताया कि तुलसीदास और प्रेमचंद की जयंती एक ही दिन पड़ती है। उन्होंने कहा कि दोनों साहित्यकारों का साहित्य लोककल्याण और जनचेतना से ओतप्रोत है। तुलसीदास ने मर्यादा और आदर्श को केंद्र में रखा, जबकि प्रेमचंद ने पशु-पक्षियों तक के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “इनकी रचनाओं को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।”


अन्य वक्ताओं की अभिव्यक्ति

  • मुरारिका संस्कृत कॉलेज से सेवानिवृत्त चन्द्रभूषण मिश्र ने तुलसीदास के जीवन और दर्शन पर प्रकाश डाला।
  • रांची विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. जंग बहादुर पांडेय ने कहा कि रामचरितमानस हमें सुमति अपनाने और कुमति से बचने का संदेश देती है।
  • जिज्ञासु बाल विद्यालय के प्राचार्य शशिकांत शर्मा ने तुलसीदास के पदों का भावपूर्ण गायन किया।

मंच संचालन और धन्यवाद ज्ञापन

कार्यक्रम का मंच संचालन राजभाषा विभाग के उप निदेशक डॉ. प्रमोद कुंवर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अनिल कुमार लाल द्वारा प्रस्तुत किया गया।
इस आयोजन ने साहित्य प्रेमियों को संवेदना, संस्कृति और साहित्यिक चेतना से जोड़ने का कार्य किया।


 

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