
भागलपुर जिले के कहलगांव प्रखंड अंतर्गत बुद्धचक थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने बाल विवाह रोकने की प्रशासनिक मुहिम और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जिला प्रशासन लगातार बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा को समाप्त करने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी ओर नाबालिग प्रेमी-युगल की कथित शादी का मामला चर्चा का विषय बन गया है। आरोप है कि दोनों को पुलिस द्वारा थाने लाने के बाद अगले ही दिन छोड़ दिया गया और उसके बाद ग्रामीणों की मौजूदगी में दोनों का विवाह करा दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और अब सभी की नजर जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
बाल विवाह रोकने के लिए लगातार चल रहा है अभियान
भागलपुर जिला प्रशासन पिछले कई वर्षों से बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अभियान चला रहा है। प्रशासन समय-समय पर स्कूलों, पंचायतों, आंगनबाड़ी केंद्रों और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक करता रहा है।
जिलाधिकारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी सार्वजनिक मंचों से लगातार यह संदेश देते रहे हैं कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इसी बीच बुद्धचक थाना क्षेत्र से सामने आया यह मामला प्रशासनिक प्रयासों पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
रात में डायल-112 की टीम दोनों को लेकर पहुंची थी थाने
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार रात करीब 10 बजे डायल-112 की पुलिस टीम ने बुद्धचक गांव स्थित एक घर से एक लड़का और एक लड़की को बरामद किया। दोनों को पूछताछ के लिए बुद्धचक थाना लाया गया।
स्थानीय लोगों का दावा है कि दोनों नाबालिग थे और उनके बीच प्रेम संबंध होने की चर्चा पहले से चल रही थी। पुलिस द्वारा दोनों को थाने लाने के बाद पूरे इलाके में इस घटना की जानकारी फैल गई।
अगले दिन थाने से छोड़ने का आरोप
मामले में आरोप लगाया जा रहा है कि दोनों को अगले दिन थाने से छोड़ दिया गया। इसके बाद ग्रामीणों की मौजूदगी में कहलगांव के कचहरिया गांव में दोनों का विवाह करा दिया गया।
इस कथित विवाह का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की भी बात कही जा रही है। हालांकि प्रशासन या पुलिस की ओर से वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो बना चर्चा का विषय
बताया जा रहा है कि कथित शादी का वीडियो सामने आने के बाद पूरे इलाके में यह मामला चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर भी लोग इस घटना को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
हालांकि किसी भी वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि संबंधित जांच पूरी होने के बाद ही की जा सकती है। इसलिए मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
दोनों के नाबालिग होने का दावा
स्थानीय लोगों का कहना है कि लड़का कचहरिया गांव का निवासी है, जबकि लड़की बुद्धचक गांव की रहने वाली है। ग्रामीणों का दावा है कि दोनों की उम्र बालिग नहीं थी।
यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है कि दोनों नाबालिग थे, तो यह मामला बाल विवाह निषेध कानून के तहत गंभीर माना जा सकता है। फिलहाल प्रशासन की ओर से दोनों की उम्र को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल पुलिस की भूमिका को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दोनों नाबालिग थे और पुलिस के संज्ञान में यह बात थी, तो उन्हें छोड़ने के बाद संभावित बाल विवाह रोकने के लिए आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए गए।
कई लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल पूछताछ करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि संबंधित विभागों को भी तत्काल सूचना देकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
थानाध्यक्ष ने क्या कहा?
मामले को लेकर बुद्धचक थानाध्यक्ष राहुल कुमार ने बताया कि दोनों को डायल-112 की टीम थाना लेकर आई थी। उन्होंने कहा कि उन्हें दोनों की शादी की जानकारी नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों के दावे जांच में सही पाए जाते हैं तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट
फिलहाल पूरे मामले में कई सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न दोनों की वास्तविक उम्र, थाने में हुई कार्रवाई, उन्हें छोड़ने की परिस्थितियां और कथित विवाह की सत्यता से जुड़े हुए हैं।
यदि जांच में बाल विवाह की पुष्टि होती है तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बाल विवाह कानून क्या कहता है?
भारत में बाल विवाह रोकने के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। निर्धारित आयु से कम उम्र में विवाह कराना कानून के विरुद्ध माना जाता है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इसी कारण प्रशासन समय-समय पर लोगों को जागरूक करता है कि किसी भी नाबालिग लड़का या लड़की का विवाह न कराया जाए और यदि ऐसी जानकारी मिले तो तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित किया जाए।
जागरूकता के बावजूद चुनौती बनी हुई है
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अभियान चलने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार सामाजिक और पारिवारिक दबाव के कारण बाल विवाह जैसी घटनाएं सामने आ जाती हैं।
इसी वजह से प्रशासन केवल कार्रवाई पर ही नहीं बल्कि लगातार जनजागरूकता पर भी विशेष जोर देता है ताकि लोग स्वयं ऐसी कुप्रथाओं से दूरी बनाए रखें।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर
बुद्धचक थाना क्षेत्र से सामने आए इस मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में वायरल वीडियो, स्थानीय लोगों के दावे और नाबालिग होने की बात सही साबित होती है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से मामले की विस्तृत जांच की संभावना जताई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित विवाह किन परिस्थितियों में हुआ, पुलिस की भूमिका क्या रही और क्या बाल विवाह निषेध कानून का उल्लंघन हुआ। पूरे मामले पर स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रशासन और समाज की भी नजर बनी हुई है।


