
राजधानी पटना में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। पिंक बस सेवा के संचालन के लिए महिला चालकों की दूसरे चरण की ट्रेनिंग शुरू हो चुकी है। अब प्रशिक्षित महिला चालक शहर की सड़कों पर वास्तविक परिस्थितियों में बस चलाने का अभ्यास कर रही हैं, जिससे उन्हें फील्ड लेवल का अनुभव मिल सके।
पहले चरण के बाद अब प्रैक्टिकल ट्रेनिंग
जानकारी के अनुसार, पहले चरण की ट्रेनिंग पूरी कर चुकी पांच महिला चालकों को दूसरे चरण में पटना की सड़कों पर बस चलाने का मौका दिया गया है।
इन महिला चालकों में आरती कुमारी, रागिनी कुमारी, सरस्वती कुमारी, गायत्री कुमारी और बेबी कुमारी शामिल हैं। ये सभी हेवी मोटर व्हीकल (HMV) लाइसेंस धारक हैं और पिछले तीन दिनों से बेली रोड रूट पर बस चलाने का अभ्यास कर रही हैं।
15 दिनों तक चलेगा सड़क पर अभ्यास
इन महिला चालकों को करीब 15 दिनों तक शहर की व्यस्त सड़कों पर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी।
इस दौरान अनुभवी चालकों के मार्गदर्शन में उन्हें ट्रैफिक, मोड़, ब्रेकिंग और यात्रियों की सुरक्षा जैसे पहलुओं की बारीकियां सिखाई जा रही हैं।
टेस्ट के बाद मिलेगी जिम्मेदारी
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिला चालकों की ड्राइविंग स्किल का मूल्यांकन किया जाएगा।
जो चालक इस परीक्षा में सफल होंगी, उन्हें पिंक बस चलाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। यह कदम सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
100 पिंक बसों में होंगी महिला चालक
बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) की योजना है कि महिलाओं के लिए चलाई जा रही 100 पिंक बसों में महिला चालकों की नियुक्ति की जाए।
इससे न सिर्फ महिलाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि महिला यात्रियों को भी सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा का अनुभव मिलेगा।
औरंगाबाद में भी चल रही ट्रेनिंग
इस योजना के तहत 21 अन्य महिला चालकों को औरंगाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च (IDTR) में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
यहां उन्हें बस संचालन से जुड़ी सभी तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है।
14 दिन की आवासीय ट्रेनिंग
पिछले महीने पांच महिला चालकों को IDTR में 14 दिनों की आवासीय ट्रेनिंग दी गई थी।
इस दौरान उन्हें—
- बस संचालन की तकनीक
- सड़क सुरक्षा नियम
- इंजन और वाहन रखरखाव
- आपातकालीन स्थिति से निपटना
जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।
सिमुलेटर और रियल ड्राइविंग दोनों का अभ्यास
ट्रेनिंग के दौरान महिला चालकों को सिमुलेटर पर बस चलाने की प्रैक्टिस भी कराई गई, ताकि वे पहले वर्चुअल माहौल में ड्राइविंग सीख सकें।
इसके बाद उन्हें रियल टाइम ड्राइविंग का अनुभव दिया गया, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
यह पहल सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पिंक बस सेवा के जरिए महिलाओं को रोजगार के साथ-साथ समाज में नई पहचान मिल रही है।
यात्रियों के लिए भी सुरक्षित विकल्प
महिला चालकों के संचालन से पिंक बसें खासकर महिला यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक मानी जा रही हैं।
इससे सार्वजनिक परिवहन में भरोसा भी बढ़ेगा।
पटना में महिला चालकों की यह ट्रेनिंग पहल दिखाती है कि अब महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, चाहे वह भारी वाहन चलाना ही क्यों न हो।
आने वाले समय में जब ये महिलाएं पिंक बस की कमान संभालेंगी, तो यह न केवल उनके लिए बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बनेगा।
यह पहल बिहार में महिला सशक्तिकरण और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकती है।


