नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ कर दिया है कि यदि राष्ट्रीय राजमार्ग गड्ढों और खराबी से भरे हों, तो भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) या उसके ठेकेदार यात्रियों से टोल वसूली नहीं कर सकते।
यह आदेश उस समय आया जब NHAI ने केरल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की थी। हाईकोर्ट ने त्रिशूर के पलियेक्कारा स्थित एनएच-544 पर सड़क की जर्जर हालत को देखते हुए टोल वसूली पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने NHAI की इस अपील को खारिज कर दिया और हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
नागरिकों को अच्छी सड़कों का अधिकार
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि टोल का भुगतान करने वाले नागरिकों को यह वैध अधिकार है कि उन्हें अच्छी और सुरक्षित सड़कें मिलें। यदि यह अधिकार सुरक्षित नहीं है और सड़कें गड्ढों से भरी हैं, तो यात्रियों को टोल चुकाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
शीर्ष अदालत ने कहा कि सड़क उपयोगकर्ताओं से टोल वसूलना तभी जायज है, जब उन्हें बदले में गुणवत्ता वाली सड़क सेवा मिले। यदि सड़कें जर्जर और खतरनाक स्थिति में हों, तो टोल वसूली अन्यायपूर्ण और असंवैधानिक मानी जाएगी।
असर पूरे देश पर पड़ेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला पूरे देश में एक मिसाल बनेगा। अब जहां-जहां राजमार्गों पर टोल वसूली हो रही है, वहां यदि सड़कें गड्ढों और खराबियों से भरी हैं, तो लोग इस आदेश का हवाला देकर टोल देने से बच सकते हैं।


