
वॉशिंगटन, 9 अप्रैल 2026 — अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नाटो (NATO) को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब अमेरिका को सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब नाटो उसके साथ नहीं खड़ा हुआ और भविष्य में भी भरोसा नहीं किया जा सकता। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
“नाटो भरोसेमंद नहीं” — ट्रंप का सीधा हमला
हाल ही में नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ हुई बैठक के बाद ट्रंप ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि नाटो ने अमेरिका की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर भविष्य में ऐसी स्थिति आई, तो यह गठबंधन फिर साथ नहीं देगा।
ट्रंप ने अपने बयान में ग्रीनलैंड का जिक्र करते हुए वहां की स्थिति पर भी सवाल उठाए और इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया।
बंद कमरे की बैठक के बाद बढ़ी तल्खी
सूत्रों के अनुसार, ट्रंप और नाटो महासचिव के बीच यह बैठक काफी अहम मानी जा रही थी। इसमें वैश्विक सुरक्षा, ईरान से जुड़े तनाव और ऊर्जा संकट जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। लेकिन बैठक के बाद ट्रंप का बयान इस बात का संकेत देता है कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद अभी भी कायम हैं।
ईरान तनाव और ऊर्जा संकट की पृष्ठभूमि
हाल के दिनों में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उठाए गए कदमों से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ है। गैस और तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे अमेरिका सहित कई देशों की चिंता बढ़ गई है।
इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम की खबर भी सामने आई है, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
नाटो से बाहर निकलने की फिर चर्चा
ट्रंप पहले भी कई बार नाटो की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल में भी यह कहा था कि अमेरिका को नाटो से बाहर निकलने पर विचार करना चाहिए।
हालांकि, 2023 में पारित एक कानून के तहत अब किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति को नाटो छोड़ने के लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक है। ऐसे में ट्रंप का यह बयान राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
ग्रीनलैंड पर भी उठाया मुद्दा
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर भी अपनी नाराजगी जताई। यह क्षेत्र डेनमार्क के अधीन है और नाटो का हिस्सा है। ट्रंप पहले भी ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी नियंत्रण की बात कर चुके हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद पैदा हुआ था।
क्या बदलेगा वैश्विक समीकरण?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस तरह के बयान नाटो जैसे बड़े सैन्य गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े करते हैं। यदि अमेरिका और नाटो के बीच दूरी बढ़ती है, तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा ढांचे पर पड़ सकता है।
फिलहाल, व्हाइट हाउस की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।


