HIGHLIGHTS:
- फेक न्यूज एक्सपोज्ड: डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के दफ्तर ने गैस एजेंसी से जबरन सिलेंडर ले जाने के आरोपों को सिरे से नकारा।
- बड़ा खुलासा: उपमुख्यमंत्री के आप्त सचिव ने कहा— “कार्यालय में SDO का कोई पद ही नहीं है, तो दबाव किसने बनाया?”
- वायरल वीडियो: गर्दनीबाग के एक गैस एजेंसी संचालक का वीडियो हुआ था वायरल, जिसमें 4 सिलेंडर ले जाने का था दावा।
- एक्शन: अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ होगी जांच; सम्राट चौधरी ने जनता से की अपील— “बिना जांचे खबर शेयर न करें।”
सियासी गलियारों में ‘गैस’ का गुब्बारा फुस्स: आखिर कौन था वो ‘फर्जी’ SDO?
पटना: बिहार में जारी रसोई गैस की किल्लत के बीच ‘VVIP धौंस’ की एक ऐसी खबर उड़ी जिसने सरकार की फजीहत कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सोशल मीडिया पर एक वीडियो जंगल की आग की तरह फैला, जिसमें पटना के गर्दनीबाग स्थित एक गैस एजेंसी का संचालक दावा कर रहा था कि डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के दफ्तर से एक ‘एसडीओ’ (SDO) आए और धौंस जमाकर 4 भरे हुए सिलेंडर ले गए। लेकिन अब उपमुख्यमंत्री कार्यालय ने इस पूरे दावे की धज्जियां उड़ा दी हैं।
[VOB फैक्ट चेक: क्या है सच और क्या था ‘झूठ’?]
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वायरल दावा (Rumor) |
सरकारी हकीकत (Reality) |
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डिप्टी सीएम दफ्तर के SDO ने 15 सिलेंडर मांगे। |
डिप्टी सीएम कार्यालय में SDO का कोई पद ही नहीं है। |
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चाबी छीनकर 4 सिलेंडर जबरन ले गए। |
कार्यालय के किसी भी कर्मी ने कोई सिलेंडर नहीं मंगवाया। |
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VVIP कल्चर के तहत आम आदमी का हक मारा गया। |
आरोप पूरी तरह बेबुनियाद, भ्रामक और छवि बिगाड़ने की कोशिश। |
“दफ्तर का ढांचा ही नहीं पता और कहानी गढ़ दी!”
डिप्टी सीएम के आप्त सचिव शैलेंद्र कुमार ओझा ने शुक्रवार को मोर्चा संभालते हुए इस मामले पर कड़ा पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब दफ्तर के सरकारी स्ट्रक्चर में ‘SDO’ का पद ही मौजूद नहीं है, तो यह तथाकथित अधिकारी आया कहाँ से?
”यह केवल सम्राट चौधरी जी की छवि को धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश है। बिना किसी नाम या पहचान के एक अधिकारी का हवाला देकर अफवाह फैलाई गई। हम इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करा रहे हैं ताकि उस ‘फर्जी अधिकारी’ और अफवाह फैलाने वाले संचालक का सच सामने आ सके।” — शैलेंद्र कुमार ओझा (आप्त सचिव, उपमुख्यमंत्री)
गर्दनीबाग से शुरू हुआ ‘वीडियो वार’
बता दें कि गर्दनीबाग के एक गैस एजेंसी संचालक ने मीडिया के सामने आकर दावा किया था कि बुधवार को उसके पास भारी दबाव बनाया गया। संचालक ने कैमरे पर कहा कि उसने डर के मारे गोदाम की चाबी दे दी और अधिकारी 4 सिलेंडर ले गए। हालांकि, संचालक ने उस कथित अधिकारी का नाम नहीं बताया, जिससे शक की सुई अब संचालक की ओर ही घूमने लगी है।
VOB का नजरिया: किल्लत में सियासत का ‘जहरीला’ तड़का!
जब राज्य में गैस के लिए हाहाकार मचा हो, ऐसे समय में ‘अफवाहों’ का बाजार गर्म होना आम आदमी के गुस्से को भड़काने जैसा है। ‘SDO’ वाले फर्जी दावे ने यह साबित कर दिया कि यह पूरी कहानी स्क्रिप्टेड लग रही है। अगर वाकई कोई अधिकारी गया था, तो संचालक ने उसका नाम या गाड़ी का नंबर क्यों नहीं बताया? और अगर नहीं गया था, तो ऐसे संकट के समय में डिप्टी सीएम का नाम उछालने के पीछे क्या मंशा है? पुलिस को अब उस वीडियो की फॉरेंसिक और जमीनी जांच करनी चाहिए।


