ट्रक ड्राइवर की बेटी ने लिखी सफलता की नई कहानी: री-NEET की चुनौती पार कर बनी डॉक्टर बनने की हकदार

दरभंगा: कठिन परिस्थितियां, आर्थिक तंगी और री-NEET की चुनौती भी दरभंगा की कायनात खानम के हौसले को नहीं डिगा सकीं। ट्रक ड्राइवर की बेटी कायनात ने NEET परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर डॉक्टर बनने का अपना सपना साकार करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। उन्होंने 720 में से 593 अंक हासिल किए हैं। उनकी ऑल इंडिया रैंक (AIR) 12,575 और कैटेगरी रैंक 1,407 आई है।

पेपर लीक के बाद टूट गया था हौसला

कायनात बताती हैं कि पहली परीक्षा में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा था और वे क्वालीफाई भी कर गई थीं। लेकिन कुछ दिनों बाद पेपर लीक के कारण दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा हुई, जिससे वे मानसिक रूप से काफी परेशान हो गईं।

उन्होंने कहा,

“डॉक्टर बनना मेरा सपना था। पहली परीक्षा में मेरा स्कोर अच्छा था, लेकिन री-एग्जाम की खबर सुनकर मैं डिप्रेशन में चली गई थी। डर था कि दोबारा सफल हो पाऊंगी या नहीं।”

शिक्षक ने बढ़ाया आत्मविश्वास

कायनात ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के साथ-साथ अपने शिक्षक सुमित सर को दिया। उन्होंने बताया कि जब वे निराश हो गई थीं, तब शिक्षक ने उन्हें हिम्मत दी और दोबारा पूरी तैयारी के साथ परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने बताया कि बाद में वे संस्थान के हॉस्टल में रहने लगीं और पूरी लगन से तैयारी शुरू की।

रोज 12 से 13 घंटे की पढ़ाई

री-NEET की तैयारी के दौरान कायनात रोजाना 12 से 13 घंटे पढ़ाई करती थीं। उन्होंने बताया कि संस्थान में कठिन टेस्ट लिए जाते थे, जिनमें कम अंक आने पर वे कई बार रो भी पड़ती थीं। इसी चुनौती ने उन्हें और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।

गांव से शुरू हुआ सफर

दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड के मोरवारा गांव की रहने वाली कायनात ने शुरुआती पढ़ाई पश्चिम बंगाल में अपने नाना-नानी के घर रहकर की। कोविड-19 महामारी के दौरान वे अपने गांव लौट आईं, जहां इंटरनेट की समस्या के कारण ऑनलाइन पढ़ाई प्रभावित होने लगी।

बेटी की पढ़ाई के प्रति समर्पण देखकर उनके पिता ने दरभंगा शहर में किराये का मकान लेकर परिवार को वहां बसाने का फैसला किया, ताकि उसे बेहतर शिक्षा मिल सके।

पिता ने संघर्ष कर पूरा किया सपना

कायनात के पिता इम्तियाज अहमद खान ट्रक चालक हैं। उन्होंने बताया कि सीमित आय में परिवार, किराया और बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी।

उन्होंने कहा,

“ट्रक ड्राइवर की जिंदगी आसान नहीं होती। कमाई सीमित होती है, लेकिन बेटी का सपना पूरा करना सबसे बड़ा लक्ष्य था। आज उसकी सफलता हमारी वर्षों की मेहनत का परिणाम है।”

अब गरीबों की सेवा करना चाहती हैं

कायनात का कहना है कि डॉक्टर बनने के बाद उनकी प्राथमिकता गरीब और जरूरतमंद मरीजों की सेवा करना है। उनका मानना है कि मेहनत, आत्मविश्वास और परिवार के सहयोग से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।

कायनात की सफलता उन लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

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