टीएमबीयू में लॉ की सीटें बढ़ाने और 5 वर्षीय एलएलबी कोर्स शुरू करने की मांग तेज, एनएसयूआई और युवा कांग्रेस का सत्याग्रह, छात्रों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

भागलपुर के तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) परिसर में कानून की पढ़ाई से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) और भारतीय राष्ट्रीय युवा कांग्रेस के संयुक्त नेतृत्व में आयोजित एक दिवसीय सत्याग्रह और भूख हड़ताल के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एलएलबी पाठ्यक्रम की सीटों में की गई कमी और कई वर्षों से बंद पड़े पांच वर्षीय एकीकृत लॉ कोर्स के कारण बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।

आंदोलन में शामिल छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि तीन वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम में सीटों की संख्या पहले की तरह 324 की जाए। इसके साथ ही लंबे समय से बंद पड़े पांच वर्षीय एलएलबी कोर्स में जल्द से जल्द नामांकन प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया जाए, ताकि विद्यार्थियों को दूसरे विश्वविद्यालयों का रुख न करना पड़े।

धरना स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कानून की पढ़ाई करने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए विश्वविद्यालय में पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं हैं। सीटों की संख्या कम होने के कारण हर वर्ष कई योग्य छात्र प्रवेश से वंचित रह जाते हैं, जिससे उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित होता है।

प्रदर्शन के दौरान छात्र नेताओं ने यह भी मांग उठाई कि विश्वविद्यालय में नामांकन प्रक्रिया के दौरान टीएमबीयू क्षेत्र के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना था कि स्थानीय छात्रों को अपने ही विश्वविद्यालय में पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए, ताकि उन्हें दूसरे जिलों या राज्यों में जाकर पढ़ाई करने की मजबूरी न हो।

धरने का नेतृत्व युवा कांग्रेस के नेता विकास सिंह और एनएसयूआई के अमन कुमार मिनाटी ने किया। दोनों नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल सीटें बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय में शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुलभ और छात्र हितैषी बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते विश्वविद्यालय प्रशासन ने सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

एनएसयूआई से जुड़े छात्र नेता मृत्युंजय कुमार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में लॉ की सीटों में कमी आने से हजारों विद्यार्थियों के सपनों पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र कानून की पढ़ाई करना चाहते हैं, लेकिन सीमित सीटों के कारण उन्हें प्रवेश नहीं मिल पाता। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय को छात्रों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सीटों की संख्या बढ़ानी चाहिए।

युवा कांग्रेस के नेताओं ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि मांगों की अनदेखी की गई तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा। इसके तहत पहले बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू की जाएगी। उनका कहना था कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता।

धरना कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने उच्च शिक्षा की वर्तमान स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि कानून की शिक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है और हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों में सीटों की संख्या घटाना छात्रों के हित में नहीं माना जा सकता।

प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि पांच वर्षीय एकीकृत एलएलबी कोर्स बंद होने के कारण बारहवीं के बाद सीधे कानून की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि यदि यह कोर्स फिर से शुरू किया जाता है तो बड़ी संख्या में छात्र इसका लाभ उठा सकेंगे और उन्हें दूसरे संस्थानों में प्रवेश लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

आंदोलन को जन अधिकार पार्टी के छात्र संगठन का भी समर्थन मिला। मारवाड़ी कॉलेज इकाई के अध्यक्ष रॉकी शर्मा धरना स्थल पर पहुंचे और छात्रों की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रत्येक छात्र का अधिकार है और किसी भी विद्यार्थी को सीमित संसाधनों या कम सीटों के कारण उच्च शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए।

धरना स्थल पर मौजूद विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जल्द सकारात्मक फैसला लेना चाहिए। उनका कहना था कि यदि समय पर आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और विश्वविद्यालय प्रशासन से संवाद स्थापित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं बल्कि छात्रों के हित में समाधान निकालना है। इसके लिए प्रशासन को भी संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।

छात्र नेताओं ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए केवल नए भवन या संसाधन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि विभिन्न पाठ्यक्रमों में पर्याप्त सीटें और समय पर नामांकन प्रक्रिया भी आवश्यक है। उनका मानना है कि यदि छात्रों को समय पर अवसर मिलेंगे तो क्षेत्र में उच्च शिक्षा का स्तर और बेहतर होगा।

धरना कार्यक्रम में कई छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द निर्णय लेने की अपील की। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि कानून की पढ़ाई से जुड़े मुद्दे को लेकर विद्यार्थियों में गंभीर चिंता है।

आंदोलन के समापन पर छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन से सकारात्मक संवाद की उम्मीद है, लेकिन यदि समाधान नहीं निकला तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रखा जाएगा।

फिलहाल सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर है। यदि सीटों में बढ़ोतरी और पांच वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम को दोबारा शुरू करने को लेकर कोई निर्णय लिया जाता है, तो इससे बड़ी संख्या में छात्रों को राहत मिल सकती है। वहीं, मांगें लंबित रहने की स्थिति में विश्वविद्यालय परिसर में छात्र आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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