मुज़फ्फरपुर। केंद्र सरकार के प्रस्तावित ‘जी राम जी’ विधेयक को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। मुज़फ्फरपुर में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि राम का नाम जुड़ते ही कुछ लोगों को परेशानी होने लगती है, जबकि महात्मा गांधी स्वयं रामराज्य की कल्पना करते थे।
‘गांधीजी के अंतिम शब्द भी हे राम थे’
पर्यटन मंत्री ने गांधीजी के प्रिय भजन “रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम” का उल्लेख करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के अंतिम शब्द भी “हे राम” थे। उन्होंने कहा कि यह विधेयक गरीबों, वंचितों और श्रमिक वर्ग को गरिमा के साथ रोजगार देने की दिशा में एक ठोस पहल है।
अरुण शंकर प्रसाद ने कहा,
“गरीबों, जनजातियों और पिछड़े वर्गों को रोजगार उपलब्ध कराना इस योजना का मूल लक्ष्य है। यह विधेयक ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय मिशन के अनुरूप है और गांधीजी की भावना के अनुसार रामराज्य की स्थापना की दिशा में एक कदम है।”
125 दिन का वेतनयुक्त रोजगार
मंत्री ने बताया कि नई योजना के तहत ग्रामीण रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी की गई है।
- प्रत्येक ग्रामीण परिवार को सालाना 125 दिन का वेतनयुक्त रोजगार मिलेगा।
- वन क्षेत्रों में कार्यरत अनुसूचित जनजाति के श्रमिकों को 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार दिया जाएगा।
- मजदूरी का भुगतान समय पर और साप्ताहिक आधार पर किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि मनरेगा वर्ष 2006 में लागू हुई थी और अब तक इस पर 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जिसमें से 8.53 लाख करोड़ रुपये वर्तमान सरकार के कार्यकाल में व्यय किए गए। नए विधेयक में 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रावधान के साथ रोजगार की गारंटी दी गई है।
‘हर योजना में गांधी-नेहरू परिवार का नाम जोड़ा गया’
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पर्यटन मंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने लगभग हर योजना का नाम गांधी-नेहरू परिवार से जोड़ा।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि—
- राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम को जवाहर रोजगार योजना और बाद में मनरेगा नाम दिया गया
- ग्रामीण आवास योजना को इंदिरा आवास योजना
- ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना नाम दिया गया
मंत्री ने कहा,
“मोदी सरकार में नाम नहीं, काम बोलता है।”
‘योजना का पुनर्गठन समय की मांग’
अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि 2005 के बाद ग्रामीण भारत में बड़ा बदलाव आया है।
- 2011-12 में ग्रामीण गरीबी दर 25.7 प्रतिशत थी
- 2023-24 में यह घटकर 4.86 प्रतिशत रह गई
उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी, आजीविका के साधनों और सामाजिक सुरक्षा के चलते 2005 का ओपन-एंडेड मॉडल अब प्रासंगिक नहीं रहा, इसलिए 2025 की जरूरतों के अनुसार योजना का पुनर्गठन आवश्यक था।
मनरेगा में घोटालों का आरोप
पर्यटन मंत्री ने कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा में बड़े घोटालों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नई योजना में—
- रियल-टाइम डेटा अपलोड
- जीपीएस और मोबाइल मॉनिटरिंग
- आधार आधारित फ्रॉड डिटेक्शन
जैसे उपायों से पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
योजना की चार प्राथमिकताएं
- जल संबंधी कार्य
- कोर ग्रामीण बुनियादी ढांचा
- आजीविका से जुड़ा आधारभूत ढांचा
- खराब मौसम के कारण काम की कमी को कम करना
किसानों के हित में प्रावधान
मंत्री ने कहा कि किसानों के हित में बुआई और कटाई के मौसम में योजना को 60 दिनों के लिए स्थगित करने का प्रावधान किया गया है, ताकि कृषि कार्यों के लिए पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध रह सकें। सिंचाई, भंडारण, सड़क, बाजार पहुंच और बाढ़-सूखा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
भुगतान व्यवस्था और राज्यों की भागीदारी
- साप्ताहिक भुगतान का प्रावधान
- पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में 90% केंद्र, 10% राज्य
- अन्य राज्यों में 60% केंद्र, 40% राज्य का योगदान
- 15 दिन में रोजगार नहीं मिलने पर राज्य सरकार देगी बेरोजगारी भत्ता
- केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद के गठन का प्रस्ताव
‘मोदी ने सेवा और विकास को प्राथमिकता दी’
प्रेसवार्ता के अंत में मंत्री ने कहा कि देश में करीब 600 योजनाएं और संस्थान गांधी परिवार के नाम पर रखे गए, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी अपने नाम पर किसी योजना का नामकरण नहीं किया। उनका फोकस केवल सेवा, सुशासन और विकास पर रहा है।
कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेताओं ने मंत्री का फूल-मालाओं और शॉल से स्वागत किया और नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।


