भागलपुर की सियासत में टिकट की खींचतान, हर सीट पर दावेदारों की नजरें टिकीं

भागलपुर, 12 अक्टूबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही भागलपुर की सियासत में तल्खी और हलचल का माहौल है। जिले की गलियों से लेकर पार्टी दफ्तरों तक हर जगह एक ही सवाल — कौन बनेगा उम्मीदवार और किसे मिलेगा टिकट?

जैसे-जैसे नामांकन की प्रक्रिया करीब आ रही है, प्रत्याशियों और नेताओं की धड़कनें तेज होती जा रही हैं। जिन नेताओं का टिकट लगभग पक्का माना जा रहा है, वे पहले ही प्रचार कार्यालय सजाने, बैनर लगाने और समर्थकों के साथ रणनीति बनाने में जुट गए हैं। वहीं बाकी नेता फोन कॉल और पैरवी के सहारे अपने लिए राह तलाश रहे हैं।

भागलपुर जिले की सातों विधानसभा सीटें—भागलपुर, कहलगांव, नाथनगर, गोपालपुर, सुल्तानगंज, पीरपैंती और बिहपुर—इस समय राजनीतिक गतिविधियों का गरमागर्म केंद्र हैं। हर सीट पर दावेदार अपने समीकरण और समर्थन के आधार पर पार्टी नेतृत्व तक पहुंच बनाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।


भागलपुर विधानसभा:
कांग्रेस के मौजूदा विधायक अजीत शर्मा सबसे आश्वस्त दिख रहे हैं। संगठन के अंदर से भी संकेत मिल चुके हैं कि उनके टिकट में कोई बदलाव नहीं होगा। भाजपा में रोहित पांडेय, अर्जित शाश्वत चौबे, प्रशांत विक्रम और दिलीप मिश्रा चर्चा में हैं। इन नेताओं को पार्टी नेतृत्व ने भरोसा दिया है कि इस बार टिकट उन्हीं को मिलेगा।

कहलगांव:
कहलगांव में मुकाबला इस बार काफी दिलचस्प है। भाजपा से पवन यादव, कांग्रेस से प्रवीण सिंह कुशवाहा और जिलाध्यक्ष परवेज जमाल, आरजेडी से रजनीश यादव और जदयू से शुभानंद मुकेश टिकट की दौड़ में हैं। सभी नेता अपने स्थानीय समीकरण और पार्टी संपर्क का सहारा लेकर अंतिम निर्णय तक अपने लिए मार्ग बनाना चाहते हैं।

सुल्तानगंज:
जदयू के ललित नारायण मंडल की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है, लेकिन कांग्रेस में भी हलचल तेज है। ललन कुमार, आनंद माधव और राजेश मिश्रा टिकट की कतार में हैं। आरजेडी से चंद्रशेखर यादव और वीआईपी पार्टी से अनंत कुमार उर्फ़ टुनटुन साह भी सक्रिय हैं। क्षेत्र में पोस्टर, बैनर और जनसंपर्क से माहौल पहले ही गर्म हो चुका है।

नाथनगर:
नाथनगर में सस्पेंस बरकरार है। आरजेडी विधायक अली अशरफ सिद्दीकी दोबारा मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। डिप्टी मेयर सलाउद्दीन अहसन भी मजबूत दावेदार हैं। जदयू से पूर्व विधायक लक्ष्मीकांत मंडल, महेश यादव, अजय यादव और पप्पू मंडल, जबकि लोजपा (रामविलास) से मिथुन यादव, विजय यादव और अमर कुशवाहा टिकट की दौड़ में सक्रिय हैं। जातीय समीकरण और स्थानीय समीकरण इस बार निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

गोपालपुर:
जदयू विधायक गोपाल मंडल इस बार भी पूरे आत्मविश्वास के साथ मैदान में हैं। पार्टी में नए चेहरे बुलो मंडल की चर्चा हो रही है। भाजपा से अनिल यादव, राजद से शैलेश कुमार और आर्यन यादव भी टिकट की दौड़ में हैं। गोपालपुर की राजनीति हमेशा से रंगीन और बेबाक अंदाज के लिए जानी जाती रही है, और इस बार भी इसका असर साफ दिख रहा है।

पीरपैंती:
भाजपा से ललन पासवान, अमन पासवान, मनीष दास और मुरारी पासवान सक्रिय हैं। आरजेडी से पूर्व विधायक रामबिलास पासवान और संजय रजक भी जोर आजमा रहे हैं। जन सुराज पार्टी ने पहले ही घनश्याम दास को उम्मीदवार घोषित कर दिया है।

बिहपुर:
2020 में जीत दर्ज करने वाले भाजपा नेता कुमार शैलेन्द्र इस बार भी दोबारा चुनावी मैदान में उतरने को तैयार हैं। आरजेडी और कांग्रेस अपने संभावित उम्मीदवारों पर मंथन कर रही हैं। राजद से धर्मेंद्र यादव का नाम चर्चा में है।

भागलपुर की सियासत में हर नेता अपने समीकरण और मेहनत के सहारे पार्टी नेतृत्व तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है। अगले कुछ दिनों में ही स्पष्ट होगा कि कौन होगा फाइनल उम्मीदवार और किसे अगले चुनाव तक इंतजार करना पड़ेगा।

इस बार का चुनाव भागलपुर के लिए खास, हर सीट पर दावेदारों की रणनीति और समर्थन की जंग, और हर धड़कन टिकट पर टिकी हुई है।


 

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