प्यार का खौफनाक अंत:पति को छोड़ा लेकिन बांका में पंचायत के बीच प्रेमी ने फेरा मुंह, तो विवाहिता ने चुन ली मौत की राह

बांका/भागलपुर: मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों के उलझते धागों ने एक बार फिर एक हंसती-खेलती जिंदगी को मौत के आगोश में सुला दिया। बांका जिले के अमरपुर थाना अंतर्गत नया टोला हसनपुर गांव में घटित यह हृदयविदारक घटना महज एक आत्महत्या नहीं, बल्कि प्यार, धोखे और सामाजिक लोकलाज के बीच पिसती एक महिला की बेबसी की दास्तां है। 21 वर्षीय लाडो खातून ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जिस मोहब्बत के लिए उसने अपने दस महीने पुराने वैवाहिक रिश्ते और समाज की मर्यादाओं को दांव पर लगा दिया, वही शख्स ऐन वक्त पर भरी पंचायत में उसे पहचानने से भी इनकार कर देगा।

हकीकत से सामना: जब पति ने ही खोल दी बेवफाई की परतें

​इस पूरी घटना की पटकथा 8 अप्रैल की दोपहर को लिखी गई, जब लाडो का पति मो. आसिफ अपनी ससुराल यानी हसनपुर पहुंचा। आसिफ, जिसकी शादी करीब 10 महीने पहले बौंसी के कैरी गांव से लाडो के साथ हुई थी, उसे इस बात का इल्म तक नहीं था कि जिस घर में वह खुशियां तलाश रहा है, वहां उसकी पीठ पीछे कोई और ही खेल चल रहा है। जैसे ही आसिफ ने घर के भीतर प्रवेश किया, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने अपनी पत्नी को गांव के ही एक युवक मो. गुलफरान के साथ आपत्तिजनक अवस्था में कमरे में देख लिया।

​आसिफ ने इस दौरान गजब के संयम का परिचय दिया। आमतौर पर ऐसी स्थितियों में हिंसा या चीख-पुकार मचती है, लेकिन आसिफ ने चालाकी और कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेते हुए कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। उसने तुरंत अपनी सास और परिवार के अन्य सदस्यों को मौके पर बुलाकर अपनी आंखों के सामने का मंजर दिखाया। यह एक ऐसा क्षण था जिसने लाडो के सुखी वैवाहिक जीवन की नींव को हमेशा के लिए हिला दिया।

पंचायत का फैसला और प्यार का सार्वजनिक कबूलनामा

​मामला जब घर की चारदीवारी से बाहर निकला, तो पूरे गांव में सनसनी फैल गई। आनन-फानन में गांव के प्रबुद्ध लोगों और पंचों को इकट्ठा किया गया। पंचायत बैठी, जिसमें एक तरफ लाडो का पति और उसके परिजन थे, तो दूसरी तरफ प्रेमी गुलफरान और उसका परिवार। पंचायत के समक्ष जब लाडो से सवाल किए गए, तो उसने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी गलती और अपनी पसंद को सबके सामने रख दिया।

​लाडो ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उसके गुलफरान के साथ गहरे संबंध हैं और वह अपने पति आसिफ के साथ नहीं, बल्कि गुलफरान के साथ ही अपना भविष्य बिताना चाहती है। भारतीय ग्रामीण परिवेश में जहां महिलाएं अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में संकोच करती हैं, वहां लाडो का यह साहसी कदम यह बताने के लिए काफी था कि वह गुलफरान को लेकर कितनी गंभीर थी। आश्चर्यजनक रूप से, पति आसिफ और लाडो के माता-पिता ने भी उसकी खुशी के लिए इस बात पर सहमति जता दी कि यदि वह प्रेमी के साथ रहना चाहती है, तो वे उसे रोकने की कोशिश नहीं करेंगे।

धोखे का दंश: प्रेमी के इनकार ने तोड़ी उम्मीदें

​असली मोड़ तब आया जब पंचायत ने गुलफरान की ओर रुख किया। जिस शख्स के वादों पर लाडो ने अपनी दुनिया उजाड़ने का फैसला किया था, वही गुलफरान अब सवालों के घेरे में था। जैसे ही शादी की बात आई, गुलफरान के तेवर बदल गए। उसने भरी पंचायत में लाडो के साथ किसी भी तरह के रिश्ते या शादी से साफ इनकार कर दिया। उसने बड़ी बेरहमी से उन तमाम लम्हों को झुठला दिया जो उसने लाडो के साथ बिताए थे।

​प्रेमी का यह दोहरा रवैया लाडो के लिए किसी वज्रपात से कम नहीं था। वह सबके सामने बेइज्जत महसूस कर रही थी। एक तरफ उसने अपने पति को खो दिया था, और दूसरी तरफ जिस ‘सहारे’ की उम्मीद में उसने यह जोखिम लिया था, उसने भी बीच मझधार में हाथ छोड़ दिया। पंचायत में मिली इस जिल्लत और धोखे ने लाडो के भीतर जीने की इच्छा को खत्म कर दिया।

अंतिम सफर: जहर, अस्पताल और खामोश होती सांसें

​पंचायत के तुरंत बाद, मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुकी लाडो ने घर के भीतर जाकर जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। जब तक परिजनों को इसकी भनक लगती, उसकी स्थिति बिगड़ने लगी थी। उसे आनन-फानन में स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे भागलपुर के मायागंज (जेएलएनएमसीएच) अस्पताल रेफर कर दिया गया। गुरुवार की पूरी रात डॉक्टरों ने उसे बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन मौत का फंदा उसकी गर्दन पर कस चुका था। गुरुवार की रात इलाज के दौरान उसकी सांसों की डोर टूट गई और एक अधूरी प्रेम कहानी का खौफनाक अंत हो गया।

कानूनी कार्रवाई और पुलिस की तफ्तीश

​बेटी की मौत के बाद पिता मो. जलालुद्दीन के सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने बरारी पुलिस (भागलपुर) के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया, जिसे बाद में अमरपुर थाने को हस्तांतरित किया गया। पिता का आरोप है कि मामला सिर्फ धोखे का नहीं है, बल्कि गुलफरान के परिवार ने हिंसा का सहारा भी लिया। जलालुद्दीन के अनुसार, जब 8 अप्रैल को गुलफरान को पकड़ा गया था, तब उसके भाइयों और पिता ने जलालुद्दीन की पत्नी के साथ मारपीट की और जबरन गुलफरान को छुड़ाकर ले गए।

​पुलिस ने इस मामले में मृतका के पिता के आवेदन पर प्रेमी मो. गुलफरान और उसके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अब उन परिस्थितियों की गहराई से जांच कर रही है कि क्या लाडो को आत्महत्या के लिए उकसाया गया था या यह आपसी विवाद का परिणाम था। फिलहाल, आरोपी परिवार फरार बताया जा रहा है और पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।

समाज के लिए एक गहरा सबक

​बांका की यह घटना कई सवाल खड़े करती है। क्या आज के दौर में रिश्तों की पवित्रता महज भौतिक सुखों तक सीमित रह गई है? क्या ‘प्रेम’ के नाम पर दिए जाने वाले धोखे इतने जानलेवा हो सकते हैं? यह घटना यह भी दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतें भले ही फैसले लेने की कोशिश करती हैं, लेकिन अक्सर वे कानूनी पेचीदगियों और मानवीय भावनाओं के जटिल भंवर को समझने में विफल रहती हैं। लाडो की मौत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बेवफाई की कीमत अक्सर जान देकर चुकानी पड़ती है, जबकि असली कसूरवार कानून की नजरों से बचने का रास्ता ढूंढ लेते हैं।

​भागलपुर पुलिस ने शुक्रवार को शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है। गांव में मातम का माहौल है और लोग इस घटना के बाद स्तब्ध हैं। पुलिस का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

  • ये भी पढ़े..

    भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: पुलिस ने मानी चूक, मृतक के भाई ने डीएसपी की गिरफ्तारी की उठाई मांग

    Share Add as a preferred…

    भरत तिवारी एनकाउंटर पर बढ़ा सियासी बवाल, बिलौटी गांव में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का किया गया प्रतीकात्मक श्राद्ध

    Share Add as a preferred…