​ट्रंप का जजों पर बड़ा हमला: सुप्रीम कोर्ट के जजों को कहा ‘मूर्ख और चमचा’; भारत समेत पूरी दुनिया पर 15% ग्लोबल टैरिफ का ऐलान

वॉशिंगटन/नई दिल्ली | 22 फरवरी, 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वहां की न्यायपालिका के बीच टकराव अब चरम पर पहुंच गया है। अपने बहुचर्चित ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ (पारस्परिक शुल्क) को सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने जजों पर तीखा निजी हमला बोला है। इसके साथ ही उन्होंने भारत सहित दुनिया के सभी देशों से आने वाले सामान पर 15% ‘ग्लोबल टैरिफ’ लगाने की बड़ी घोषणा कर वैश्विक बाजार में खलबली मचा दी है।

​जजों को बताया ‘राष्ट्र के लिए कलंक’

​सुप्रीम कोर्ट के 6-3 के फैसले से भड़के ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जजों के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की।

  • निजी हमला: ट्रंप ने उन जजों को ‘मूर्ख’ और ‘चमचा’ (Lapdogs) करार दिया जिन्होंने उनके खिलाफ फैसला सुनाया।
  • अपमानित महसूस करना: राष्ट्रपति ने कहा कि वह कोर्ट के कुछ सदस्यों से “बेहद शर्मिंदा” हैं क्योंकि उनमें देश के लिए सही फैसला लेने का साहस नहीं है। उन्होंने अपने ही द्वारा नियुक्त कुछ जजों को ‘राष्ट्र के लिए कलंक’ तक कह डाला।

​10% से बढ़ाकर 15% किया ग्लोबल टैरिफ

​सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ट्रंप की शुल्क लगाने की शक्तियों को अवैध ठहराया था। इसके जवाब में ट्रंप ने वैकल्पिक कानूनी रास्तों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।

  1. शुक्रवार की घोषणा: ट्रंप ने पहले अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर सभी देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए।
  2. शनिवार का इजाफा: शनिवार को उन्होंने इस शुल्क को बढ़ाकर 15% करने का ऐलान कर दिया।
  3. समय सीमा: यह टैरिफ ‘व्यापार अधिनियम 1974’ की धारा 122 के तहत लगाया जा रहा है, जो फिलहाल 150 दिनों के लिए प्रभावी रहेगा। इसके बाद इसे जारी रखने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी।

​भारत पर प्रभाव: “कुछ नहीं बदलेगा, भारत को देना होगा शुल्क”

​भारत के साथ प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) को लेकर जब ट्रंप से सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ रुख अपनाया:

  • समझौता बरकरार: ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद भारत के साथ समझौते का ढांचा कायम रहेगा।
  • दो टूक बयान: ट्रंप ने कहा, “कुछ नहीं बदलेगा। भारत को शुल्क देना होगा। यह एक निष्पक्ष सौदा है—वे हमें शुल्क देंगे और हम उन्हें शुल्क नहीं देंगे।”
  • नया शुल्क ढांचा: विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका द्वारा पहले लगाए गए 25% दंडात्मक शुल्क को घटाकर 18% करने की बात थी, लेकिन अब 15% ग्लोबल टैरिफ लागू होने से भारतीय निर्यातकों के लिए समीकरण फिर से बदल सकते हैं।

​भारत सरकार का रुख: वाणिज्य मंत्रालय कर रहा है अध्ययन

​अमेरिकी प्रशासन के इस अचानक आए फैसले पर भारत सरकार ने सतर्क प्रतिक्रिया दी है।

    • समीक्षा शुरू: भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि वह अमेरिकी टैरिफ से जुड़े हालिया घटनाक्रमों और भारतीय उद्योगों पर इसके संभावित प्रभावों का बारीकी से अध्ययन कर रहा है।
    • रणनीतिक चर्चा: भारतीय अधिकारी यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि प्रस्तावित व्यापार समझौते के तहत मिलने वाले लाभ इस नए ग्लोबल टैरिफ के कारण प्रभावित न हों।

द वॉयस ऑफ बिहार का विश्लेषण: राष्ट्रपति ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और न्यायपालिका के साथ उनके इस सीधे टकराव ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह अपने निर्यात हितों की रक्षा करते हुए ट्रंप प्रशासन के साथ इस नए ‘टैरिफ युद्ध’ में बीच का रास्ता कैसे निकालता है।

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